भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

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Perichondrial Bone

पर्युपास्थि
सामान्यतः तरुणास्थि पर पाया जाने वाला स्तर।

Perichondritis

पर्युपास्थिशोथ
उपास्थि को ढकने वाली पर्युपास्थि कला की सूजन। यह शोथ तीव्र या चिरकारी हो सकता है। तीव्र शोथ की प्रवृत्ति पूयजनक (phogenic) होती है। चिरकारी शोथ यक्ष्मा या सिफिलिस के कारण होता है। अभिघात (trauma) या दुर्दम अर्बुद (malignant tumour), जो उपास्थि को प्रभावित करते हैं, पर्युपास्थि शोथ उत्पन्न कर सकते हैं। यदि शोथ की चिकित्सा न की जाए तो नीचे की उपास्थि पर भी प्रभाव पड़ता है। चिकित्सा में दैहिक प्रतिजीवी औषधियों का प्रयोग, स्थानिक भाग को आराम देना तथा फोड़े की पीप बाहर निकालना शामिल है।

Pericolitis

परिबृहदांत्रशोथ
बृहदांत्र के चारों तरफ सूजन हो जाना। यह बृहदांत्र के पर्युदर्या कंचुक (peritoneal coat) को प्रभावित कर सकता है। इस शोथ के कारण विद्रधि या फोड़ा बन जाता है। यह अवस्था आमतौर पर बृहदांत्र के विपुटीशोथ (diverticulitis) में देखी जाती है।

Peridiverticulitis

परिविपुटी शोथ
एक ऐसी दशा, जिसमें किसी भी अंडे की सतह पर उभार में सूजन हो जाती है।

Perineal Body

मूलाधारीय वस्तु
गुदा तथा भग के मध्य स्थित वाम तथा दक्षिण भाग में आने वाली मांसपेशियों की संधि।

Perineal Fistula

मूलाधारीय नाडीव्रण
श्रोणि सतह में उत्पन्न होने वाला नाडीव्रण।

Perinephric Abscess

परिवृक्कीय विद्रधि
गुर्दे के चारों ओर होने वाला फोड़ा।

Perinephric Haematoma

परिवृक्क रक्तगुल्म
वृक्क के चारों ओर होने वाली रक्त जन्य सूजन।

Perinephritis

परिवृक्कशोथ
गुर्दे के प्रावरणी आवरण तथा आस-पास के ऊतकों की सूजन। वृक्क संक्रमण से ग्रस्त अधिकतर रोगियों में यह अवस्था हल्के प्रकार की पाई जाती है परंतु परिवृक्कशोथ के तीव्र प्रकार परिवृक्क विद्रधि के बनने की संभावना रहती है।

Periosteal Bone

पर्यास्थि कला
वह विशिष्ट संयोजक तंतु, जो सभी हड्डियों को आवृत करता है तथा नए अस्थि निर्माण की क्षमता रखता है।

Peripheral Aneurysm

परिसरीय ऐन्यूरिज्म
शरीरस्थ बाहृय धमनियों का उभार युक्त होना।

Peripheral Arterial Disease

परिसरीय धमनी रोग
शरीरस्थ बाहृय धमनियों का रोग।

Peripheral Blood

परिसरीय रक्त
परिसरीय-रक्त परिभ्रमण।

Periphlebitis

परिशिराशोथ
शिरा के चारों तरफ सूजन का होना। आमतौर पर यह शोथ पड़ोस की तीव्र शोथज प्रक्रिया परिणामस्वरूप होता है। इस अवस्था का अति तीव्र रूप कभी-कभी सपूय कर्णमूलशोथ से ग्रसित तथा चिकित्सा न किये हुये रोगियों में देखा जाता है, जहां शोथ गह्वर शिरानाल (cavernous sinus) की दीवाल एक फैल जाता है और जिसके परिणामस्वरूप गह्वर शिरानाल घनास्रता (cavernous sinus thrombosis) उत्पन्न हो जाती है।

Peristalsis

पुरःसरण
पेशियों के लयबद्ध संकुचन से उत्पन्न गति द्वारा किसी नली में पदार्थों का आगे की ओर बढ़ना, जैसे-आहार नाल में भोजन का आगे बढ़ना।

Peritonitis

पर्युदर्या शोथ
परिउदरी अर्थात् पेट की झिल्ली की सूजन। साथ ही, इस अवस्था में सीरम फाइब्रिन का निःस्रवण, आंतों में सूजन तथा पूय (पीप) होता है। शोथ का कारण भौतिक, रासायनिक अथवा जीवाणुज हो सकता है। जीवाणुओं के विशिष्ट तथा अविशिष्ट दोनों ही प्रकार होते हैं। यक्ष्मा (तपेदिक) के जीवाणु का प्रवेश पर्युदर्या गुहा में आंत ऑपरेशन या चोट (अभिधात) तथा स्त्रियों में योनि के द्वारा गर्भाशय तथा डिंबवाहिनी के सहारे होता है। रासायनिक कारकों के उदाहरण, जो पर्युदर्या शोथ पैदा करते हैं, रक्त, पित्त तथा मूत्र है। साधारणतः इस रोग का उपचार शस्त्रकर्म द्वारा ही किया जाता है। न्यूमोकोक्कसी पर्युदर्या शोथ में शस्त्रकर्म के स्थान पर संरक्षी चिकित्सा अधिक कारगर साबित होती है।

Perityphlitis

परिअंधांत्र शोथ
(1) प्रायः वह चिरकारी प्रक्रिया, जिसमें कभी-कभी तीव्र उंडुकपुच्छशोथ (appendicitis) संक्रमण में उण्डुकपुच्छ के आधार से पैलता है और आगे चलकर पूयीभवन हो जाता है तथा विष्ठा नालव्रण (faecal fistula) बन जाता है।
(2) यह परिभाषा एपेम्डिसाइटिस शब्द के प्रचलन में आने से पहले व्यवहार में थी।

Perivesical Abscess

परिमूत्राशय विद्रधि
बस्ति प्रदेश में मूत्राशय के समीप होने वाला फोड़ा।

Perleche

सृक्कशोथ, परलेश
मुख-मौनीलीयता (oral moniliasis) का एक प्रकार, जो बच्चों के मुंह के किनारो को प्रभावित करता है। अक्सर ओष्ठ स्यंदी हो जाते हैं जिससे शल्की उपकला स्थूल या मोटी हो जाती है।

Perthe’S Disease

पर्थि रोग
यह निकटस्थ ओर्वी अधिवर्ध (femoral epiphysis) का अस्थि-उपास्थि व्यपजनन है, जिसमें ऊर्वस्थि के सिर में अस्थि केंद्र (ossific centre) का परिगलन हो जाता है। तीन से दस साल तक के बच्चों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है। कभी-कभी मामूली चोट का भू वृत मिलता है। रोगी की चलने फिरने की गतियां बंध जाती हैं और वह लंगड़ा कर चलने लगता है। चिकित्सा का उद्देश्य उर्वस्थि के सिर पर कम भार डालना है, जैसे-आराम, त्वचा कर्णण तथा भार को कम करने वाले कैलिपर्स का प्रयोग।

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