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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Sovereign

संप्रभु वह व्यक्ति अथवा व्यक्ति-समूह जिसमें राज्य की सर्वोच्च शक्ति अथवा सत्ता का निवास होता है।

Sovereignty

प्रभुता, संप्रभुता, प्रभुसत्ता राज्य के चार तत्वों में से एक तत्व जो सबसे मुख्य तत्व है और जिसके आधार पर राज्य और अन्य मानवीय समुदायों में भेद किया जाता है। “संप्रभुता” का अर्थ है सर्वोच्च शक्ति अर्थात् वह शक्ति जिसकी आज्ञा का पालन राज्य में रहने वाले सभी व्यक्तियों द्वारा अनिवार्य है। प्रसिद्ध फ्रांसीसी विदान बोदा ने “संप्रभुता” की परिभाषा करते हुए लिखा है कि “नागरिकों और प्रजाजनों के ऊपर वह सर्वोच्च शक्ति जो किसी कानून से सीमित नहीं है, संप्रभुता कहलाती है”। आॅस्टिन ने भी संप्रभुता को राज्य की सर्वोच्च शक्ति माना है जो असीमित, अमर्यादित, अदेय और क़ानूनों का स्रोत होती है।

Sovereignty de facto

वास्तविक प्रभुता, वास्तविक संप्रभुता, यथार्थ प्रभुसत्ता, तथ्यतः संप्रभुता राज्य की वह इकाई अथवा अंग जिसके द्वारा वास्तव में राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रयोग किया जाता है चाहे वैज्ञानिक रूप से यह शक्ति किसी अन्य इकाई अथवा अंग में निहित हो।

Space law

अंतरिक्ष क़ानून, अंतरिक्ष विधि 1957 में सेवियत यान स्पुतनिक के अंतरिक्ष में भेजे जाने से मानव प्रयास के एक नए क्षेत्र का द्वार खुल गया जिसे बाहय अंतरिक्ष कहा जाता है। तुरंत ही राज्यों के मध्य इस भावना ने जन्म लिया कि अंतरिक्ष के अन्वेषण के लिए सभी राज्यों को समान अधिकार होना चाहिए और अंतरिक्ष अधःस्थित राज्य के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार में नहीं होना चाहिए। इस भावना को मूर्त रूप देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की महा सभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें अंतरिक्ष को महा समुद्रों के समान सामुदायिक प्रदेश घोषित किया गया और अंतरिक्ष की व्यवस्था संबंधी सिद्धांतों का भी निरूपण किया गया। 1968 में इन सिद्धांतों को वैधानिक रूप देने के उद्देश्य से एक संधि हुई जिसे संक्षेप में अंतरिक्ष संधि कहा जाता है। इस संधि से उस नियमावली का प्रारंभ होता है जिसे “अंतरिक्ष विधि” कहा जाता है।

Special session

विशेष अधिवेशन, विशेष सत्र किसी संसदीय निकाय अथवा अंतर्राष्ट्रीय संगठन की नियमित बैठकों के अतिरिक्त किसी विशेष प्रयोजन के लिए बुलाई गई विशिष्ट बैठक।

Sopils system

पद-पुरस्कार व्यवस्था उच्च सरकारी पदों पर योग्यता के आधार पर भर्ती न करके मुख्य कार्यपालक द्वारा उन्हें अपने व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक समर्थकों एवं रिश्तेदारों और सगे-संबंधियों में मनमाने ढंग से बाँट देना मानों ये पद कोई लूट का माल हो। यह प्रथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लागू किए जाने से पूर्व सरकारी भर्तियों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में सामान्यतः प्रचलित थी।

Stalemate

गत्यवरोध 1. वह स्थिति जिसमें विभिन्न पक्ष इस प्रकार से स्थित हों कि कोई प्रतिद्वंद्वी प्रतिपक्ष के विरुद्ध विजय या श्रेष्ठता पाने की आशा न कर सके। 2. किसी समस्या के समाधान में विभिन्न पक्षकारों के द्वारा कठोर दृष्टिकोण अपनाए जाने के कारण कोई समाधान न हो पाने की स्थिति।

Standing army

स्थायी सेना सवेतन सैनिकों की स्थायी रूप से सुसंगठित सेना।

Stare decisis

निर्णीतानुसरण पूर्व न्यायिक निर्णयों में निर्धारित या सूत्रबद्ध नियमों का अनुपालन करने का सिद्धांत या नीति।

State

राज्य “राज्य” की परिभाषा अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार से की है। राजनीति विज्ञान के जनक अरस्तू ने “राज्य” की परिभाषा करते हुए लिखा है कि “राज्य” ऐसे परिवारों और ग्रामों का समूह है जो आत्मनिर्भर और समृद्ध जीवन व्यतीत करने के लिए संगठित किया गया हो। ब्लंट्श्ली के अनुसार राज्य एक निर्दिष्ट प्रदेश की राजनीतिक दृष्टि से संगठित जनता है। लास्की के मतानुसार, “राज्य वह प्रादेशिक समाज है जो सरकार और प्रजा में विभाजित है और अपने नियत भौगोलिक क्षेत्र में अन्य समस्त व्यवस्थाओं पर सर्वोच्च सत्ता का उपभोग करता है”। गार्नर के शब्दों में “राज्य मनुष्यों के उस समुदाय का नाम है जो संख्या में अधिक हो या कम परंतु जो किसी निश्चित भूखंड पर स्थायी रूप से बसा हुआ हो, जो किसी भी बाहयशक्ति के नियंत्रण से पूर्णतया या प्रायः स्वतंत्र हो और जिसमें एक ऐसी सुसंगठित सरकार विद्यमान हो जिसके आदेश का अनुपालन करने के लिए उस भूखंड के प्रायः सब निवासी अभ्यस्त हो”। गार्नर की परिभाषा में “राज्य” के चारों मूल तत्वों जनसंख्या, प्रदेश, शासन और प्रभुसत्ता का समावेश है।

State capitalism

राजकीय पूँजीवाद वह व्यवस्था जिसमें राज्य स्वयं पूँजीवादी भूमिका अपना लेता है और सभी उद्योग-धंधे, कृषि, व्यवसाय प्रायः राज्य के स्वामित्व एवं नियंत्रण में कर लिए जाते हैं। यद्यपि यह समाजवाद के समरूप प्रतीत होता है तथापि, वासतव में, इसका संचालन समाजवाद के अनुरूप न होकर राज्य के उच्च पदाधिकारियों एवं वर्गों की स्वार्थ-सिद्धि के लिए होता है।

State craft

राजकला, शासनकला राज्य कार्यों के कुशल संचालन की कला जिसमें छल, कपट, मिथ्या आचरण और प्रवंचना भी शामिल हैं।

Statelessness

राज्यविहीनता, राष्ट्रहीनता वह स्थिति जिसमें किसी व्यक्ति को किसी भी राज्य की नागरिकता प्राप्त न हो। ऐसा कई कारणों से हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में भारतीय मूल के लोगों की यही स्थिति है। यद्यपि समय-समय पर इन देशों में इन लोगों को स्थानीय नागरिकता देने के उपाय किए गए हैं परंतु समस्या का पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो पाया है।

State of emergency

आपातकालीन स्थिति वह स्थिति जो विशेष विपत्तियों जैसे, बाहय आक्रमण, आंतरिक विद्रोह, संवैधानिक तंत्र की विफलता अथवा वित्तीय संकट के कारण उत्पन्न हो सकती है और जिसका सामना करने के लिए असाधारण उपाय अपनाना आवश्यक हो जाता है। इन उपायों में संविधान के कुछ उपबंधों का निलंबन किया जाना भी शामिल है, यहाँ तक कि नागरिकों के मूल अधिकारों अथवा मूल अधिकारों के न्यायालय द्वारा लागू कराने के अधिकार को भी निलंबित किया जा सकता है। भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकाल संबंधी तीन प्रकार के प्रावधान पाए जाते हैं- (1) बाहय आक्रमण अथवा आंतरिक विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होने पर अथवा उसकी संभावना होने पर : इस स्थिति में संसद राज्य सूची के विषयों पर क़ानून बना सकती है, संघ की कार्यपालिका राज्यों को निर्देश दे सकती है, संघ और राज्यों के बीच आय के वितरण में संशोधन किया जा सकता है तथा स्वतंत्रता का अधिकार निलंबित हो जाता है। (2) राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर : इस स्थिति में राज्य में मंत्रिमंडल भंग कर दिया जाता है और विधान मंडल निलंबित या विघटित कर दिया जाता है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाता है। (3) वित्तीय संकट होने पर : इस अवस्था में केंद्रीय सरकार वित्त संबंधी अनेक प्रकार के आदेश-निर्देश राज्यों को जारी कर सकती है और उच्चाधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन- भत्तों में भी कटौती कर सकती है।

State of war

युद्ध-स्थिति, युद्ध-अवस्था राज्यों द्वारा एक दूसरे के विरुद्ध सशस्त्र सैनिक बल-प्रयोग की स्थिति। यह आवश्यक नहीं है कि युद्धरत राज्य वास्तव में एक दूसरे के विरुद्ध सशस्त्र कार्रवाई में भाग लें। युद्धावस्था का यह अनिवार्य तत्व है कि संबंधित राज्यों के पारस्परिक संबंधों में शांतिकालीन अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम निलंबित हो जाते हैं और उनका स्थान युद्ध विधि के नियम ले लेते हैं। इसके अतिरिक्त युद्धरत राज्यों और अन्य राज्यों के पारस्परिक संबंधों में तटस्थता के नियम लागू होने लगते हैं। संक्षेप में कहा जा सकता है कि युद्धावस्था वह स्थिति है जिसमें युद्धकारियों के परस्पर संबंधों में युद्धविधि के नियम और युद्धकारियों तथा गैर युद्धकारियों के परस्पर संबंधों में तटस्थता के नियम लागू होने लगते हैं।

Statesman

राजमर्मज्ञ शासन कला अथवा उसके नियमों में निपुण व्यक्ति। शासन कार्य का सक्रिय रूप से संचालन करने वाला अथवा राज्य की रीतियों-नीतियों को निरूपित करने वाला दूरदर्शी राजनीतिज्ञ।

State socialsim

राजकीय समाजवाद समाजवाद का एक स्वरूप जो इंग्लैंड के श्रमिक दल के कार्यक्रम के साथ जोड़ा जा सकता है। “राजकीय समाजवाद” की तीन मुख्य विशेषताएँ हैं :- (1) यह समाज की वर्तमान वितरण-व्यवस्था से असंतुष्ट होता है और चाहता है कि धन का वितरण वर्तमान की अपेक्षा अधिक न्याययुक्त आधार पर हो ; (2) उत्पादन और वितरण के साधनों का राष्ट्रीयकरण हो ; तथा (3) वांछित उद्देश्य को हिंसात्मक नीति द्वारा नहीं प्रत्युत निर्वाचनों में विजय प्राप्त कर समाजवादी विधान के द्वारा सिद्ध किया जाए।

Status quo ante bellum

युद्धपूर्व स्थिति युद्ध से पूर्व विद्यमान स्थिति।

Statute

क़ानून, संविधि राज्य के विधानांग द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार निर्मित विधि।

Statutory committee

सांविधिक समिति विधान मंडल की विधि के अंतर्गत अधिनियमित, निर्मित एवं नियंत्रित समिति।

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