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Bhashavigyan Paribhasha Kosh

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अंगजा आश्रित व्याकरण
daughter dependency grammar
व्याकरणिक विश्लेषण का एक उपागम, जो वाक्यीय अभिलक्षणों एवं आश्रयता सम्बन्धों को महत्त्व देता है । इस विश्लेषण में रूपान्तरण की अनिवार्यता नहीं होती है वरन् यह वाक्यीय प्रतिरूपण पर निर्भर करता है। इसमें आसन धियों के मध्य प्राप्त ऊर्ध्वाधर (vertical) सम्बन्धों को अंगजा आश्रित के रूप में सन्दर्भित करते है तथा कर्ता एवं क्रिया के मध्य प्राप्त क्षैतिज (horizontal) आश्रयता सम्बन्धों को भगिनी आश्रित के रूप में । इस उपागम की प्रत्येक आसन्धि द्विचर अभिलक्षणों वाली होती है जबकि पूर्व प्रचलित रूपान्तरण व्याकरण में यह अनिवार्य नहीं था ।

अंगविक्षेपविज्ञान
kinesics
संकेत विज्ञान के अन्तर्गत अंग विक्षेप शब्द का प्रयोग आंगिक चेष्टाओं एवं व्यवस्थित मुख भंगिमाओं द्वारा अर्थ सम्प्रेषण के सन्दर्भ में किया जाता है। प्रायः शारीरिक अंग विक्षेप (जैसे - होंठ पर आई हँसी अथवा भौंह का तिरछापन) भाषिक वाक्य की व्याख्या को कुछ परिवर्तित कर देते हैं। अभिव्यक्ति को अधिक सक्षम बनाने के लिए जिन शारीरिक मुद्राओं एवं मुखाकृतियों का प्रयोग किया जाता है, उनका विस्तृत अध्ययन अंगविक्षेप - विज्ञान का विषय है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह ज्ञात करना है कि क्या अंग विक्षेप क्रियाएँ पूर्ण सम्प्रेषण करने में समर्थ हैं ? अथवा कहाँ तक ये भंगिमाएँ प्रमुख सम्प्रेषण माध्यम भाषा की सहायक रूप में कार्य करती हैं ?
भाषा अर्जन से सम्बन्धित अध्ययन में यह अवधारणा विकासात्मक अंगविक्षेप - विज्ञान शीर्षक के अन्तर्गत आती है। कतिपय विद्वान समस्त (व्यवस्थापरक) शब्दावली के आधार पर अंगविक्षेप, सहअंगविक्षेप इकाइयों की स्थापना कर उनके मध्य के अन्तर की भी चर्चा करते हैं किन्तु इस शब्दावली के आधार पर शारीरिक भाषा की व्याख्या कठिन ही नहीं, विवादास्पद भी है।

अंगागिवाचन
synecdoche
अर्थ परिवर्तन का एक प्रकार जिसमें शब्द के प्राचीन एवं नवीन अर्थ के मध्य समग्रता एवं अंश का सम्बन्ध विद्यमान माना जाता है, पथा - अंग्रेजी शब्द `town` और `stove` के प्राचीन अर्थ क्रमशः `fence` और `heated room` थे जिनके बीच समग्रता एवं अंश का सम्बन्ध दृष्टिगत होता है । यही सम्बन्ध हिन्दी `मृग` शब्द के प्राचीन अर्थ `जानवर` एवं `हिरन` के बीच मिलता है।

अंत
coda
ध्वनिविज्ञान में प्रयुक्त शब्द जो किसी अक्षर के एक खंड की ओर संकेत करता है। यह खण्ड प्रायः किसी अक्षर के शिखर के बाद आता है, उदाहरणार्थ - काम् (आ) में म् ।

अंत प्रत्यय
Suffix
वह प्रत्यय जो मूल रूप के पश्चात् संयुक्त हो । परप्रत्ययीकरण की प्रक्रिया हिन्दी की एक बहुप्रचलित प्रक्रिया है। हिन्दी में इसका प्रयोग नवीन शब्दों के निर्माण के लिए ( व्युत्पादक प्रत्यय ) तथा व्याकरणिक सम्बन्धों की अभिव्यक्ति के लिए (विभक्ति प्रत्यय) होता है ।

अंतरण
transference
इस शब्द का प्रयोग अनुवाद के क्षेत्र में किया जाता है। नाइडा ने अपने अनुवाद सिद्धान्त में मूलभाषा पाठ के विश्लेषण तथा लक्ष्यभाषा पाठ के पुनर्गठन के बीच की प्रक्रिया को अन्तरण संज्ञा दी । अन्तरण की प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में घटित होती है तथा इसकी प्रकृति त्वरित और अन्तर्ज्ञान मूलक होती है। अनुवाद कार्य में अनुवादक के व्यक्तित्व की महत्ता इस सोपान पर होती है। विश्लेषण एवं पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक अन्य व्यक्तियों से सहायता ले सकता है किन्तु अन्तरण के सोपान पर उसे अकेले कार्य करना पड़ता है । इस सोपान पर दो तथ्य महत्त्वपूर्ण होते हैं - अनुवादक का व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य संक्रमणकालीन तालमेल ।

अंतरीकृत
internalized
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा कोई वक्ता अपनी भाषा की संरचना सम्बन्धी ज्ञान को धारण करता है । प्रजनक भाषाविदों ने इस शब्द का प्रयोग किया । भाषार्जन के सन्दर्भ में भी इस पारिभाषिक शब्द का प्रयोग किया गया । इन विद्वानों के अनुसार हिन्दी भाषी बच्चों द्वारा किया गया प्रयोग *कुर्सिएँ इस तथ्य का संकेतक है कि बच्चों ने हिन्दी बहुवचन नियम को पूर्णतः अन्तरीकृत कर लिया है। प्रजनक विद्वान भाषिक दक्षता को अन्तरीकृत नियमों का समुच्चय मानते हैं।

अन्तर्गामी वायु प्रवाह
omgressove aor strea,
फेफड़ों से वायु प्रवाह दो प्रकार से होता है अन्तर्गामी एवं बहिर्गामी। सामान्यतः भाषिक ध्वनियाँ बहिर्गामी वायु प्रवाह से उच्चरित होती हैं किन्तु कभी-कभी अन्तर्गामी वायु प्रवाह से भी कुछ भाषिक ध्वनियाँ उच्चरित होती हैं । अत्यधिक पीड़ा या आश्चर्य की अभिव्यक्ति अथवा सांस लेते समय बोलने पर कभी-कभी अचानक अन्तर्गामी वायु प्रवाह से उच्चरित ध्वनि सुनाई पड़ती है।

अन्तर्निहित अभिलक्षण
inherent feature
प्रजनक व्याकरण के कतिपय प्रारूपों में स्वीकृत एक प्रकार के द्विचर अभिलक्षण जो कोशीय सूची में निहित होते हैं तथा किसी मद के वाक्यीय परकार्य को प्रभावित करने वाली विशेषताओं की सूचना देते हैं, यथा - ( +मानवीय ), ( +अमूर्त ), ( + पुर्लिंग )। विश्लेषण के अनेक बिन्दुओं, यथा - चयनपरक बाद्धयताओं के स्पष्टीकरण तथा अकोशीय रूपान्तरणों में, ये अभिलक्षण कार्यरत रहते हैं ।

अन्तर्मुखी
endophoric
किसी पाठ की संरचना को परिभाषित करने वाले संसक्तिपरक सम्बन्धों को अभिव्यक्त करने के लिए कुछ विद्वान अन्तर्मुखी शब्द का प्रयोग करते हैं । इन सम्बन्धों को अन्वादेशक तथा पश्चोन्मुखी दो वर्गों में विभाजित किया जाता है। बहिर्मुखी सम्बन्ध इसके प्रतियोगी होते हैं जिनकी संहति में कोई भूमिका नहीं होती और जो भाषा बाह्य परिस्थितियों पर व्याख्येय होते हैं ।


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