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Definitional Dictionary of Surgical Terms (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Thrombo-Angitis Obliterans Or Burger’S Disease

रोधक घनास्त्र वाहिकाशोथ या बर्जर रोग
यह रक्त वाहिकाओं की अविशिष्ट (nonspecific) शोथज (inflammatory) खंडांशी (segmental) तथा रोधज (obstructive) बीमारी है। आमतौर पर इस बीमारी का असर शरीर की निम्न शाखा (पैरों) पर पड़ता है। यह ज्यादातर सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पीने वालो में देखने को मिलती है। शरीर की किसी दूसरी रक्त की नालियों (वाहिकाओं) को यह विरले ही प्रभावित करती है। चलने फिरने में जंघपिंड (पिंडलियों) की पेशियों में ऐंठन के साथ दर्द होता है जिसे सविरामी खंजता (intermitant claudication)- रुक-रुक कर लंगड़ापन) कहते हैं। शुष्क कोथ (dry gangrene) के कारण पैरों की अंगुलियों या पैर को हानि होने की संभावना हो सकती है। दवाइयों के जरिये रक्त के बहाव (रक्त परिसंचार) में सुधार और कोथी भाग का उच्छेदन कर देना इसका इलाज है।

Thromboend-Artherectomy

अन्तर्धमनी धनास्त्र उच्छेदन
एक शस्त्रकर्म जिसमें धमनी के रोगग्रस्त अन्दरूनी अस्तर (inner lining) को घनास्त्र (यदि हो) के साथ ही काट कर निकाल दिया जाता है।

Thrombophlebitis

घनास्त्रशिरा शोथ
शिरा की शोथज अवस्था जिससे बाद में आमतौर पर घनास्रता (thrombosis) हो जाती है।

Thrombosis

घनास्रता
रक्त की नलियों और हृदय (हृद् वाहिका तंत्र) में किसी भी जगह रक्त का एक थक्का सा बन जाना। इस बीमारी का कारण है रक्त की नलियों की दिवाल में चोट लग जाना, सूजन (शोथ) आ जाना या व्यपजनन (degeneration) होना, आतंचनता, (coagulability) अर्थात् रक्त का रुझान जमने की तरफ अधिक हो जाना या रक्त के बहाव (flow of blood) का कम हो जाना। शल्य चिकित्सा के मामलों में आमतौर पर यह घनास्रता टांग की रक्त की नलियों (वाहिकाओं) में देखने को मिलती है। कभी-कभी आंत्रयोजनी वाहिकाओं (mesenteric vessels) में भी ऐसी दशा देखी जाती है।

Thymectomy

थाइमसोच्छेदन
शस्त्रकर्म द्वारा (थाइमस) बाल ग्रैवेयिक को काटकर निकाल देना।

Thymoma

थाइमस-अर्बुद
एक अर्बुद जो (थाइमस) बाल ग्रैवेयिक की उपकला से उत्पन्न होता है।

Thyro-Glossal Fistula

अवटु-जिह्वा नालव्रण
एक अर्जित अवस्था (acquired condition) जो अवटु-जिहवा पुटी (thyro-glassal cyst) के पूरी तरह से न निकलने के कारण उत्पन्न होती है। विशिष्ट लक्षणों में इसके द्वार के ऊपरी भाग में एक त्वचा का छज्जा (hood) होता है जो नीचे की तरफ दबा होता है और जिससे श्लेष्मा का आस्राव होता है। इसकी चिकित्सा में नालव्रण होता है। इसमें बार-बार शोथ हो जाना आम बात है। इसकी चिकित्सा में नालव्रण का पूरी तरह से उच्छेदन (excision) करना होता है जिसमें कंठिकास्थि (hyoid bone) के एक हिस्से को भी काट कर निकाल देना पड़ता है।

Thyroiditis

अवटुशोथ
अवटु ग्रन्थि की शोथज अवस्था। यह विशिष्ट (specific) अथवा अविश्ट (non-specific) हो सकती है। अवटु ग्रन्थि विसरित रूप से (diffusely) स्थिर एवं सख्त होती है और इसके साथ ही अवटु अल्पक्रियता (hypothyroidism) के लक्षण भी हो सकते हैं। यह अवस्था अवटु ग्रन्थि के कार्सिनोमा से मेल खाती है। निदान निश्चित हो जाने के बाद इस रोग की चिकित्सा लक्षणानुसार (symptomatic) की जाती है। ऑपरेशन निदान को स्थापित (setting) करने या दाब प्रभावों (pressure effects) को दूर करने के लिये किया जाता है।

Thyrotoxicosis

अवटु-विषाक्तता
अवटु ग्रन्थि की बढ़ी हुई सक्रियता (activity) के कारण उत्पन्न एक क्लिनिकल अवस्था (clinical condition) है। इस रोग के लक्षणों में हृदय दर (heart rate) का बढ़ा होना, आंखों का बाहर को निकला होना (protruding eyes), वजन में कमी, पसीना आनास, अत्यधिक भूख का लगना (excessive appetite) तथा आम बेचैनी (gneral restlessness) शामिल हैं। अवटु ग्रन्थि बढ़ भी सकती है और उसमें बढ़ी हुई वाहिकामयता (increased vascularity) पाई जा सकती है। इस रोग की चिकित्सा मं प्रति-अवटु औषधियां यथा- (radioisotopes) तथा ऑपरेशन शामिल हैं।

Tongue Tie

जिह्वा-बद्धता
बच्चे की जिह्वा का मुखगुहा से बाहर न निकल पाना। यह जिह्वा फ्रीनम (जिह्वा सेवनी) के छोटे होने के कारण उत्पन्न होती है। शस्त्रकरम द्वारा फीनम को काट देने से जिह्वा सामान्य रूप से बाहर आने लगती है। कभी-कभी इस अवस्था के कारण रोगियों की बोली में भी विकार हो जाता है।

Tonsillar Abscess

गलतुण्डिका विद्रधि
गल तुण्डिका परिक्षेत्र में (tonsillar area) तीव्र वेदना, जो कर्ण एं ग्रीवा प्रदेश तक विस्तरित होता है।

Tonsillectomy

गलतुण्डिका-उच्छेदन
चिरकारी पुनरावर्ती गलतुण्डिकाशोथ या गलतोरणिका स्थित टॉन्सिल शोथ को शस्त्रकर्म द्वारा काटकर बाहर निकालना।

Tonsillitis

गलतुण्डिका-या टॉन्सिल शोथ
गलतोरणिका (fauces) में स्थित टॉन्सिल की शोथ आमतौर पर संक्रमण (infection) के बाद ही होता है। यह तीव्र या चिरकारी हो सकता है। इसकी चिकित्सा प्रायः लक्षणानुसार की जाती है लेकिन पुनरावर्ती (recurrent) तथा चिरकारी केसों में ऑपरेशन करना आवश्यक होता है।

Tonsillolith

गलतुण्डिका अश्मरी या टॉन्सिल अश्मरी
गलतोरणिका (fauces) में स्थित टान्सिल में अश्मरी (calculus) या काणिकाश्मरी (concretion) का पड़ जाना।

Topectomy

प्रमस्तिष्क-प्रान्तस्था-अंशोच्छेदन
मानसिक रोग (mental illness) से ग्रसित कुछ रोगियों की चिकित्सा में मस्तिष्क ललाट प्रान्तस्था (frontal cortex) के एक छोटे या विशिष्ट क्षेत्र या भाग का अंशोच्छेदन (ablation) करना है।

Torticollis Or Wry-Neck

मन्यास्तम्भ
उरोजत्रुककर्णमूलिका पेशी (sternocleidomastoids) के ऐंठ जाने या छोटे हो जाने के कारण सिर का एक तरफ का झुक जाना। इस बीमारी में संरक्षी चिकित्सा (conservative treatement) की जाती है, और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है।

Tourniquet

टूर्निकेट
एक यंत्र जिसके द्वारा रक्त परिसंचरण (खून के दौरे) पर नियंत्रण रखने तथा एक हिस्से में अधिक रक्त के पहुंचने को रोकने के लिए रक्त वाहिका पर दबाव डाला जाता है। टूर्निके दो प्रकार का होता है। (1) रबड़ का तथा (2) वायवी (pneumatic) इसका प्रयोग रक्तस्राव को नियंत्रण में रखने के लिए अंगोच्छेदन (amputation) एवं शस्त्रकर्म करने के लिए किया जाता है। एक समय में एक घंटे से ज्यादा टूर्निकेट को बांधे नहीं रखना चाहिए।

Toxic Nodular Goitre

विषालु पर्विल गलगंड सामान्य पर्विल गलगंड आमतौर पर मध्यम आयु या बड़ी आयु की औरतों में विषालु हो जाता है। इस अवस्था में नेत्र चिहन बहुत बढ़े हुए मिलते हैं। कोई सक्रिय पर्विका (active nodule) जैसी नहीं होती, बल्कि इसमें अन्तरापर्विल अवटु (inter-nodular thyriod) अधिक कार्य करता है।

Toxic Nodule

विषालु पर्विका वह अवस्था, जिसमें पर्विका अतिक्रिय (hyperactive) हो जाती है, जिससे विषालु लक्षण मिलने लगते हैं इस प्रकार पर्विका स्वयं ही सक्रिय अवटु ऊतक होती है तथा स्वसंचालित (autonomous) होती है। इसमें अवटु (thyroid) ऊतक, जो पर्विका को चारों और से घेरे होते हैं, सक्य पर्विका से दबा हुआ (suppressed) रहता है। विषालु गलगंड की सभी किस्मों में उसका विशिष्ट लक्षण अच्छी भूख लगने के अतिरिक्त वजन में कमी तथा धड़कन (palpitation) हैं। मुख्य चिह्न (signs) निम्न हैं- बाहरी की तरफ फैली हुई अंगुलियों में कम्पन (tremors), जिह्वा तथा नेत्र चिह्न, अतिरिक्त प्रकुचन (extrasystole, हृदय का बीच बीच में सिकुड़ना) या त्वक् रक्तिमा (erythema)। प्रारम्भ में विसरित विषालु गलगंड का औषधियों द्वारा चिकित्सा की जाती है लेकिन बाद में रेडियोसक्रिय आयोडीन चिकित्सा की अपेक्षा श्रेयस्कर है, क्योंकि यह सुरक्षित, सादा तथा रोगहर उपक्रम है।

Trachea

श्वास नली
हवा में सांस लेने वाली कशेरूकियों में घाटी से फेफड़ों में खुलने वाली नली जिसके द्वारा वायु आती जाती है।

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