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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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doctrine of jurisdictional immunity
क्षेत्राधिकारिक उन्मुक्ति का सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत राज्याध्यक्षों राजदूतों एवं कुछ अन्य विशिष्ट इकाइयों को विदेशों में स्थानीय दीवानी वं फौज़दारी न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से उन्मुक्त माना जाता हैं । इसका अर्थ यह है कि स्थानीय न्यायालयों में इनके विरूद्ध कोई दीवानी या फौज़दारी कार्रवाई नहीं की जा सकती । इसे क्षेत्राधिकारिक उन्मुक्ति का सिद्धांत कहा जाता है और इसे क्षेत्र अथवा प्रदेश बहयता भी कहा जाता है ।

doctrine of military necessity
सैनिक अनिवार्यता सिद्धांत वह सिद्धांत जिसके अनुसार युद्धकाल मे सैनिक लक्ष्य की पूर्ति के लिए युद्ध - विधि के नियमों का उल्लंघन भी उचित माने जाने का दावा किया जाता है ।

doctrine of natural law
प्राकृतिक विधि सिद्धांत आचरण के वे नियम जिनके बारे में यह विश्वास है कि मानव व्यवहार में इनका पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए । इन नियमों का स्रोत कोई शासक या विधायिका न होकर स्वयं मानव विवेक माना जाता है । ये समय और स्थान की सीमाओं से मर्यादित नही होते । इनके बाध्यकारी माने जाने का कारण यह है कि ये नियम मनुष्य जोकि एक विवेकशील एवं सामाजिक प्राणी है, की प्रकृति के अनुरूप होते हैं । एक मत यह है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि का आधार प्राकृतिक विधि के ये नियम ही हैं ।

doctrine of necessity
अनिवार्यता सिद्धांत वह सिद्धांत जिसके अनुसार यदि कोई राज्य किसी आसन्न संकट से अपनी रक्षा क रने के लिए किसी अन्य राज्य को अधिकारों का अतिलंघन करता है तो अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत उसे अवैध नही माना जा सकता । इसके लिए यह आवश्यक है कि वह संकट ऐसा होना चाहिए जो उस राज्य के अस्तित्व, भू - भागीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता को खतरे में डालता हो । वर्तमानकालीन अंतर्रष्ट्रीय विधि में इसे केवल आत्मरक्षा तक सीमित कर दिया गया है ।

doctrine of non - recognition
अमान्यता का सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार बल - प्रयोग से की गई कोई संधि अथवा उससे उत्पन्न किसी स्थिति अथवा प्रदेश - प्राप्ति को मान्यता न देने का निश्चय अमान्यता कहलाता है । अमान्यता के सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम सन् 1933 मे जापान द्वारा मंचूरिया पर बलात आधिपत्य करने के संदर्भ में अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी स्टिमसन द्वारा अमेरिकी विदेश नीति के एक सिद्धांत रूप में किया गया था । उनके नाम पर इस सिद्धांत को 'स्टिमसन सिद्धांत' भी कहा जाता है । स्टिमसन ने यह घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका किसी ऐसी संधि, प्रदेश - प्राप्ति या स्थिति को मान्यता नहीं देगा जो बल - प्रयोग से उत्पन्न की गई हो । मंचूरिया के संदर्भ मे इस सिद्धांत का अनुमोदन राष्ट्र संघ की सभा ने भी किया । 28 अक्तूबर 1976 को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने भी एक प्रस्ताव पारित करके तथा कथित ट्रान्सकाई राज्य को मान्यता न दिए जाने का अनुरोध सदस्य - राज्यों से किया था ।

doctne of self preservation
आत्म परिरक्षण सिद्धांत दे. doctrine of necessity.

doctrine of sovereign immunity
संप्रभु उन्मुक्ति सिद्धांत इस सिद्धांत का तात्पर्य यह है कि किसी विदेशी राज्य अथवा उसके राज्याध्याक्ष एवं उनकी संपत्ति तता सार्वजनिक जलपोतों पर स्थानीय राज्य के न्यायालयों का कोई क्षेत्राधिकार नहीं होता । वर्तमान काल में यह माना जाने लगा है कि राज्य की आर्थिक क्रियाओं व्यापार आदि को इस सिद्धांत की परिधि के परे माना जाए ।

doctrine of transformation
रूपांतरण सिद्धांत वह सिद्धांत जिसके अनुसार प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम कीस राज्य की राष्ट्रीय विधि का केवल उसी सीमा तक अंग होते हैं जहाँ तक उन्हें राष्ट्रीय विधि के रूप मे प्रत्यक्षतः अंगीकृत कर लिया गया हो ।

domestic jurisdiction
घरेलू क्षेत्राधिकार वे विषय जिन पर कोई राज्य विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता और इनसे संबंधित व्यवस्था करना वह अपने राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार का विषय मानता है । वास्तव में यह प्रत्येक राज्य का अपना दृष्टिकोण और अपना निर्णय होता है कि कौन- सा विषय उसके घरेलू क्षेत्राधिकार का है । इस निर्णय को करने में वह किसी बाहय शक्ति द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता । संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर मे भी यह स्वीकार किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को किसी राज्य के उन मामलों में हस्तक्षेप करन का कोई अधिकार नहीं होगा जो उस राज्य के घरेलू क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हों ।

dominion status
डोमीनियन स्थिति, डोमीनियन पद 1931 के एक कानून के अंतर्गत ब्रिटिश साम्राज्य के कुछ प्रदेशों को (आस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, दक्षिणी अफ्रीका आदि ) ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वाधीनता प्रदान की गई थी और इस कानून के अनुसार ब्रिटिश राष्ट्रमंडल की स्थापना हुई जिसके सदस्य ग्रेट ब्रिटेन और ये स्वाशासित प्रदेश थे । इन प्रदेशों को स्वतंत्र राज्यों के अंतर्राष्ट्रीय अधिकार जैसे दूतों का आदान - प्रदान संधियों का संपादन आदि भी प्राप्त हो गए और ये अंतर्राष्ट्रीय व्यक्ति बन गए परंतु ये ब्रिटिश राष्ट्रमंजल के सदस्य बने रहे जिसका प्रतीकात्मक अध्यक्ष ब्रिटिश सम्राट होता है ।


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