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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Redundant Definition

व्यतिरिक्त परिभाषा, अनावश्यक परिभाषा
परिभाषा का एक दोष जिसमें किसी विशेषता की अनावश्यक पुनरावृत्ति होती है।
उदाहरण : “मनुष्य एक बुद्धिमान प्राणी है जो तर्क करता है।” (टिप्पणी- तर्क करने की विशेषता “बुद्धिमान्” कहने में आ जाती है)।

Referend

निर्देशक
वह जिसके द्वारा निर्देश किया जाए, अर्थात्- निर्देश क्रिया का कारण, जैसे प्रत्यक्ष जिसके द्वारा किसी वस्तु का निर्देश होता है अथवा जिसके द्वारा उसका बोध होता है। कुछ लोगों ने निर्देश के विषय के लिए भी इस शब्द का प्रयोग किया है।

Referent

निर्देश्य
वह वस्तु जिसका कोई शब्द, वाक्य या कथन बोध कराता है; निर्देश-क्रिया का विषय या “कर्म”।

Referential Definite

निर्देशीय निश्चायक, निर्देशीय निर्दिष्ट
जॉनसन के अनुसार, आर्टिकल “दि” या उसका कोई रूप-भेद जिसके प्रयोग में एक वस्तु विशेष की ओर संकेत निहित होता है।

Referential Realism

निर्देशात्मक यथार्थवाद
लेज़र वुड (Ledger wood) के अनुसार, वह ज्ञानमीमांसीय सिद्धांत कि ज्ञान में (1) ज्ञाता, (2) संवेद्य गुण और (3) उन गुणों के द्वारा निर्दिष्ट एक ‘सांवृतिक’ वस्तु जिसका कि अस्तित्व भी हो सकता है : ये तीन तत्व समाविष्ट होते हैं। (लेज़र वुड : फर्म के “ए हिस्ट्री ऑफ फिलोसोफिकल सिस्टम्स” में एक अध्याय के लेखक)।

Refined Egoistic Hedonism

परिष्कृत स्वार्थमूलक सुखवाद
एपिक्यूरस का नैतिक सिद्धांत जो तर्कबुद्धि का अनुसरण करते हुए संपूर्ण जीवन को सुखमय बनाने की संस्तुति करता है और क्षणिक विषय-सुख को हितकर नहीं मानता।

Refined Utilitarianism

परिष्कृत उपयोगितावाद
जे. एस. मिल का नैतिक मत जो सबके सुख को साध्य मानता है और बौद्धिक सुखों को शारीरिक सुखों से श्रेष्ठ मानते हुए सुखों में गुणात्मक अंतर को स्वीकार करता है।

Reflection

1. मनन : साधारणतः बात को समझने के लिए या स्वीकार करने से पहले शांति के साथ गहराई से सोचने-विचारने की प्रक्रिया।
2. अनुचिंतन : विशेषकर लॉक, स्पिनोजा और लाइब्नित्ज़ के दर्शन में, अंतर्निरीक्षण से मन को स्वयं अपनी क्रियाओं का होने वाला ज्ञान।

Reflective Morality

मननात्मक नैतिकता
वह नैतिकता जिसका आधार चिंतन-मनन होता है, न कि रूढ़ि या कानून का अन्धानुकरण मात्र : रूढ़ियों और कानूनों में पारस्परिक विरोध के होने पर व्यक्ति को चिंतन का सहारा लेना चाहिए।

Reflexive Relation

परावर्ती संबंध
ऐसा संबंध ‘स’ जिसके होने पर ‘अ स अ’ ‘स’ के क्षेत्र में समाविष्ट सभी ‘अ’ ओं के लिए सत्य होता है, जैसे पूर्ण संख्याओं का ”से अधिक बड़ा नहीं” संबंध।

Reformative Theory Of Punishment

सुधारात्मक दंड सिद्धांत
वह सिद्धांत कि अपराधी या पापी को दंड देने का उद्देश्य उसको सुधारना है।

Refutation By Logical Analogy

तार्किक साम्यानुमानमूलक खण्डन
किसी युक्ति का खण्डन करने का वह तरीका जिसमें सत्य आधारवाक्यों किन्तु स्पष्टतः असत्य निष्कर्षवाली एक ऐसी युक्ति का निर्माण किया जाता है जिसका आधार मूल युक्ति के तुल्य होता है।
उदाहरण : यदि मैं राष्ट्रपति होता तो मैं एक प्रसिद्ध व्यक्ति होता; मैं राष्ट्रपति नहीं हूँ, अतः मैं एक प्रसिद्ध व्यक्ति नहीं हूँ। इसका खंडन करने के लिए इस युक्ति का प्रयोग किया जा सकता है, यदि आइन्सटाइन राष्ट्रपति होते तो वे एक प्रसिद्ध व्यक्ति होते; आइन्सटाइन राष्ट्रपति नहीं हैं; अतः आइन्सटाइन एक पसिद्ध व्यक्ति नहीं हैं।

Regression

शैशवावर्तन
फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक पद्धति की वह मानसिक प्रक्रिया जिसमें कोई प्रौढ़ व्यक्ति अपनी वर्तमान अवांछित परिस्थिति से बचने के लिए बाल-सुलभ व्यवहार करता है।

Regressive Train Of Reasoning

प्रतिगामी तर्कमाला
न्यायवाक्यों की वह श्रृंखला जिसमें क्रम उत्तर-न्यायाक्य से पूर्व-न्यायवाक्य की ओर होता है, अर्थात् पहले अंतिम निष्कर्ष का कथन किया जाता है, फिर उसके साधक आधारवाक्यों का, फिर उन आधारवाक्यों के साधक आधारवाक्यों का तथा इसी प्रकार आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहती है।
उदाहरण : राम मरणशील है;
क्योंकि सभी मनुष्य मरणशील हैं;
और राम एक मनुष्य है।
सभी मनुष्य मरणशील हैं;
क्योंकि सभी प्राणी मरणशील हैं;
और सभी मनुष्य प्राणी हैं।

Regressus Ad Infinitum

अनवस्था-दोष
एक तर्कगत दोष जिसमें तर्क बिना किसी संतोषजनक परिणाम पर पहुँचे लगातार अनंत तक चलता रहता है – इसमें समस्या को टाला जाता है, उसका समाधान नहीं होता। इसी अनवस्था दोष से बचने के लिए ईश्वर को सृष्टि का आदिकारण माना जाता है।

Regularity Theory

नियमितता- सिद्धांत
ह्यूम् द्वारा स्थापित एक सिद्धांत जो कारणता को दो घटनाओं के नियमित आनन्तर्य की आवृत्ति मात्र मानता है।

Regulative Principles

नियामक तत्त्व
विशेषतः कांट के दर्शन में, प्रज्ञा के विज्ञानों के लिए प्रयुक्त, जो अनुभव या ज्ञान के अंग न होकर उसे तंत्रबद्ध करने के लिए आदर्श का काम करते हैं। ऐसे तीन विज्ञान माने गए है, आत्मा, जगत् और ईश्वर।

Regulative Science

नियामक विज्ञान
वह विज्ञान जो नियामक (व्यवहार का नियमन करने वाले) नियमों का अध्ययन करता है, जैसे नीतिशास्त्र, तर्कशास्त्र एवमं सौंदर्य शास्त्र।

Reification

वस्तुकरण, पदार्थीकरण
अवस्तु को वस्तु बना देना; जो केवल मन या विचार में अस्तित्व रखता है उसे एक वास्तविक वस्तु मान बैठना; अमूर्त में मूर्तत्व का आरोप कर देना। प्लेटो का विज्ञानवाद इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।

Reincarnation

पुनर्जन्म
आत्मा का मृत्यु के पश्चात् पुनः देह धारण करना, अनेक धर्मों में, मुख्यतः हिन्दू धर्म में, यह विश्वास प्रचलित है।

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