भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Filipuncture

सूत्रवेधन
शस्त्रकर्म हेतु धमनी विस्फारण का सूत्र द्वारा भेदन।

Finney’S Operation

फिने शस्त्रकर्म
अमाशय-ग्रहणी का छेदनोत्तर सीवनकर्म।

Fissure

विदार
शरीर के किसी भी अंग में रैखिक फटन।

Fissure-In-Ano

गुद विदार
गुदा (anus) की खाल में दरार का फटना अर्थात् गुदा त्वचा में लंबाई में एक डोंगी के समान व्रण बन जाना। आमतौर पर यह व्रण आगे या पीछे की तरफ बीच की रेखा में देखने को मिलता है। यह व्रण तीव्र या चिरकारी (पुराना-chroni) होता है। इस रोग में मल त्याग करते समय तेज दर्द होता है। शस्त्रकर्म से ही इस रोग का सफल उपचार होता है।

Fistula

नालव्रण
इस रोग में एक आशय की अवकाशिका (lumen) का दूसरे आशय की अवकाशिका से या शरीर पृष्ठ से अपसामान्य संचार हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, गुदा नालव्रण या भगन्दर विष्ठा नालव्रण (faecal fistula), मूत्र नालव्रण (urinary fistula) आदि। इससे निकले आस्राव में आमतौर पर ग्रसित अवकाशिका के स्राव (secretions) होते हैं।

Fistula-In-Ano

गुदनालव्रण या भगंदर
कणिका ऊतक (granulation tissue) जो गुदनाल या मलाशय (anal canal rectum) को गुदा के चारों तरफ की त्वचा से मिलाता है। यह नालव्रण गुदनाल से बराबर संक्रमित होने के कारण हमेशा के लिए बंद नहीं हो सकता। यह दो प्रकार का होता है- (1) निम्न स्तरीय तथा (2) उच्च स्तरीय। इसका मुख् लक्षण यह है कि इसमें से लगातार सीरम-सपूय आस्राव (seropurulent discharge) निकलता रहता है। कभी-कभी मलाशयदर्शन (proctoscopy) द्वारा अंदरूनी द्वार को देखा जा सकता है। शस्त्रकर्म ही इसका एकमात्र इलाज है।

Fistulotomy

नालव्रण भेदन
नाडी व्रण चिकित्सा हेतु नालव्रण का भेदना।

Fistulectomy

नालव्रण छेदन
पूरे नालव्रण को काटकर हटा देना।

Fistulization

नालव्रणीकरण
दो आशयों के बीच नालव्रण का निर्माण।

Fistulo-Enterostomy

लध्वांत्रनाडी सम्मिलन
छोटी आंत की नाड़ीव्रण का छेदनोपरांत संयुक्तीकरण।

Flap

प्रालम्ब
विभिन्न ऊतकों की एक-दूसरे को ढकने के लिए बनी रचना।

Flap Spliting Operation

वेष्टक-पृथक्करण शस्त्रकर्म
ऐसी शस्त्रकर्म पद्धति, जिसमें त्वचा निरोपण (skin grafting) के लिये पूरी मोटाई का प्रालंन (आस्फाल) बनाया जाता है और बन जाने पर कुछ हफ्तों के बाद इसे ग्राही स्थान पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है।

Flat Bone

सपाट अस्थि
शरीर में स्थित चपटी अस्थि संरचना।

Foetus

गर्भ
स्तनपायियों के गर्भाशय में भ्रूण की वह अवस्था, जिससे उसमें जीवन के लक्षण उपस्थित हो जाते हैं।

Follicle Cell

पुटक कोशिका
अंडाशय की अंड नलिका की आंतरिक उपकला कोशिकाएँ।

Foot Deformity

पाद विरूपता
जन्मजात विरूपता। यह दो प्रकार की होती है- टैलिपेस (talipes) तथा उन्नत चापपाद (pes cavus) और साथ में मध्य गुल्फ संधि के अंतर्गत पाद विरूपता तथा बहिर्नत पाद विरूपता (varus and valgus deformity) । टेलिपेस की चिकित्सा बच्चे के पैदा होने के दिन से ही प्रारंभ कर दी जाती है। शिशुओं और बालकों के लिए हस्तोपचार स्प्लिंट लगाना, ठीक करने वाले प्लास्टर तथा विकलांग जूते (orthopaedic shoes) पर्याप्त चिकित्सा है। युवकों के लिये अथवा बच्चों में इन साधनों के प्रयोग के पश्चात् भी ठीक न होने पर शस्त्रकर्म करने की आवश्यकता होती है। कभी-कभी इस विरूपता के साथ मेरुदंड की विरूपता भी होती है, जिसे अयुक्त मेरुदंड (spina bifida) कहते हैं।

Foramen Magnum

महारंध्र
कशेरुकियों की करोटि के पिछले सिरे पर स्थित बड़ा छिद्र, जिससे होकर मेरुरज्जु निकलती है।

Foraminotomy

छिद्रविस्तार
शरीर में उपस्थित छेद को चौड़ा करना।

Forceps

संदंश
एक यंत्र, जिसके दो फलक तथा दो हत्थे होते हैं। यह खींचने, पकड़ने तथा दबाने के काम में लाया जाता है।

Foreign Body

आगंतुक शल्य
इसका अभिप्राय शरीर में बाहरी वस्तु की उपस्थिति से है। यह बाहरी वस्तु ऊतकों या खोखले आशयों की अवकाशिका के भीतर हो सकती है। इस रेडियों अपार्य वस्तु के स्थान की जांच ऐक्स-रे द्वारा ही की जाती है। इस वस्तु को शस्त्रकर्म या गुहांतदर्शन (endoscopy) द्वारा ही निकाला जा सकता है।

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