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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi) (CSTT)

Commission for Scientific and Technical Terminology (CSTT)

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Aerial navigation

विमानचालन आकाश में वायुयानों द्वारा परिवहन।

Aerial Navigation Convention

विमानचालन अभिसमय सन् 1919 के “पेरिस विमानचालन सम्मेलन” द्वारा शांतिकाल में विमानचालन के लिए नियम निर्धारित करने का प्रयास किया गया। इस अभिसमय ने, प्रत्येक राष्ट्र के अपने भूभाग के ऊपरी आकाश पर संपूर्ण तथा एक मात्र प्रभुत्व को मान्यता दी। इस के हस्ताक्षरकर्त्ताओं ने संविदाकारी पक्षों के विमानों को, शांतिकाल में एक दूसरे के हवाई क्षेत्रों से निर्दोष गमन की अनुमति प्रदान की। परन्तु संविदाकारी देशों को यह प्राधिकार मिला कि यदि वे चाहें तो सैनिक कारणों एवं अपनी सुरक्षा के हित में, किसी अन्य देश के विमानों को, अपने भूभाग के ऊपरी आकाश में विमानचालन की सुविधा न दें।

Aerial survey

हवाई सर्वेक्षण वायुयानों द्वारा किसी विशेष उद्देश्य से भूभाग का पर्यावलोकन।

Aerial surveillance

हवाई निगरानी आकाश में विमानों द्वारा अथवा अंतरिक्ष से उपग्रहों द्वारा दूसरे देशों की गतिविधियों पर नज़र रखना।

Afro-Asian Bloc

अफ्रेशियाई गुट अफ्रीकी-एशियाई राज्यों का एक शिथिल तथा अनौपचारिक समूह जो अपने समान उद्देश्यों तथा नीतियों के कारण संयुक्त राष्ट्र में एक गुट के रूप में कार्य करते प्रतीत होते हैं और जिनका बहुमत महासभा में है। बहुधा ये उपनिवेशवाद, प्रजातिवाद, पार्थक्यवाद के विरोधी हैं। ये चार उपगुटों में विभक्त हैं:- (1) केसाब्लांका गुट: गिनी, घाना, माली, मोरक्को और संयुक्त अरब गणतंत्र। (2) मोनरोवीय गुट : जिसमें पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश व संरक्षित राज्य हैं। (3) ब्रजाविला गुट : जिसमें पूर्व फ्रांसिसी उपनिवेश तथा संरक्षित राज्य हैं। ये दो गुट पूर्वी-पश्चिमी मामलों से दूर रहते थे, परन्तु संयुक्त राज्य अमेरिका के उग्र दबाव पड़ने पर जैसे, कांगो को मान्यता देने के प्रश्न पर और संयुक्त राष्ट्र में चीनी प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर, बहुत से देशों ने संयुक्त राज्य का साथ दिया। (4) एशियाई राज्य।

Afro-Asian Conference (= Bandung Conference)

अफ्रोशियाई सम्मेलन, बांडुंग सम्मेलन सन 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग नगर में एशियाई-अफ्रीकी देशों का एक सम्मेलन हुआ जिसका उद्देश्य इन देशों द्वारा विश्व राजनीति में एशियाई-अफ्रीकी राज्यों की सुदृढ़ता प्रदर्शित करना था। इस सम्मेलन में साम्यवादी चीन की उपस्थिति उल्लेखनीय थी।

Agency for International Development

अंतर्राष्ट्रीय विकास अभिकरण इस अभिकरण की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका की काग्रेस ने 1961 में विदेशी सहायता अधिनियम के अंतर्गत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों के विकास – कार्यक्रमों में जैसे-शैक्षणिक औद्योगिक कृषि तथा स्वास्थ्य के क्षेत्रों में, तकनीकी एवं आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

Agent provocateur

प्रोत्तेजक यह मूल रूप से फ्रांसीसी पद है। यह ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसे राजनीतिक अथवा सामाजिक संघर्षों की स्थिति में एक पक्ष द्वारा अपने विरोधियों के बीच मित्र के छद्म वेश में परन्तु वास्तव में उनको भड़काने या उकसाने तथा उनमें उत्तेजना अथवा अव्यवस्था फैलाने के लिए भेजा जाता है।

Aggrandizement

विवर्धन (नीति) राज्य की विस्तारवादी नीति का वह रूप जिसके अंतर्गत बलप्रयोग अथवा बलप्रयोग की धमकी तथा युद्ध के द्वारा अपनी सीमा का विस्तार करने अथवा पड़ौसी राज्यों को हड़पने का प्रयत्न किया जाता है। आरंभ में, रोम साम्राज्य की विस्तारवादी नीति के लिए और बाद में फ्रांस के लुई चतुर्दश की क्षेत्रीय विस्तार की नीति के लिए यह शब्द प्रयुक्त हुआ। जर्मन राष्ट्रवादी आंदोलन के सूत्रधारों ने इसी विवर्धन नीति का अनुसरण किया।

Aggression

आक्रमण, अग्र आक्रमण किसी राष्ट्र की दूसरे राष्ट्र के विरुद्ध वैध अथवा प्रयोजनों से सशस्त्र कार्रवाई करने की स्थिति या दशा जिससे उसकी प्रादेशिक अखंडता अथवा राजनैतिक संप्रमुता का हनन होता है।

Aggressive militarism

आकामक सैन्यवाद किसी अन्य देश पर आक्रमण करने, उसे नीचा दिखाने या अपने देश की सीमा का विस्तार करने की नीति से प्रेरित सैन्य तैयारी। इसके अंतर्गत सैनिकों में साहस, धैर्य, अनुशासन और राजनीतिक मूल्यों के प्रति कट्टर आस्था के साथ-साथ अपने राष्ट्र के प्रति उत्कट प्रेम और आत्मबलिदान की क्षमता उत्पन्न की जाती है। यह उग्र राष्ट्रवाद का प्रतीक है। जर्मनी में हिटलर तथा जापान में 1932-45 तक टोजो सरकार इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

Aggressive nationalism

आक्रामक राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद की वह उग्र एवं संकीर्ण भावना जो राष्ट्र के सीमोत्कर्ष और विस्तार की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर सरकार पर सैनिक तैयारियाँ करने और उग्र नीतियाँ अपनाने के लिए दबाव डालती है। दे. Chauvinism भी।

Aggressive war

आकामक युद्ध वर्तमान अतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार कोई राज्य केवल आत्मरक्षार्थ युद्ध कर सकता है। यदि प्रदेश का विस्तार करने अथवा अन्य किसी प्रयोजन से अंतर्राष्ट्रीय विधि अथवा संधि समझौते के विपरीत, युद्ध किया जाए तो उसे आक्रामक युद्ध माना जाता है। (3) जब उसकी नौ, स्थल तथा वायु सेनाएँ युद्ध घोषणा कर या बिना पूर्व घोषणा किए ही, किसी दूसरे राज्य के भूभाग, पोतों या विभानों पर आक्रमण कर देती हैं। (4) वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार अग्र-आक्रमण अवैध माना जाता है और सुरक्षा परिषद् को संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अर्तगत यह अधिकार दिया गया कि वह किसी सशस्त्र आक्रमण की परिस्थिति में निश्चित करे कि अग्र आक्रामक राज्य कौन है।

Aggressor

आकामक सन् 1933 में, निरस्त्रीकरण सम्मेलन की सुरक्षा विषयक प्रश्न समिति ने आक्रामक शब्द का प्रयोग उस राज्य के लिए किया था, जो निम्न प्रकार की कार्रवाई करने में पहल करता हो :- (1) जब वह किसी दूसरे राज्य पर युद्ध-घोषणा कर आक्रमण कर देता है। (2) जब उसकी सशस्त्र सेनाएँ, बिना युद्ध घोषणा किए किसी दूसरे राज्य के भूभाग पर आक्रमण कर देती हैं।

Agitation

आंदोलन किसी सामान्य हित से संबंधित माँगों अथवा शिकायतों के लिए सरकार अथवा संस्था, प्रतिष्ठान या कल-कारखाने के प्रबंधक मंडल के विरुद्ध किया गया सामूहिक और व्यापक संघर्ष।

Agitator

आंदोलक, आंदोलनकर्ता, आंदोलनकारी किसी प्रकार के राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक अथवा सामाजिक आंदोलन या संघर्ष को उकसाने या. भड़काने वाला या उनका नेतृत्व या प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति।

Agrarianism

भूमिसुधारवाद 1. भू-संपत्ति के समान विभाजन – अथवा उसके न्यायपूर्ण और उचित पुनर्वितरण का सिद्धांत। 2. ऐसा सामाजिक अथवा राजनीतिक आंदोलन जिसका ध्येय भूमिसुधारों को क्रियान्वित कराना और कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुधारना हो। यह उल्लेखनीय है कि भूमि सुधारवाद की दिशा में, भारत में जमीदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और भूदान आंदोलन का सूत्रपात हुआ।

Agrarian law

भूमि संबंधी विधि खेती योग्य भूमि के आबंटन, वितरण अथवा सीमा-निर्धारण करने अथवा भूमि स्वामित्व में परिवर्तन करने अथवा कृषि-उत्पादन में सुधार करने वाले कानून।

Agrarian movement

भूमि संबंधी आंदोलन, कृषिक आंदोलन इस प्रकार के आंदोलन विश्व के विभिन्न भागों में समय-समय पर होते रहे हैं। इन आंदोलनों के मुख्यतः दो लक्ष्य रहे हैं: (1) भूमि व्यवस्था से उत्पन्न किसानों के शोषण का अंत। उदाहरण के लिए भारत में जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन। (2) किसानों की दशाओं में सुधार और इसके लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाना जिनमें यह माँग प्रमुख रही है कि भूमि पर स्वामित्व किसान का हो और उसे कृषि के लिए अच्छे बीज, उर्वरक, जल, बिजली, यातायात एवं भंडारण की सुविधाएँ तथा कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराए जाएँ। इस प्रकार के आंदोलनों का स्वरूप विभिन्न परिस्थितियों में इस बात पर निर्मर रहा है कि इसका नेतृत्व किस राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित था जैसे, भूमिहीन और खेतिहर मजदूरों के हितों के समर्थन में छेड़े गए आंदोलन का नेतृत्व समाजवादी एवं साम्यवादी विचारघाराओं से प्रभावित रहा। दूसरी ओर, मध्यवर्गीय और बड़े किसानों के हितार्थ आंदोलनों का नेतृत्व प्रायः आर्थिक व्यवस्था को यथापूर्व बनाए रखने वाले लोगों के हाथ में रहा है। भारत के संदर्भ में इस प्रकार के आंदोलन की उभरती हुई प्रवृत्ति यह है कि राजनीति में कृषकों की सक्रिय सहभागिता और प्रभावी भूमिका हो।

Agrarian reforms

कृषि सुधार इससे अभिप्राय है कृषि उत्पादन एवं कृषकों की दशाओं में सुधार लाया जाए। भारत के संदर्भ में कृषि सुधार का मुख्य लक्ष्य जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन था। परंतु इसके साथ ही, कृषि सुधार के अनेक विषय उभर कर आए जैसे वैयक्तिक स्वामित्व में कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित करना, अतिरिक्त भूमि का भूमिहीनों में वितरण, चकबंदी, खेतिहर मजदूरों की उचित मजदूरी निर्धारित करना, कृषकों के लिए उचित ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना एवं कृषि- उत्पादन के क्रय-विक्रय की व्यवस्था करना आदि। कृषि सुधार के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण योजना बंजर, ऊसर या परती भूमि को कृषि योग्य बनाने की भी है।

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