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Open Operation

विवृत शस्त्रकर्म
वह ऑपरेशन जिसमें संबंधित अंगों को खुला रखा जाता है।

Opertation

शस्त्रकर्म
(1) शल्य चिकित्सक के द्वारा हाथों अथवा यंत्रों से किया गया कोई भी कार्य।
(2) शल्य चिकित्सा संबंधी क्रियाविधि।

Operation Theatre

शस्त्रकर्म शाला, शस्त्र कर्मागार
चिकित्सालय का एक भाग हैं जहां पर शल्य चिकित्सा की जाती है।

Operative Surgery

शस्त्रकर्म, प्रायोगिक शल्यतंत्र
रोगी के उपचार में प्रयुक्त होने वाली शस्त्रकर्म प्रक्रियाओं से संबंधित शल्यविज्ञान। इसमें शस्त्रकर्म पूर्व (pre-operative) तथा शस्त्रकर्मोत्तर (post-oprative) देखरेख भी शामिल है।

Optic

चाक्षुष
आंख से संबंधित (कोई संरचना), जैसे- तंत्रिका, पालि आदि।

Oral

मुखीय, मुख संबंधी
मुँह से संबद्ध (कोई संरचना, रोग क्रिया आदि)।

Orbit

अक्षिकोटर, नेत्रकोटर
शिर करोटि में पाये जाने वाली गुहा, जिसमें आंख स्थित होती है।

Orchidopexy Or Orchipexy

वृषण स्थिरीकरण
वह शस्त्रकर्म जिससे अनवतीर्ण अर्थात् स्वस्थान में न आए हुए वृषण को वृषण कोश (scrotum) में स्थिर स्थापित कर दिया जाता है।

Orchiectomy

वृषणउच्छेदन
एक या दोनों वृषणों को काट कर बाहर निकाल देना। यह ऑपरेशन वृषण के खराब होने या उसमें अर्बुद आदि उत्पन्न हो जाने परकिया जाता है। इस शस्त्रकर्म की एक खास किस्म को अवकोशीय अवसंपुटी वृषणोच्छेदन (subcapsular orchiectomy) कहते हैं जो पुरःस्थ ग्रंथि में उत्पन्न कार्सिनोमा को नियंत्रण में लाने वाली हॉर्मोनी चिकित्सा के एक भाग के रूप में व्यवहार में लायी जाती है। वृषण को निकालने के बाद काश संपुट को वहीं छोड़ दिया जाता है जिससे रोगी यह महसूस करता है कि उसका वृषण वहीं मौजूद है। इस प्रकार से रोगी को मानसिक आघात या चोट से बचाया जा सकता है।

Orchitis

वृषणशोथ
चोट (अभिघात) अथवा संक्रमण द्वारा उत्पन्न वृषण की सूजना वेदना, सूजना तथा ज्वर इस रोग की विशेषताएं हैं।

Organ

अंग
शरीर के ऊतकों से बना भाग या अवयव, जो संरचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई के रूप में विशिष्ट कार्य करता है, जैसे- हृदय, वृक्क, यकृक, नेत्र आदि।

Orthopaedic Surgery

अस्थि-संधि शस्त्रकर्म
अस्थियों तथा संधियों जोडों की विरूपताओं (deformities) को ठीक करने के लिए की गई शल्य चिकित्सा।

Osteo-Chondroma

अस्थि-उपास्थि-अर्बुद
एक सुदम अर्बुद (benign tumour) जो हड्डी के उपास्थि भाग से निकलता है। इनकी उत्पत्ति अधिवर्ध (epiphysis) पर अस्थि की वृद्धि में विक्षोभ या विध्न का परिणाम है। उपास्थि में ही बाद में अस्थीभवन होता है। अस्थिकंकाल की वृद्धि के पूरे हो जाने पर बढ़ोत्तरी रुक जाती है। यह खाल (त्वचा) के नीचे एक मुलायम प्रक्षेप बनाता है और कभी-कभी नजदीक की संरचना के साथ रोक-टोक व हस्तक्षेप करता है। इसमें अकरमात् दुर्दम परिवर्तन भी हो सकते हैं।

Ostealgia

अस्थि-आर्ति, अस्थिगत शूल
हड्डी की गहराई में पीड़ा या वेदना होना।

Osteitis Fibrosa Cystica

ग्रंथिक संपुटि तंतुमय अस्थिविकृति
एक सौविर्थकर अस्थिशोथ (rarefying osteitis) जिसमें तंतु व्यपजनन पुटी (cysts) का बनना तथा प्रभावित हड्डियों में तंतु पर्विकाओं की उपस्थि भी शामिल है। यह अवस्था परा-अवटु ग्रंथि (parathyroid gland) के अत्यधिक कार्य करने के कारण उत्पनन होती है।

Osteitis Fibrosa (Fibrous Dysplasia)

तंतुमय अस्थिविकृति (तंतु दुर्विकसन)
हड्डियों के प्रभावित होने का रोग अस्थियों की जगह पर तंतु ऊतक बन जाता है जो पुटीय व्यपजनन (cystic degeneration) के क्षेत्र में हो सकता है। इस रोग में हड्डी का एक अंश या कई उनके पूरे के पूरे भाग ग्रस्त हो सकते हैं। यह रोग एक अस्थि को भी प्रभावित कर सकता है जिसमें यह अस्थि के सीमित क्षेत्र को ही प्रभावित करता है। उभी तक इस रोग की कोई विशिष्ट चिकित्सा नहीं मालूम हो पायी है। अगर स्थानिक दर्द है, तो शस्त्रकर्म से सहायता मिल सकती है।

Osteitis Fibrosa Generalisata

सार्वदैहिक तंतुमय अस्थिविकृति
एक रोग जिसमें अस्थियों में सदोष अस्थिभवन हो जाता है, जिसके फलस्वरूप अस्थियों में स्थूलता, कमजोरी तथा विरूपता उत्पन्न हो जाती है तथा अस्थि ऊतकों की जगह कोशिकीय तंतु ऊतक उत्पन्न हो जाते हैं। यह रोग एक या अधिक परा-अवटु उत्पन्न हो जाने के कारण होता है।

Osteoarthritis

अस्थिसंधिशोथ
हड्डियों के जोड़ की एक प्रकार की जकड़ वाली अवस्था जो चल संधियों को प्रभावित करती है। यह अवस्था नितम्ब तथा घुटने के जोड़ों में अधिक मिलती है। रोगी के जोड़ में दर्द, सख्ती (स्तब्धता) तथा बंधी हुई गतियों की शिकायत करता है। एक्स-रे से देखने पर अव-उपास्थि काठिन्य या कार्टिलेज के नीचे कड़ापन मिलता है।

Osteo-Chondritis

अस्थि-उपास्थिशोथ
बच्चों में रोगलाक्षणिक अवस्था का वह प्रकार है, जिसमें अस्थिकृत केंद्र में रक्त संवहन का अवरोध सामान्य कारण है। स्थानिक रक्तता (ischaemia) के कारण का पता नहीं है। यह दो प्रकार का होता है, अर्थात्-अस्थिकृत केंद्र का पूरा भाग रक्त संवहन से वंचित है या थोड़ा सा।

Osteo-Chondritis Dissicans

शोषकर अस्थि-उपास्थि-शोथ
इस अवस्था में संधायक स्नायु का एक क्षेत्र, नीचे की हड्डी के साथ, जोड़ के संघायक पृष्ठ से अलग हो जाता है। सामान्यतः घुटने तथा कोहनी के जोड़ ही, इस से प्रभावित होते हैं। शुरू में कमजोरी और दर्द या स्पर्श वेदना बंधी हुई गतियां जैसे लक्षण मिलते हैं। कभी-कभी गुटने का जोड़ जकड़ जाता है।

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