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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Orthopaedic Surgery

अस्थि-संधि शस्त्रकर्म
अस्थियों तथा संधियों जोडों की विरूपताओं (deformities) को ठीक करने के लिए की गई शल्य चिकित्सा।

Osteo-Chondroma

अस्थि-उपास्थि-अर्बुद
एक सुदम अर्बुद (benign tumour) जो हड्डी के उपास्थि भाग से निकलता है। इनकी उत्पत्ति अधिवर्ध (epiphysis) पर अस्थि की वृद्धि में विक्षोभ या विध्न का परिणाम है। उपास्थि में ही बाद में अस्थीभवन होता है। अस्थिकंकाल की वृद्धि के पूरे हो जाने पर बढ़ोत्तरी रुक जाती है। यह खाल (त्वचा) के नीचे एक मुलायम प्रक्षेप बनाता है और कभी-कभी नजदीक की संरचना के साथ रोक-टोक व हस्तक्षेप करता है। इसमें अकरमात् दुर्दम परिवर्तन भी हो सकते हैं।

Ostealgia

अस्थि-आर्ति, अस्थिगत शूल
हड्डी की गहराई में पीड़ा या वेदना होना।

Osteitis Fibrosa Cystica

ग्रंथिक संपुटि तंतुमय अस्थिविकृति
एक सौविर्थकर अस्थिशोथ (rarefying osteitis) जिसमें तंतु व्यपजनन पुटी (cysts) का बनना तथा प्रभावित हड्डियों में तंतु पर्विकाओं की उपस्थि भी शामिल है। यह अवस्था परा-अवटु ग्रंथि (parathyroid gland) के अत्यधिक कार्य करने के कारण उत्पनन होती है।

Osteitis Fibrosa (Fibrous Dysplasia)

तंतुमय अस्थिविकृति (तंतु दुर्विकसन)
हड्डियों के प्रभावित होने का रोग अस्थियों की जगह पर तंतु ऊतक बन जाता है जो पुटीय व्यपजनन (cystic degeneration) के क्षेत्र में हो सकता है। इस रोग में हड्डी का एक अंश या कई उनके पूरे के पूरे भाग ग्रस्त हो सकते हैं। यह रोग एक अस्थि को भी प्रभावित कर सकता है जिसमें यह अस्थि के सीमित क्षेत्र को ही प्रभावित करता है। उभी तक इस रोग की कोई विशिष्ट चिकित्सा नहीं मालूम हो पायी है। अगर स्थानिक दर्द है, तो शस्त्रकर्म से सहायता मिल सकती है।

Osteitis Fibrosa Generalisata

सार्वदैहिक तंतुमय अस्थिविकृति
एक रोग जिसमें अस्थियों में सदोष अस्थिभवन हो जाता है, जिसके फलस्वरूप अस्थियों में स्थूलता, कमजोरी तथा विरूपता उत्पन्न हो जाती है तथा अस्थि ऊतकों की जगह कोशिकीय तंतु ऊतक उत्पन्न हो जाते हैं। यह रोग एक या अधिक परा-अवटु उत्पन्न हो जाने के कारण होता है।

Osteoarthritis

अस्थिसंधिशोथ
हड्डियों के जोड़ की एक प्रकार की जकड़ वाली अवस्था जो चल संधियों को प्रभावित करती है। यह अवस्था नितम्ब तथा घुटने के जोड़ों में अधिक मिलती है। रोगी के जोड़ में दर्द, सख्ती (स्तब्धता) तथा बंधी हुई गतियों की शिकायत करता है। एक्स-रे से देखने पर अव-उपास्थि काठिन्य या कार्टिलेज के नीचे कड़ापन मिलता है।

Osteo-Chondritis

अस्थि-उपास्थिशोथ
बच्चों में रोगलाक्षणिक अवस्था का वह प्रकार है, जिसमें अस्थिकृत केंद्र में रक्त संवहन का अवरोध सामान्य कारण है। स्थानिक रक्तता (ischaemia) के कारण का पता नहीं है। यह दो प्रकार का होता है, अर्थात्-अस्थिकृत केंद्र का पूरा भाग रक्त संवहन से वंचित है या थोड़ा सा।

Osteo-Chondritis Dissicans

शोषकर अस्थि-उपास्थि-शोथ
इस अवस्था में संधायक स्नायु का एक क्षेत्र, नीचे की हड्डी के साथ, जोड़ के संघायक पृष्ठ से अलग हो जाता है। सामान्यतः घुटने तथा कोहनी के जोड़ ही, इस से प्रभावित होते हैं। शुरू में कमजोरी और दर्द या स्पर्श वेदना बंधी हुई गतियां जैसे लक्षण मिलते हैं। कभी-कभी गुटने का जोड़ जकड़ जाता है।

Osteoclasis

अस्थि-भंजन
वह शस्त्रकर्म जिसमें अस्थिभंग करते हैं या बिना काटे हुए हड्डी को तोड़ देते हैं। यह शस्त्रकर्म बच्चों में हाथों से और वयस्क रोगियों में एक यंत्र के द्वारा किया जा सकता है, जिसे अस्थि-भंजक (osteoclast) कहते हैं।

Osteo-Clastoma

अस्थि-अवशोषी-कोशिकार्बुद
महाकोशिकाओं (giant cells) का अर्बुद। ये कोशिकाएं अस्थि-कोशिका- प्रसू (osteo-blasts) की समधर्मी (analogous) हैं। ये अर्बुद दीर्घ अस्थियों, जत्रुकास्थि के उरोस्थि अंत भाग (हंसली की हड्डी का सीने की हड्डी के पास वाला भाग-) तथा संधियों में पाये जाते हैं। इनको सुदम अर्बुद ही समझा जाता है, पद्यपि कभी-कभी विक्षेप (metastasis) भी पाए जाते हैं।

Osteodystrophy

अस्थि-दुष्पोषण
जन्म से हड्डियों का ठीक प्रकार से न बढ़ना।

Osteogensis

अस्थिजनन
हड्डियों का बनना।

Osteogenesis Imperjecta

अपूर्ण अस्थिजनन
वह वंशगत अवस्था जिसमें हड्डियां असामान्य रूप से भंगुर (टूटने वाली) हो जाती हैं और उनमें भंग हो जाना स्वाभाविक हो जाता है। कई रोगियों में आंखों का श्वेतपटल (sclera) नीला होता है और अधेड़ आयु के व्यक्तियों में कर्णगहन-संपुटकाठिन्य (otosclerosis) परिवर्तन सामान्य हैं। इसकी कोई विशिष्ट चिकित्सा नहीं हैं। अस्थि का भंग संतोषजनक ढंग से जुड़ भी जाता है। ज्यादा विरूपता होने पर शस्त्रकर्म आवश्यक है।

Osteoid Osteoma (Jaffe Tumour)

अस्थ्याभ अस्थिगुल्म (जेफे अर्बुद)
बहुत कम पाया जाने वाला वह अर्बुद, जो आकार में एक सेन्टीमीटर से भी छोटा होता है और अपने चारों ओर घनी नई हड्डी बनने को उकसाता है। इस अर्बुद की सामान्य जगह ऊर्वस्थि (femur) और अन्तर्जंघिका (tibia) हैं। इससे पुरुष अधिक प्रभावित होते हैं। इसमें बहुत ज्यादा दर्द होता है जो रात के समय बहुत बढ़ जाता है, तथा इसे छूने पर भी वेदना होती है। ऐक्स-रे में काठिन्य क्षेत्र दिखता है और जिसका घना भाग रेडियो-अपार्य (radio-opaque) होता है, जिसे नाइड अथव नीड कहते हैं। यदि कोई लक्षण न हो तो इस अस्थि गुल्म की परवाह करने की जरूरत नहीं।

Osteoma (Ivery Exostosis)

अस्थि अर्बुद (संहत बाह्य-अध्यस्थि)
वह अवस्था जो हड्डी की अतिवृद्धि (अधिक बढ़ने) के परिणामस्वरूप होती है। यह उपास्थि से अलग अवस्था है। यह वृद्धि अवृत्त है अर्थात् इसमें तना नहीं होता। इस अर्बुद के सामान्य स्थान कपाल तोरण (vault), ललाट (frontal), जतूक (sphenoidal) अस्थिविवर (sinuses) तथा कर्णकुहर (auditory meatus) हैं।

Osteomalacia

अस्थिमार्दव
रिकेट्स रोग का एक प्रकार, जो वयस्कों को विटामिन डी. की कमी होने के कारण होता है। इस अवस्था में हड्डियां मुलायम पड़ जाती है, दर्द, स्पर्शवेदना पेशी दुर्बलता, भूख का न लगना तथा शरीर के भार में कमी हो जाती है। अस्थ्याभ ऊतक की कोई कमी नहीं रहती। अस्थि ऊतक बहुत होते हैं परंतु उनका कैल्सीभवन नहीं हो पाता। कारण के मुताबिक इसका इलाज करना पड़ता है तथा रोगी को विटामिन ड़ी और कैल्सियम का सेवन कराया जाता है।

Ostemyelitis

अस्थिमज्जाशोथ
हड्डी की सूजन यवाली अवस्था अस्थि संक्रमण स्थानिक विस्तार तथा सीधे रक्त प्रवाह के द्वारा हो सकता है। संक्रमण के तरीके और संबंधित जीव तथा रोगी की प्रतिरोध क्षमता या संक्रमण से लड़ने की शक्ति के अनुसार रोग का मार्ग भिन्न होता है। रोग तीव्र, अनुतीव्र या चिरकारी (chronic) हो सकता है। चिकित्सा में प्रतिजीवी औषधियों (antibiotics) का सेवन, उस भाग को स्थिर रखना अर्थात् अचलीकरण तथा विद्रधि या फोड़े का निकास (drainage) करना सम्मिलित है। चिरकारी या पुराने रोगियों में विविक्तांश (sequestrum) के रहने पर विविक्त-उच्छेदन (sequesterectomy) करने की आवश्यकता पड़ती है।

Osteoperiostitis

अस्थिपर्यस्थिशोथ
अस्थि और पर्यस्थि कला की सूजन जिसके फलस्वरूप हड्डी के एक बढ़े भाग की पर्यस्थि कला स्थूल या मटी हो जाती है तथा पास की हड्डी कठोर हो जाती है। सामान्य रूप से सूजन सममित होती है। यह अवस्था अन्तर्जंघास्थि (tibia) में मिलती है और खड्गाकार अंतर्जंघास्थि का विशिष्ट रूप बनाती है। इस अवस्था का कारण पर्यस्थि वाहिकाओं का फिरंगी अंतर्घमनीशोथ (syphilitic endarteritis of the periosteal vessels) है।

Osteoporosis

अस्थि-सुषिरता
हड्डी का असामान्य विरलीकरण या हड्डियों में बहुत से छिद्रों का बनना इसका कारण यह है कि अस्थि कोशिकाप्रसू (osteoblasts) अस्थि आधात्री (bone matrix) को बना नहीं पाता। नहीं हो पाता। इसके कारण पोषणज, हार्मोनी (hormonal), वाहिकाय तथा तंत्रिकासंबंधी हैं।

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