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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Transcendental Philosophy

प्रागनुभविक दर्शन
मुख्य रूप से, कांट का दार्शनिक सिद्धांत जिसमें अनुभव और ज्ञान में दत्त सामग्री की व्यवस्था या उसके संश्लेषण के लिए प्रागनुभविक मानसिक तत्त्वों (आकारों, पदार्थों इत्यादि) को आवश्यक माना गया है।

Transcendental Proof

प्रागनुभविक प्रमाण
कांट के अनुसार, वह प्रमाण जो प्रमेय को मानवीय अनुभव का एक प्रागनुभविक आलंब सिद्ध करता है, जिसके बिना अनुभव संभव नहीं होता।

Transcendentals

विशेषातीत प्रत्यय
स्कॉलेस्टिक दर्शन में, वे प्रत्यय जो समस्त वस्तुओं पर लागू होते हैं, जैसे, सत्ता, वस्तु, कुछ, एक, सत्य तथा शुभ।

Transitive Relation

संक्रामी संबंध
वह संबंध जो यदि अ का ब से हो और ब का स से हो तो अ का स से अवश्य होता हो, जैसे : “- से बड़ा होना”।

Transitive States

संक्रामी अवस्थाएँ
विलियम जेम्स के अनुसार, चेतना-प्रवाह की वे अवस्थाएँ जो एक स्थिर अवस्था से दूसरी स्थिर अवस्था तक पहुँचने में सहायता देती हैं। ये संबंधात्मक होती हैं और भाषा में भी ‘ऊपर’ इत्यादि शब्दों में प्रकट होती हैं।

Transmigration

पुनर्जन्म, जन्मान्तरण
आत्मा का एक शरीर की मृत्यु के पश्चात् दूसरा (मानवीय या मानवेतर) शरीर ग्रहण करना।

Transvaluation Of Values

मूल्यों का मूल्यांतरण
मुख्यतः नीत्शे (Nietzsche) के द्वारा प्रयुक्त पद जो युग की प्रधान और परंपरागत प्रवृत्तियों, मूल्यों और आदर्शों में क्रांति लाने के प्रयोजन से प्रेरित हैं।

Trinity

त्रिरूपेश्वर, त्रिमूर्ति, त्रयी
ईसाई धर्मावलंबियों की एक मान्यता के अनुसार, ईश्वर, जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के रूपों में तीन पक्षों या व्यक्तियों का समवाय है, यद्यपि एक द्रव्य के रूप में वह अखंड है।

Truth

1. सत्यता : कथनों, प्रतिज्ञप्तियों तथा प्रत्ययों की वह विशेषता जो उनकी वस्तु-अनुरूपता, पारस्परिक संगति अथवा अर्थक्रियाकारित्व के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।
2. सत्य : सत्य प्रतिज्ञप्ति या वाक्य।

Tychism

अनियत घटनावाद, संयोगवाद
वह मत कि विश्व में कोई घटना कारणों के द्वारा नियत नहीं है : सभी कुछ यादृच्छिक है विशेषतः पर्स (Peirce) के अनुसार, यह सिद्धांत कि संयोग विश्व में क्रियाशील एक वस्तुगत सत्ता है।

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