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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Partition

विखंडन, अवयवन
जिस क्रिया के द्वारा हम किसी यौगिक अथवा संशलिष्ट प्रत्यय को उसके अवयवों में विभाजित करते हैं, उसे विखंडन अथवा अवयवन कहा जाता है।

Passive Awareness

निष्क्रिय चेतना, निष्क्रिय बोध
भारतीय दार्शनिक जे, कृष्णामूर्ति ने सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग किया जिसके अनुसार बोध को प्राप्त करने के लिए किसी विशिष्ट प्रयास की आवश्यकता नहीं होती, अपितु वह स्वतः स्वाभाविक रूप से मनुष्य को प्राप्त होती है। इसकी तुलना जैन-दर्शन में ‘केवल ज्ञान’ अथवा ‘अद्वैत-वेदांत’ के ‘साक्षी चैतन्य’ से की जा सकती है।

Passive Courage

निष्क्रिय साहस
नैतिक दर्शन में ‘साहस’ को एक विशिष्ट सद्गुण के रूप में स्वीकार किया गया है। यह साहस जब तक किसी विशिष्ट परिस्थिति में सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक इस ‘साहस’ को निष्क्रिय साहस’ कहा जाता है।

Passive Empiricism

निष्क्रिय इंद्रियानुभववाद
जॉन लॉक इत्यादि का वह सिद्धांत कि ज्ञान का एक मात्र स्रोत इंद्रियानुभव है और मन तब तक निष्क्रिय बना रहता है जब तब बाह्य जगत् से आने वाली संवेदनाएँ उस तक नहीं पहुँच जाती।

Passive Resistance

सत्याग्रह, अहिंसक प्रतिरोध
किसी अत्याचार अथवा अनाचार के विरूद्ध सत्यनिष्ठ होकर अहिंसक किन्तु सक्रिय रूप में विरोध प्रकट करना। स्वतंत्रता-संग्राम में गाँधी जी ने राजनीतिक समस्याओं के समाधान के लिए अंग्रेजों के विरूद्ध इस अस्त्र का सफल प्रयोग किया था।

Pathetic Fallacy

भावाभास
निर्जीव वस्तुओं के प्रति उन भावनाओं, संवेदनाओं, प्रतिक्रियाओं को आरोपित करना जो केवल सजीव व्यक्तियों के प्रति व्यक्त की जा सकती हैं।

Patient

कर्मविषय, कर्मपात्र
कारणविषयक सामान्य धारणा के अनुसार, वह सामग्री जो स्वयं तुलनात्मक रूप से निष्क्रिय रहती है और जिस पर क्रिया करके कारण कार्य को उत्पन्न करता है, जैसे आग लगने की स्थिति में लकड़ियों का ढेर। (विज्ञान इस भेद को उचित नहीं मानता।)

Patristic Philosophy

पादरी-दर्शन
ईसाई धर्म के पादरियों द्वारा प्रतिपादित दर्शन जो ईश्वर, विश्व से मानव के संबंध में एक तर्कसंगत दार्शनिक सिद्धांत प्रस्तुत करता है। ईसाई धर्म में प्रचलित पिता (father), पुत्र (son) एवं पवित्र (holy hhost) एवं पवित्र आत्मा (trinity) से संबंधित ‘त्रयी’ (trinity) के सिद्धांत का यह एक संशोधित रूप है।

Peano’S Postulate

पियानी-अभ्युपगम
देखिए “primitive propositions”।

Peccability

पाप-प्रवणता, पापवृत्तिता, दोष-प्रवणता
पाप-कर्म करने वाले व्यक्ति के भीतर पाप करने की प्रवृत्ति। इसे पाप-प्रवणता अथवा ‘पापवृत्तिता’ कहते हैं।

Penance

तपस्या, तप
भूतकाल में किए गए पाप-कर्मों के प्रायश्चित के लिए अथवा वर्तमान में नवीन गुणों को अर्जित करने के लिए की गई कष्ट-साध्य क्रिया।

Penitence

परिताप
ऐसे व्यक्ति की मानसिक अवस्था सूचक शब्द जो अपनी गलतियों को स्वीकार करता है तथा उनके लिए बहुत दुःखी है और भविष्य में उन्हें न दोहराने के लिए कृतसंकल्प है।

Penology

दंड-विज्ञान, दंडशास्त्र
अपराध-शाखा से संबंधित वह विज्ञान जिसमें अपराध की मात्रा व गुण के अनुपात में दंड-विधान किया जाता है।

Per Accidens Predication

आगंतुकगुणी विधेयन
किसी पद का उसके आगंतुक गुणों के माध्यम से वर्णन करना। जैसे : मनुष्य दो हाथ वाला प्राणी है।

Perception

प्रत्यक्ष
1. ज्ञान का एक साधन विशेष।
2. वह ज्ञान जो इन्द्रिय और विषय के सम्पर्क से उत्पन्न होता है।
3. इन्द्रिय और विषय के सम्पर्क के बिना भी प्राप्त ज्ञान, जिसे अलौकिक या अतीन्द्रिय प्रत्यक्ष कहते हैं। पाश्चात्य दार्शनिकों में बर्ट्रेन्ड रसल के अनुसार परिचयात्मक या परिचयाश्रित ज्ञान (knowledge by acquaintance) एक प्रकार का प्रत्यक्ष है। तार्किक प्रत्यक्षवादियों ने इन्द्रिय-प्रदत्तों (sense data) के ज्ञान को प्रत्यक्ष माना है।

Perceptive Premise

प्रात्यक्षिक आधारिका
प्रत्यक्ष पर आश्रित आधारिका जिससे कोई तार्किक निष्कर्ष निकाला जाए।

Perceptual Intuitionism

प्रत्यक्षपरक-अंतःप्रज्ञावाद
नीतिशास्त्र में अंतःप्रज्ञावाद का एक प्रकार जिसके अनुसार मनुष्य का अंतःकरण किसी कर्म-विशेष की नैतिकता अथवा अनैतिकता के विषय में तत्काल निर्णय देने का पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करता है।

Perfect Figure

पूर्ण आकृति
एरिस्टोटेलियन तर्कशास्त्र में, प्रथम आकृति, जिस पर अरस्तू की वह अभ्युक्ति सीधी लागू होती है कि जो बात किसी जाति के बारे में सत्य है वह उसके प्रत्येक व्यक्ति के बारे में सत्य है (“यज्जातिविधेयं तद् व्यक्तिविधेयम्”)।

Perfect Induction

पूर्ण आगमन
पारंपरिक पाश्चात्य तर्कशास्त्र में, आगमन का वह प्रकार जिसमें सभी विशिष्ट दृष्टान्तों की परीक्षा करके एक सर्वव्यापी प्रतिज्ञप्ति की स्थापना की जाती है, जैसे किसी पुस्तकालय की 161 नंबर की सभी पुस्तकों की जाँच करने के बाद यह कहना कि अमुक पुस्तकालय में 161 नंबर की सभी पुस्तकें तर्कशास्त्र की है। (यह वास्तव में आगमन नहीं बल्कि एक आगमन-आभास क्रिया है।)

Perfectionism

पूर्णतावाद
व्यक्ति या समाज की, अथवा दोनों ही की पूर्णता की प्राप्ति को सर्वोच्च लक्ष्य माननेवाला नैतिक सिद्धांत। प्लेटो, अरस्तू एवं ग्रीन इस सिद्धांत के प्रबल समर्थक हैं।

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