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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi) (CSTT)

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Lamaism

लामाधर्म, लामावाद
महायान बौद्ध धर्म का वह रूप जो मुख्यतः तिब्बत में, पर साथ ही भूटान, लद्दाख, सिक्किम तथा मध्य एशिया के अन्य प्रदेशों में भी मिलता है और जिसमें पुराने ‘बोन’ नामक जादूटोनाप्रधान धर्म के तथा तंत्र के तत्त्व मिश्रित हैं।

Law Of Bivalence

दिवमूल्य – नियम
एक नियम जिसके अनुसार किसी प्रतिज्ञाप्ति के दो ही मूल्य होते हैं : पहला सत्यता एवं दूसरा असत्यता; अर्थात् यह कि प्रतिज्ञाप्ति या तो सत्य होती है या असत्य, कोई तीसरी अवस्था संभव नहीं है।

Law Of Contradiction

व्याघात – नियम
विचार का वह नियम कि कोई भी वस्तु एक ही देश तथा काल में व्याघाती गुणों – वाली नहीं हो सकती : क, ख और अ – ख दोनों नहीं हो सकता। यह तर्कशास्त्र के आधारभूत नियमों में दूसरा है। कुछ विचारकों ने इसे अव्याघात – नियम (law of non-contradiction) भी कहा है।

Law Of Excluded Middle

मध्याभाव – नियम
तर्कशास्त्र में, विचार का एक आधारभूत नियम जिसके अनुसार किसी एक वस्तु या स्थिति के बारे में दो व्याघाती बातें एक साथ असत्य नहीं हो सकती : यदि एक असत्य है तो दूसरी अवश्य सत्य होगी; उनके अतिरिक्त कोई तीसरा विकल्प नहीं होगा।

Law Of Identity

तादात्म्य – नियम
तर्कशस्त्र के आधारभूत नियमों में से एक, जिसके अनुसार, “सत् सदा – सर्वदा आत्मानुरूप होता है।“ इस नियम को इस प्रकार व्यक्त किया गया है : “कोई वस्तु जो है वह है“, या “क, क है“ अथवा प्रत्येक वस्तु अपने तुल्य होती है।“
इसमें यह माना गया है कि प्रत्येक वस्तु की एक ऐसी प्रकृति होती है जो नहीं बदलती। यह परिवर्तन का निषेध नहीं है : परिवर्तन होता है पर वस्तु अपनी एकता बनाए रखती है।

Law Of Parsimony

लाघव – न्याय, लाघव – नियम
एक प्रणाली संबंधी नियम जो व्याख्या में मितव्ययिता के ऊपर बल देता है। यह नियम तथ्यों या घटनाओं की व्याख्या को व्यर्थ शब्दों के जाल द्वारा जटिल बनाने के स्थान पर कम से कम शब्दों द्वारा स्पष्ट करने को कहता है।

Law Of Sufficient Reason

पर्याप्त हेतु नियम
तर्कशास्त्र में, विचार का एक आधारभूत नियम (लाइब्नित्ज़ के अनुसार चौथा) जिसके अनुसार प्रत्येक परिवर्तन के पीछे कोई कारण होता है, जिसके द्वारा उसकी संतोषजनक व्याख्या की जा सकती है।

Laws Of Co – Existence

सह अस्तित्व – नियम
वे प्राकृतिक नियम जो एक ही काल में अस्तित्व रखने वाली वस्तुओं के नियत संबंधों को प्रकट करते हैं।

Laws Of Succession

अनुवर्तिता – नियम
वे प्राकृतिक नियम जो आगे – पीछे (पूर्वापर) घटने वाली घटनाओं के नियत संबंधों को प्रकट करते हैं।

Laws Of Thought

विचार -नियम
पारंपरिक तर्कशास्त्र में वे नियम जो तर्क के मूलाधार हैं तथा जिन पर तर्कशास्त्र के अन्य नियम आश्रित हैं। अरस्तू के अनुसार ये नियम है (1) तादात्म्य – नियम (2) व्याघात – नियम, और (3) मध्याभाव – नियम। लाइब्नित्ज़ के अनुसार एक अन्य नियम भी है, और वह है (4) पर्याप्त हेतु – नियम।

Lay Confession

अदीक्षित के समक्ष पाप – स्वीकृति
पादरी की अनुपस्थिति में साधारण व्यक्ति के समक्ष यह स्वीकृति कि मैंने अमुक पाप किया है। यह बात मध्ययुग के ईसाई समाज में प्रचलित थी।

Legal Duty

विधिक कर्त्तव्य
वह कर्त्तव्य जिसे न करने पर कानून में दण्ड की व्यवस्था रहती है।

Legal Ethics

विधिक नीतिशास्त्र
नीतिशास्त्र का वह क्षेत्र जो नैतिकता के मापदण्डों का निर्धारण विधिपरक नियमों के माध्यम से करता है।

Legal Nihilism

विधिक नास्तिवाद
समस्त कानूनों को अर्थहीन मानकर उनका निषेध करने वाला सिद्धांत।

Legal Philosophy

विधिमीमांस, विधि – दर्शन
कानून तथा न्याय से संबंधित दार्शनिक प्रश्नो का विवेचन – विश्लेषण करने वाला शास्त्र।

Legitimate Hypothesis

वैध प्राक्कल्पना
वह प्राक्कल्पना जो स्वतोव्याघाती न हो, तथ्य – विरूद्ध न हो, निश्चित हो, स्थापित नियमों के अनुरूप हो, किसी वास्तविक कारण को मानती हो तथा सत्यापनीय हो।

Lexical Definition

कोशीय परिभाषा
वह परिभाषा जो शब्दकोशीय अर्थ पर आधारित हो।

Liberation

मुक्ति, मोक्ष
विशेषतः भारतीय दार्शनिकों की सामान्य धारणा के अनुसार, परमार्थ के रूप में कल्पित वह अवस्था जिसमें जीव सुख – दुःख और जन्म – मरण के चक्र से सदा के लिए छूट जाता है।

Libertarianism

स्वेच्छातंत्रवाद
वह सिद्धांत कि व्यक्ति अच्छे – बुरे मे से चुनाव करने में बिलकुल स्वतंत्र है, उसके ऊपर कोई बाह्य दबाव नहीं है, और इस प्रकार वह अपने कर्मों के लिए पूर्णतः उत्तरदायी है।

Limitative Judgement

परिच्छेदक निर्णय
कांट के अनुसार, इस प्रकार का निर्णय जैसे “प्रत्येक क, अ-ख है।” पारंपरिक तर्कशास्त्र में निर्णयों में विध्यात्मक और निषेधात्मक का जो भेद माना जाता है, यह भेद उसके अतिरिक्त है।
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