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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Performative Functions

निष्पादन क्रिया
ब्रिटिश दार्शनिक जे. एल. ऑस्टिन (J.L. Austin) द्वारा प्रयुक्त पद। जिस प्रक्रिया की अभिव्यक्ति निष्पादन उच्चार द्वारा सम्पन्न होती है, उसे निष्पादन क्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए “मैं आपको 100 रू, देने का वादा करता हूँ”, में ‘वादा करना’ निष्पादन क्रिया है।

Peripatetic

परिव्राजक-संप्रदाय
एरिस्टॉटल द्वारा स्थापित संप्रदाय का नाम, जिसका आधार यह बताया जाता है कि इस संप्रदाय के लोग भ्रमण करते हुए दार्शनिक चर्चा या वाद-विवाद करते रहते थे, परन्तु अब यह माना जाता है कि अरस्तू के विद्यालय में घूमने के लिए एक विशेष पथ बना हुआ था जिससे यह नाम व्युत्पन्न है।

Peripateticism

परिभ्रामीवाद
देखिये “peripatetic”।

Peripheralist

परिधिवादी
वे दार्शनिक जो किसी दार्शनिक सिद्धांत के केंद्रीय विचारों पर ध्यान न देकर उससे पृथक् महत्वहीन विषय पर विशेष चर्चा करते हैं।

Perlocutionary Act

प्रभावी वचनकर्म
ब्रिटीश दार्शनिक जे. एल. ऑस्टिन ने तीन प्रकार की क्रियाओं में भेद किया है : (1) वचनकर्म (locutionary act) (2) वचनतेर कर्म (illocutionary act) एवं (3) प्रभावी वचनकर्म (perlocutionary act)। प्रभावी वचनकर्म वे वचनकर्म हैं जो किसी कथन द्वारा श्रोता को प्रभावित करने की चेष्टा करते हैं।

Persecution

उत्पीड़न
असामान्य मनोविज्ञान (abnormal psychology) में इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति इस भ्रम में रहता है कि कोई व्यक्ति उसे कष्ट देने का प्रयत्न कर रहा है।

Personal Idealism

वैयक्तिक प्रत्ययवाद
परम सत्ता को व्यक्तित्त्व से सम्पन्न अर्थात् ज्ञान, संकल्प, आत्म-चेतना इत्यादि वैयक्तिक गुणों से युक्त माननेवाले सिद्धांत, जैसे ब्रह्म को सगुण माननेवाला मत।

Personal Identity

वैयक्तिक तादात्म्य, व्यक्तिगत अनन्यता
काल परिवर्तन के बावजूद व्यक्ति के न बदलने या अनन्य बने रहने की विशेषता, जो कि उसके अभिन्न बने रहने के बोध में प्रकट होती है।

Personalism

व्यक्तिवाद
वह सिद्धांत जो व्यक्तित्त्व को परम मूल्य मानता है और सत्ता के सच्चे अर्थ को समझने की कुंजी व्यक्तित्त्व के संप्रत्यय को बताता है। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम (1863) में अमेरिका में ब्रॉन्सन एल्कॉट (Bronson Alcott) ने इस मत के लिए किया था कि चरम तत्त्व व्यक्तित्त्व संपन्न (सगुण) ईश्वर है जो अपने नित्य सर्जनशील संकल्प के बल से विश्व को धारण करता है।

Personalistic Idealism

वैयक्तिकीय प्रत्ययवाद
देखिए “personal idealism”।

Personal Realism

वैयक्तिक यथार्थवाद
परम सत्ता अर्थात् ईश्वर को एक अतिप्राकृतिक व्यक्तित्त्व तथा उसकी सृष्टि में आत्मिक के साथ-साथ भौतिक पदार्थों का भी अस्तित्त्व मानने वाला सिद्धांत।

Perspectivism

संदर्शवाद
विभिन्न वैकल्पिक संप्रत्ययों परिप्रेक्ष्यों एवं विश्वासों के माध्यम से बाह्य विश्व की व्याख्या।

Persuasive Definition

प्रभावी परिभाषा, प्रत्यायक परिभाषा
प्रो. सी. एल. स्टीवेंसन के द्वारा सर्वप्रथम ऐसी परिभाषा को दिया गया नाम जिसका प्रयोजन श्रोता या पाठक के संवेगों को प्रभावित करके उससे कोई दृष्टिकोण स्वीकार या अस्वीकार करवाना होता है, जो कि किसी संवेगार्थक शब्द के, जैसे शुभ-अशुभ इत्यादि के प्रयोग से किया जाता है।

Perverse Ratio

तर्कबुद्धि विपर्यय, कुतर्क विपर्यास
अनुभव और तार्किक सिद्धांतों का उल्लंधन करने वाली बुद्धि।

Pessimism

निराशावाद
वह मत कि संसार में दुःख, मृत्यु, अशुभ, ही सत्य है, शेष सभी कुछ, सुख इत्यादि क्षणिक और मिथ्या है। आधुनिक युग में शोपेनहावर और प्राचीन काल में बुद्ध (‘सर्व दुःखम’) इस मत के मुख्य अनुयायी हुए।

Pessimistic Voluntarism

निराशावादी संकल्पवाद
नीतिशास्त्र का वह मत जिसके अनुसार हमारे संकल्प का पर्यवसान निराशा में होता है।

Petites Perceptions

सूक्ष्म प्रत्यक्ष
लाइब्नित्ज़ के द्वारा अस्फुट तथा अचेतन प्रत्यक्षों के लिए प्रयुक्त पद। लाइब्नित्ज़ ने चेतना में मात्रा-भेद मानते हुए निम्न स्तर के चिदणुओं में इनकी कल्पना की थी, जिसमें फ्रॉयड के ”अचेतन मन” के आधुनिक सिद्धांत की झलक दिखाई देती है।

Petitio Principii

आत्माश्रय-दोष
एक तर्कदोष, जो तब उत्पन्न होता है जब निष्कर्ष आधारवाक्यों में पहले से ही निहित होता है। जे. एस. मिल ने एरिस्टॉटल के न्यायवाक्य में उपर्यक्त दोष का निरूपण किया है।

Phenomenalism

सवृत्तिवाद, दृश्यप्रपंचवाद
वह सिद्धांत कि ज्ञान संवृति, दृश्य प्रपंच या दृश्य जगत् तक ही सीमित है, जिसके अंतर्गत प्रत्यक्षगम्य भौतिक विषय और अंतर्निरीक्षणगम्य मानसिक विषय आते हैं। इसको माननेवाले साधारण वस्तुविषयक कथनों को संवृति-विषयक कथनों में अर्थात् इंद्रिय-प्रदत्तों की भाषा में परिवर्तित करने की आवश्यकता बताते हैं। वे संवृत्ति के पीछे कोई सत्ता या तो मानते नहीं या उसे अज्ञेय कहते हैं।

Phenomenology

संवृतिशास्त्र, दृश्यप्रपंचशास्त्र
दृश्य-प्रपंच का वर्णन-विश्लेषण करने वाला शास्त्र। सर्वप्रथम कांट के समकालीन जर्मन दार्शनिक लैम्बर्ट द्वारा ”आभासों की मीमांसा” के लिये प्रयुक्त शब्द। स्वयं कांट द्वारा तत्त्वमीमांसा की उस शाखा के लिए प्रयुक्त शब्द जो गति और गतिहीनता का वस्तुओं के विधेयों के रूप में विवेचन करती है। हेगेल के द्वारा किसी तत्त्व को उत्तरोत्तर अधिक विकसित अभिव्यक्तियों का अध्ययन करने वाले शास्त्र के अर्थ में प्रयुक्त। परन्तु सर्वाधिक प्रचलित अर्थ में यह एडमंड हुसर्ल (edmund husserl) द्वारा दर्शन में चलाए गए एक आंदोलन का नाम है।

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