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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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United Nations High Commission for Refugees (U.N.H.C.R.)

शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र का उच्चायोग इसकी स्थापना महासभा द्वारा 1951 में की गई थी। इसका उद्देश्य शरणार्थियों को अश्थायी सहायता व संरक्षण प्रदान करना था। इसने द्वितीय महायुद्ध के दौरान कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थि संगठन का स्थान ले लिया।

Universal brotherehood

विश्व-बंधुत्व, विश्व-भ्रातृत्व यह विचार अथवा सिद्धांत अथवा संकल्प की समस्त विश्व के लोग एक परिवार अथवा समुदाय के सदस्य हैं। उनका भौगोलिक, जातीय, धार्मिक, राजनीतिक अथवा अन्य आधारों पर विभाजन कृत्रिम है, उनके मूल में केवल मानव अथवा मानवता है और उनके पारस्परिक संबंध भी मूलतः मानवतावाद के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। वे मानव होने के नाते एक दूसरे के भाई अथवा बंधु हैं और उनमें आपस में प्रेम, सहयोग, सहायता और शांति के संबंध होने चाहिए-कलह, ईर्ष्या और द्वेष के नहीं। विश्व भ्रातृत्व का नारा फ्रांसीसी क्रांतिकारियों द्वारा दिए गए तीन नारों में से एक था। बीसवीं शताब्दी में प्रथम महायुद्ध की समाप्ति के पश्चात् राष्ट्रसंघ तथा द्वितीय महायुद्ध की समाप्ति के पश्चात्, संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा उसके अनेक विशिष्ट अभिकरणों की स्थापना, विश्वबंधुत्व अथवा विश्व-भ्रातृत्व की कल्पना को साकार बनाने की दिशा में सराहनीय कदम हैं।

Universal Declaration of Human Rights

मानव अधिकार घोषणापत्र 10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा की गई मानव के मूल अधिकारों की घोषणा। इसके अंतर्गत सभी मनुष्यों के कुछ मौलिक अथवा मानवीय अधिकारों को मान्यता दी गई जैसे, जीवन, स्वतंत्रता तथा सुरक्षा के अधिकार, किसी व्यक्ति को अकारण गिरफ्तार न किए जाने का प्रावधान, सभी व्यक्तियों को आवास, अभिव्यक्ति, एकत्रित होने, धार्मिक स्वतंत्रता तथा संविधान एवं विधि द्वारा स्वीकृत मूल अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी वैध उपचार का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा तथा जीविकोपार्जन के अधिकार।

Universal disarmament

विश्वव्यापी निरस्त्रीकरण, सर्वदेशीय निरस्त्रीकरण अंतर्राष्ट्रीय युद्ध के भय अथवा उसकी संभावता को कम करने के लिए विश्व के विभिन्न राज्यों द्वारा पारस्परिक संधि अथवा समझौते करके युद्ध के विभिन्न प्रकार के घातक अस्त्र-शस्त्रों (जिसमें परमाणविक अस्त्र-शस्त्र भी सम्मिलित होते हैं) में भारी कटौती, उनके उत्पादन तथा क्रय-विक्रय पर नियंत्रण और इस हेतु अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण की व्यवस्था, निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया के भाग माने जाते हैं। इस प्रक्रिया में निर्धारित क्षेत्रों या प्रदेशों को अस्त्र-शस्त्र रहित बनाया जाना भी शामिल है। उदाहरणार्थ, समुद्र तल एवं अंतरिक्ष में नामिकीय अस्त्रों का रखना भी वर्जित किया गया है।

Universal franchise

वयस्क मताधिकार वह मतदान प्रणाली जिसमें मत देने का अधिकार जाति, धर्म, वंश, लिंग, धन और शिक्षा के भेदभावों के बिना सभी वयस्क स्त्री-पुरुषों को दिया जाता है। सार्वजनिक मताधिकार लोक-प्रभुत्व के सिद्धांत का ही स्वाभाविक निष्कर्ष है। भारतीय संविधान ने सार्वजनिक मताधिकार के सिद्धांत को स्वीकृति प्रदान की है तथा उसने नाबालिगों, पागलों तथा अपराधियों को छोड़कर शेष सभी भारतीय स्त्री-पुरुषों को बिना किसी भेदभाव के मतदान का पूर्ण और समान अधिकार प्रदान किया है। दे. adult franchise.

Universal international law

विश्वव्यापी अंतर्राष्ट्रीय क़ानून विश्वव्यापी अंतर्राष्ट्रीय विधि अंतर्राष्ट्रीय विधि के वे मूलभूत नियम अथवा सिद्धांत जो सभी राष्ट्रों के लिए बाध्यकारी माने जाते हैं और जिनकी बाध्यकारिता राज्यों की सहमति पर आश्रित नहीं है। एक दूसरे अर्थ में सर्वव्यापी अंतर्राष्ट्रीय क़ानून से यह तात्पर्य लगाया जा सकता है कि ये अंतर्राष्ट्रीय विधि के सामान्यत; सब देशों पर लागू होने वाले नियम अथवा सिद्धांत हैं। इस अर्थ में सर्वव्यापी अथवा सामान्य अंतर्राष्ट्रीय विधि विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विधि से भिन्न हो जाती है क्योंकि विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विधि केवल निर्धारित क्षेत्रों अथवा महाद्वीपों तक सीमित रह जाती है।

Universalism

सार्वभौमवाद, विश्ववाद 1. वह धर्मशास्त्रीय अथवा आध्यात्मिक सिद्धांत जिसकी यह धारणा है कि अंततः विश्व के सभी व्यक्ति पवित्रता, पुण्यशीलता तथा प्रसन्नता की प्राप्ति कर लेंगे। 2. सार्वलौकिक, सर्वदेशीय, सार्वत्रिक अथवा विश्वव्यापी होने की स्थिति। उदाहरणार्थ, यूरोप में मध्ययुग में ईसाई क़ानून तथा चर्च की सत्ता विश्वव्यापी मानी जाती थी और सार्वभौमवाद इस काल के राजनीतिक चिंतन का एक प्रमुख गुण था।

Universal law

सार्वभौम विधि, विश्वव्यापी विधि आचरण के वे नियम जो किसी एक ही राज्य के लिए न होकर विश्व के सभी राज्यों अथवा समग्र मानवजाति के लिए बाध्यकारी माने जाते हैं।

Universal military service

अनिवार्य सैनिक सेवा, सर्वव्यापक सैनिक सेवा वह पद्धति जिसके अंतर्गत कुछ निर्धारित श्रेणियों के नागरिकों को छोड़कर राज्य के सभी वयस्क नवयुवकों को उस राज्य की सेनाओं की टुकड़ियों में नियत अथवा निर्धारित समय के लिए सक्रिय रूप से अपनी सेवाएँ अर्पित करनी पड़ती हैं।

Universal military training

अनिवार्य सैनिक प्रशिक्षण, सर्वव्यापक सैनिक प्रशिक्षण वह पद्धति जिसके अंतर्गत किसी राज्य के निर्धारित श्रेणी के नागरिकों को छोड़कर अन्य सभी वयस्क नवयुवकों को अनिवार्य सैनिक सेवा के उद्देश्य से निर्धारित अवधि के लिए सैनिक प्रशिक्षण लेना पड़ता है।

Unwritten constitution

अलिखित संविधान वह संविधान जिसके अधिकांश उपबंध कभी लेखबद्ध नहीं होते तथा जिसे न कोई सँविधान सभा किसी निश्चित समय पर बनाती ही है। अलिखित संविधान का शनैः शनैः विकास होता है और वह मुख्यतः अभिसमयों, रूढ़ियों, लोकाचारों, परंपराओं, न्यायिक निर्णयों और पूर्वोदाहरणों में निहित होता है। अलिखित संविधान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण इंग्लैंड का संविधान है। परंतु फिर भी उसके कुछ विशिष्ट अंग उदाहरणार्थ, मैग्नाकार्टा (सन् 1215), पिटिशन ऑफ राइट्स (सन् 1628) और पार्लियामेंट एक्ट (सन् 1911) लेखबद्ध हैं। इंग्लैंड के अधिकांश संवैधानिक नियम परंपराओं और अभिसमयों के परिणाम हैं और उनका शनै: शनै: विकास हुआ है।

Upheaval

महापरिवर्तन समाज में उग्र घोर अथवा प्रचंड आंदोलन या हलचल एवं अव्यवस्था और उसके परिणामस्वरूप घटित मूल अथवा महत्वपूर्ण परिवर्तन।

Uprising

विद्रोह, विप्लव किसी राज्य की सत्तारूढ़ सरकार या शासन को अपदस्थ करने के लिए किसी सैनिक अथवा असैनिक गुट, संगठन अथवा दल द्वारा किया गया सशस्त्र प्रयास अथवा छेड़ा गया अभियान।

Usurpation

बलात्ग्रहण, हड़पना, हथियाना वैध सरकार अथवा सत्ता को बलपूर्वक अथवा चालबाज़ी से अपदस्थ करके सत्ता अथवा शासन शक्ति का अवैध अथवा अनधिकृत रूप से हथिया लिया जाना।

Utilitarianism

उपयोगितावाद एक आधुनिक राजनीतिक विचारधारा के रूप में “उपयोगितावाद” का प्रतिपादन करने वाले इंगलैंड के विख्यात दार्शनिक जर्मी बैन्यम थे। इनके अनुयायियों में जैम्स मिल और जॉन स्टुअर्ट मिल के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। बैन्थम के अनुसार प्रकृति ने मानव जाति को सुख और दुःख दो संप्रभुओं के अधीन रख छोड़ा है। वे ही यह निर्धारित करते हैं कि मनुष्य क्या करता है और वे ही यह बताते है कि उसे क्या करना चाहिए। कार्य-कारण की श्रृंखला तथा कर्तव्याकर्तव्य का आधार, दोनों ही उनसे बंधा हुआ है। इस सिद्धांत के अनुसार मनोविज्ञान तथा आचारशास्त्र, दोनों में कोई तार्किक भेद नहीं है। बैन्थम ने सुखों और दुःखों के अनेक भेद बताए और उनके आयामों का भी विश्लेषण किया। इनके आधार पर उसने सुखों और दुःखों के मापक अथवा गणक का भी प्रतिपादन किया। वैन्थम के अनुसार राज्य का कर्तव्य है कि वह ऐसे कार्य करे जिनसे “अधिकतम व्यक्तियों को अधिकतम सुख” प्राप्त हो सके। क़ानून-निर्माण में भी यही ध्येय होना चाहिए। एक प्रकार से बैन्थम ने भौतिक सुखवाद को ही आदर्श माना, परंतु उनके शिष्य जॉन स्टुअर्ट मिल ने सुख के गुणों और उसकी आध्यात्मिकता पर बल देकर “उपयोगितावाद” को उस आलोचना से बचाने का प्रयास किया जिसके अनुसार यह केवल “सुअरों का दर्शन है”। परंतु मिल के संशोधन में भी अनेक तार्किक असंगतियाँ थीं। अतः राजनीतिक विचारधारा पर “उपयोगितावाद” का कोई स्थायी प्रभाव नहीं रहा। वैन्थम ने विधि और जेल सुधार संबंधी अनेक सुझाव दिए जो बहुत उपयोगी सिद्ध हुए।

Utopia

यूटोपिया, कल्पनालोक सन् 1516 में सर टॉमस मूर द्वारा लिखित विश्वविख्यात कृति जिसमें लेखक ने “यूटोपिया” नाम के एक काल्पनिक देश का चित्रण किया है जो उसके स्वप्नों का स्वर्ग है, परंतु जिसे धरती पर उतारना अव्यावहारिक और असंभव है। तब से किसी भी अव्यावहारिक विचार, योजना अथवा कार्यक्रम को कल्पनालोकीय अथवा यूटोपियन कह कर निबटा दिया जाता है।

Utopian socialism

कल्पनालोकीय समाजवाद कार्ल मार्क्स से पूर्ववर्ती समाजवादी चिंतकों व दार्शनिकों को कल्पनालोकीय कहा गया है क्योंकि समाज विषयक उनका विश्लेषण और उसका उपचार, दोनों उनकी अपनी कल्पना, संवेदना और परमार्थ भावना पर आधारित थे, किसी वैज्ञानिक विश्लेषण पद्धति पर नहीं। कल्पनालोकीय, समाजवादियों में मुख्यतः सन्त साइमन, चार्ल्स फूरियर, विलियम गॉडविन तथा रॉबर्ट ओवेन के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ये सभी अपने समकालीन सामाजिक अन्याय और आर्थिक शोषण से दुःखी थे और इनके कटु आलोचक थे। ये एक ऐसे आदर्श समाज का निर्माण करना चाहते थे जो स्वतंत्रता, समानता और न्याय पर आधारित हो और जहाँ शोषण या किसी प्रकार का भेदभाव न हो। परंतु इन विचारकों के पास अपने विचारों को कार्यरूप देने के लिए कोई ठोस कार्यक्रम नहीं था। रॉबर्ट ओवेन ने अपने व्यक्तिगत प्रयास एवं संसाधनों से अपने स्वप्नों के आदर्शों को कार्य रूप देने का प्रयास भी किया परंतु वह अधिक दिनों तक चलनेवाला नहीं था। कुल मिलाकर, समाज और राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था के पुनर्निर्माण की ये सभी योजनाएँ अव्यावहारिक थीं। इसलिए इनको “कल्पनालोकीय समाजवाद” कहा गया है।

Vacillating policy

अस्थिर नीति, ढुलमुल नीति वह नीति जिसमें स्थिरता एवं आत्मविश्वास का अभाव हो।

Vatican City

वेटिकन नगर इटली में रोम के निकट एक नगर-राज्य जिसका प्रधान ईसाइयों का धर्मगुरु पोप है। इसका क्षेत्रफल लगभग 100 एकड़ है और जनसंख्या केवल दो सौ। यद्यपि पोप को परंपरा और राज व्यवहार के अंतर्गत वे सभी अघिकार प्राप्त हैं जो अन्य राज्याध्यक्षों को अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत प्राप्त होते हैं परंतु इस नगर के क्षेत्रफल व जनसंख्या और विशिष्ट उद्देश्यों को देखते हुए यह विवादग्रस्त है कि इस नगर को एक राज्य कहा जा सकता है या नहीं।

Very Important Person (VIP)

अति विशिष्ट व्यक्ति (वी.आई.पी.) ऐसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी जिन्हें प्रशासन के द्वारा विशेष सम्मान एवं संरक्षण तथा सुविधाएँ दी जाने की व्यवस्था रहती है।

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