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भारतवाणी
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भारतीय भाषाक माध्यम सँ ज्ञान
Bharatavani

बेर-बेर पुछल जाइ बला प्रश्न

भारतवाणी कि  अछि? एहि परियोजनाक पाछू दर्शन कि अछि?

  • भारतवाणी एक परियोजना अछि, जकर उद्देश्य मल्टीमिडिया (पाठ, श्रव्य, दृश्य आ छवि)क उपयोग करैत भारतक सभ भाषाओँक बारेमे आ भारतीय भाषाओँमे उपलब्ध ज्ञानकेँ एक पोर्टल (वेबसाइट) पर उपलब्ध करैबाक अछि। ई पोर्टल समावेशी, संवादात्मक, आओर गतिशील होएत। मूल उद्देश्य अछि डिजिटल भारतक एहि युगमे, भारतकेँ एक ओपन ज्ञान (मुक्‍त ज्ञान) समाज बनेबाक लेल अछि।

भारतवाणी ज्ञान पोर्टलक लाभार्थी के होएत?

  • भारतवाणीक उपयोग विभिन्न सामाजिक, आर्थिक आ शैक्षणिक (औपचारिक आ अनौपचारिक) पृष्‍ठभूमिक तथा सभ आयु वर्गक लोग कए सकैत अछि।

भारतवाणीक लेल सामग्रीक संकलन कोना काएल जाएत?

  • भारतवाणी भारतक सभ सरकारी आ गैरसरकारी संस्थाओँ, शैक्षणिक संस्थानोँ, शैक्षणिक वोर्ड, पाठ्य-पुस्तकोँसँ संबंधित निदेशालयोँ, विश्‍वविद्यालयोँ, अकादमी आ प्रकाशन गृहोँ आदिसँ ज्ञान सामग्रीक संकलन मल्टीमिडियाक रूपमे सभ सूचीबद्ध भाषाओँमे करत।
  • भारतवाणी व्यक्‍तिगत संस्थाओँसँ सेहो आग्रह करत कि अनवरत ऑनलाइन उपयोगक लेल ओ अपन समग्रीकेँ साझा करू।
  • समग्रीक संकलन आ प्राथमिकता निर्धारणकेँ अनुमोदनार्थ प्रस्तुत कएल जाएत। संपादकीय समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशोँ पर सलाहकार समिति द्वारा अंतिम निर्णय लेल जाएत।
  • भारतवाणीक ध्येय ज्ञान सामग्री प्रकाशित करब अछि। संगहि सलाहकार समिति द्वारा विशिष्‍ट मापदंडोँक आधार पर कथेतर (नॉन-फिक्शन) साहित्यकेँ सेहो प्रकाशित करत।

भारतवाणी सामग्रीक गुणवत्ता कोना सुनिश्‍चित करत?

  • भारतवाणी समाग्री प्रकाशनक शुरुआतक विषयमे विशेषज्ञोँ द्वारा निर्मित सामग्री तथा प्रतिष्‍ठित संस्थानोँ द्वारा प्रकाशित सामग्रीसँ करत। एहि क्रममे सर्वप्रथम भारतीय भाषा संस्थान द्वारा प्रकाशित सामग्रीकेँ लेल जाएत।
  • नव सृजित सामग्रीक प्रकाशनक संदर्भमे भारतवाणी द्वारा प्रत्येक भाषाक लेल सृजित संपादकीय समिति द्वारा निर्णय लेल जाएत।
  • सभ प्रकारक गलतीसँ मुक्‍त सामग्रीक प्रकाशनक लेल एक तंत्र स्थापित कैल जाएत।

कि भारतवाणी भाषासँ संबंधित सूचना प्रद्योगिकी उपकरणोँकेँ प्रकाशित करत?

  • भारतवाणी, भारतीय भाषाओँक लेल उपलब्ध आ अद्यतित आईटी उपकरणोँकेँ प्रदर्शित करबाक लेल एक मंच प्रदान करत। ई संचार मंत्रालय आ सूचना प्रौद्योगिकी (एमसीआईटी)क संग समन्वय स्थापित करत, जे अपन विभिन्न एजेँसियोँ तथा— टीडीआईएल आदिक माध्यमसँ एहन उपकरणोँक विकासमे संलग्न अछि। भाषासँ संबंधित विभिन्न उपकरणोँ यथा— फॉन्ट, सॉफ्टवेयर, टंकण उपकरण, मोबाइल एप्स, बहुभाषी अनुवाद उपकरण, पाठसँ वाक् आ वाक्‌सँ पाठ आदिकेँ उपलब्ध कराओल जाएत।

वृहद पैमाना पर समाजक लेल भारतवाणीक कि लाभ अछि?

  • भारतवाणी, भारतीय भाषाओँ / मातृ भाषाओँकेँ बृहद पैमाना  उपलब्ध कराओत, जकर परिणाम स्वरूप युवा पीढ़ी अपन सभ ऑनलाइन गतिविधियोँ यथा— ब्लागिंग, सामाजिक मीडिया, अध्ययन आदिक लेल मातृभाषाक प्रयोग करबाक लेल प्रोत्साहित्य होएत।
  • भारतवाणी लुप्तप्राय, गौण, अल्पसंख्यक आ जनजाति भाषा / मातृभाषा सभकेँ साइबरस्पेशमे विशिष्ट स्थान उपलब्ध कराओत।
  • प्राय: सभ भारतीय भाषा / मातृभाषा लग धरि अपन उपस्थितिक द्वारा भारतवाणी निरपवाद रूपेँ सुदूर क्षेत्रधरि पहुँचि आओर सांस्कृतिक जागरूकता ओ अनुकूलताकेँ बढ़बैत भारतक सभ समुदायक सङ सम्पर्क करत।

सरकारी सूचनाओँकेँ प्रकाशित करत कि भारतवाणी?

  • भारतवाणी प्रयोजनाक, कृषि, व्यापार, शिक्षा, सामाजिक क्षेत्र, समय पर सेवा प्रदान करए वाला आ अन्य महत्वपूर्ण / आवश्यक पोर्टलसँ संबंध होएत, जाहिसँ सभ नागरिकोँकेँ एके पोर्टल पर ज्ञान आ सूचनाक प्राप्‍ति होएत।

भारतवाणीमे कोनकोन भाषाओँकेँ सम्मिलित कैल गेल अछि?

  • पहिल वर्षमे 22 अनुसूचित भाषाओँ (असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्‍मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मैथिली, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संताली, सिंधी, तमिल, तेलगू, आ उर्दू)केँ सम्मिलित कैल जाएत। ओकर बाद अन्य भाषाओँकेँ चरणबद्ध रूपसँ सम्मिलित कैल जाएत।

भारतवाणीक वास्तविक लक्ष्य कि छैक? सामग्री कोन प्रकारक छैक जे कि भारतवाणीमे प्रकाशित कएल जाए रहल अछि?

  • भारतवाणी अपन परिचालनक पहिल आ दोसर वर्षमे प्राथमिकताक आधारपर विषयसँ सम्बन्धित ज्ञान सामग्रीकेँ विकसित कए उपस्थित करत। तकर बाद, अगिला पाँच वर्षक लेल प्रत्येक भाषा / मातृभाषासँ सम्बन्धित विशिष्ट सामग्रीक निर्माणक लक्ष्य निर्धारित कएल जाएत। प्रारम्भमे विभिन्न भाषासभमे सहजतासँ उपलब्ध सामग्रीकेँ प्रकाशित करबाक प्रयास कएल जाएत।
  • भारतवाणी निम्नलिखित कार्योँक निर्वहन करत
  1. भाषा आ साहित्यक प्रलेखन डिजिटल आ इलेक्ट्रानिक स्वरूपमे तैयार करब
  2. लिपि तैयार करब आ ओकर नामांकन करब, टाइपोग्राफी कोड
  3. शब्दकोशोँ आ शब्दावलियोँक निर्माण
  4. साहित्य (लिखित आ मौखिक) वा ज्ञान ग्रंथोँक आधुनिक आ शास्‍त्रीय भाषाओँमे अनुवाद
  5. ऑनलाइन भाषा शिक्षण, अधिगम वा भाषा शिक्षक प्रशिक्षण प्रदान करत वा प्रमाण-पत्र देत तथा सतत, व्यापक मूल्यांकन सहित ऑनलाइन भाषा प्रशिक्षण आ मूल्यांकन पर सेहो ध्यान देत

कि भारतवाणीमे प्रकाशित समग्रीक निःशुल्क उपयोग कैल जा सकैत अछि? भारतवाणीमे समग्रीक कॉपीराइट कोना सुरक्षित कैल जाएत?

  • भारतवाणी, आम नागरिक. विशेष रूपसँ भारतीय नागरिकोँक संग ज्ञान बाँटबाक उद्देश्यसँ निर्मित नव युगक एक पोर्टल अछि। अतः भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध सभ सामग्रीकेँ शैक्षिक आ अनुसंधान प्रयोजनोँक लेल निःशुल्क उपयोगक कएल जा सकैत अछि।
  • पोर्टल, भारतीय कॉपीराइट अधिनियम 1957क पालन करैत अछि, जे किछु एहन गतिविधियोँक अनुमति दैत अछि धारा 52क तहत कॉपीराइटक उल्लंघनक अन्तर्गत नहि अबैत अछि।

कि निजी संस्थानोँ आ व्यक्‍तियोँ द्वारा भारतवाणीक लेल योगदान कैल जा सकैत अछि? कि भारतवाणी द्वारा समग्रीक लेल मानदेयक भुगतान कैल जाएत?

  • हँ। ओ अपन मौलिक कथेतर साहित्य (नॉन-फिक्शन) / ज्ञान सामग्रीक निःशुल्क सार्वजनिक उपयोगक लेल योगदान कए सकैत अछि। लेखकक अधिकार हुनक योगदानक लेल देल जाएत। एहि प्रकारेँ उपलब्ध सामग्रीक स्वीकृति संपादकीय समितिक अनुमोदनक अधीन होएत।
  • भारतवाणी मातृभाषामे सामग्री प्रस्तुत करबाक लेल ऑनलाइन उपकरण उपलब्ध कराओत।
  • सामग्रीक सतत उपयोगक लेल मानदेयक दरोँक निर्धारण सलाहकार समिति द्वारा कैल जाएत, जे मौलिक सामग्रीक लेल निर्धारित वित्त्त, सामग्रीक मौलिकता आ ओकर विशिष्‍टता पर निर्भर करत।

शारीरिकरूपसँ विकलांग लोगोँक लेल भारतवाणी कोना सुलभ होएत?

  • भारतवाणी, पोर्टल विकसित करबामे भारत सरकारक दिशा-निर्देशोँक संग-संग अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मापदंडोँक सेहो अनुपालन करत।
  • भारतवाणी, निःशुल्क रूपमे पाठसँ वाक्‌क सुविधाकेँ, उपलब्ध भाषाओँमे प्रदान करत ताकि नेत्रहीन लोगोँ द्वारा सेहो वेबसाइट सामग्रीक उपयोग सहजतापूर्वक कए सकै।

जँ केओ भारतवाणीक सूचना चोरबैछ तँ कि होएत?

  • भारतवाणी सामान्य रूपेँ जनतापर विश्वास करैछ। भारतवाणीक सामग्रीसँ कोनो तरहक साहित्यिक-चोरी, दुरुपयोग भेलापर तुरन्त हमर संज्ञानमे आनल जाएत। भारतवाणी सामग्रीसँ सिखबाक ओ भाषाकेँ विस्तार देबाक हेतुएँ प्रोत्साहित करैछ, जे कि भारतक भाषायी समृद्धि ओ सांस्कृतिक विरासतक संरक्षणमे सहयोग करैछ।

भारतवाणीक प्रशासनिक संरचना कि अछि?

  • भारतवाणीक परिचालन होइछ
  1. प्रख्यात भाषावैज्ञानिक ओ भाषायी विशेषज्ञक एक गोट राष्ट्रीय सलाहकार समिति।
  2. एक गोट तकनीकी सलाहकार समिति, जे कि पोर्टल आ भाषायी उपकरणक तकनीकी पहलूपर मार्गदर्शन करत।
  3. भारतवाणी हेतु सामग्री एकत्रित करबाक लेल भाषाजन्य सम्पादकीय समिति।

भारतवाणीक परिचालन कतएसँ होइत अछि?

  • भारतवाणीक परिचालन भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक)क परिसरसँ होइत अछि

 पत्रव्यवहारक पता

 भारतवाणी परियोजना
 भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल)
मानस गंगोत्री, हुन्सुर रोड, मैसूर 570,006
दूरवाणी: + 91-821-2515820 (निदेशक)
स्वागत-कक्ष(रिसेप्शन) / PABX: + 91-821-2345000
फैक्स: + 91-821-2515032 (कार्यालय)
परियोजना ई-मेल: bharatavaniproject@gmail.com

भारतवाणी परियोजना से संबंधित जनसूचना

भारतवाणी क्या है? इस परियोजना का मंतव्य क्या है?

भारतवाणी एक परियोजना है जिसका उद्देश्य मल्टीमीडिया (पाठ, श्रव्य, दृश्य एवं छवि) का उपयोग करते हुए भारत की समस्त भाषाओं के बारे में एवं भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान को एक पोर्टल (वेबसाइट) पर उपलब्ध करवाना है। यह पोर्टल समावेशी, संवादात्मक और गतिशील है जिसका मूल उद्देश्य है डिजिटल भारत के इस युग में भारत को “मुक्त ज्ञान” समाज बनाना।

भारतवाणी ज्ञान पोर्टल के लाभार्थी कौन हैं?

भारतवाणी का उपयोग विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक (औपचारिक एवं अनौपचारिक) पृष्ठभूमि तथा सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं।

भारतवाणी के लिए सामग्री का संकलन कैसे किया जाता है?
  • भारतवाणी, भारत के समस्त सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, शैक्षणिक बोर्ड, पाठ्य-पुस्तकों से संबंधित निदेशालयों, विश्वविद्यालयों, अकादमी एवं प्रकाशन गृहों आदि से ज्ञान सामग्री का संकलन समस्त सूचीबद्ध भाषाओं में करती है। भारतवाणी व्यक्तिगत संस्थाओं से भी आग्रह करती है कि वे अनवरत ऑनलाइन उपयोग के लिए अपनी सामग्री को साझा करें।
  • सामग्री चयन और प्राथमिकता निर्धारण को अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाता है। संपादकीय समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों को अंतिम निर्णय के लिए सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाता है। भारतवाणी का ध्येय ज्ञान सामग्री प्रकाशित करना है। साथ ही सलाहकार समिति द्वारा विशिष्ट मापदंडों के आधार पर निर्धारित कथासाहित्य को भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाता है।
भारतवाणी सामग्री की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित करती है?

भारतवाणी, प्रतिष्ठित संगठनों से प्राप्त ज्ञान संसाधनों को, सक्षम प्राधिकारी द्वारा मूल्यांकन किए जाने तथा उनके अनुमोदनोपरांत ही उपलब्ध कराती है। ऐसी सामग्रियों को संपादकीय समितियों द्वारा उचित अनुशंसा और अनुमोदनोपरांत ही भारतवाणी पोर्टल एवं मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त त्रुटि रहित सामग्री उपलब्ध कराने हेतु एक व्यवस्थित तंत्र की स्थापना की गई है।

क्या भारतवाणी भाषा से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों को उपलब्ध कराती है?

भारतवाणी, भारतीय भाषाओं के लिए उपलब्ध एवं अद्यतित आईटी उपकरणों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। यह इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित करेगी, जो अपनी विभिन्न एजेंसियों यथा - टीडीआईएल, आदि के माध्यम से ऐसे उपकरणों के विकास में संलग्न हैं। वर्तमान में, भारतवाणी ई-माध्यमों और वेब स्पेस में भारतीय भाषाओं के उपयोग हेतु विभिन्न संगठनों द्वारा उपलब्ध कराए गए ओपन-सोर्स टूल के हाइपरलिंक प्रदान करती है।

बृहद् पैमाने पर समाज के लिए भारतवाणी कैसे लाभकारी है?
  • भारतवाणी का लक्ष्य भारतीय भाषाओं/मातृभाषाओं को बृहद् पैमाने पर इंटरनेट पर प्रदर्शित करना है और इस प्रकार युवा पीढ़ी को अपनी सभी ऑनलाइन गतिविधियों जैसे ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया, ज्ञानार्जन आदि में अपनी भाषाओं/मातृभाषाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • भारतवाणी, लुप्तप्राय भाषाओं, अल्पसंख्यक भाषाओं एवं जनजातीय भाषाओं/मातृभाषाओं को साइबर स्पेस में महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है।
  • भारतवाणी, भारत की लगभग सभी भाषाओं/मातृभाषाओं के साथ-साथ भारत के सभी समुदायों के साथ संपर्क स्थापित करने, दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँचने और सांस्कृतिक जागरूकता तथा समझ को बढ़ावा देने का कार्य करती है।
क्या भारतवाणी सरकारी संस्थाओं द्वारा सृजित सामग्रियों को सुलभ कराती है?

भारतीय भाषाओं में और उनके बारे में सीखने की सुविधा प्रदान करने वाली न केवल सार्वजनिक अपितु निजी प्रयासों को भी भारतवाणी हाइपरलिंक के माध्यम से उपलब्ध करवाती है। इनमें ज्ञान संसाधन के रूप में विश्वकोश सामग्री, भाषा अभिगम सामग्री, तकनीकी अनुप्रयोगों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आधुनिक प्रगति से संबंधित जानकारी तथा और भी बहुत कुछ शामिल हैं।

भारतवाणी में किन भाषाओं को सम्मिलित किया गया है?

भारतवाणी का लक्ष्य 121 भारतीय भाषाओं को डिजिटल उपस्थिति प्रदान करना है। इसमें 22 अनुसूचित भाषाएँ (असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मैथिली, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संथाली, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू) एवं 99 अननुसूचित भाषाएँ शामिल हैं। 121 भाषाओं के अलावा, भारतवाणी भारत की विभिन्न बोलियों और मातृभाषाओं में प्रकाशित ज्ञानसंसाधनों को भी साझा करती है।

भारतवाणी पोर्टल पर किस प्रकार की सामग्री उपलब्ध करायी जाती है?

भारतवाणी, विभिन्न ज्ञानानुशासनों की ज्ञान सामग्रियों, भाषा अधिगम संबंधी संसाधनों, शब्दकोशों एवं शब्दावलियों, मल्टीमीडिया संसाधनों (ऑडियो और वीडियो) तथा पाठ्यपुस्तकों के रूप में भारतीय भाषाओं में प्रकाशित ज्ञान सामग्री को उपलब्ध कराती है। भारतवाणी पोर्टल (www.bharatavani.in) को योजनाबद्ध रूप से डिजाइन किया गया है ताकि प्रत्येक सामग्री को उसकी कोटि के अनुसार विशिष्ट वर्गों में वर्गीकृत किया जा सके। भारतवाणी के प्रमुख अनुभाग निम्नवत् हैं:

विश्वकोश / ज्ञानकोश :

यह अनुभाग विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध विविध ज्ञानानुशासनात्मक सामग्रियों की उपलब्धता संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। भारतवाणी का यह पृष्ठ पारिस्थितिकी, विश्वकोश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कला और साहित्य तथा ऐसे ही अन्य ज्ञानानुशासनों की सामग्रियों की एक विशाल श्रृंखला प्रस्तुत करता है।

भाषा अधिगम / भाषाकोश :

भाषाकोश अनुभाग भारतीय भाषाओं को, अंग्रेजी तथा अन्य संबद्ध भाषाओं के माध्यम से, सीखने की सुविधा प्रदान करता है। भाषा अधिगम में सहायक व्याकरण, ध्वनि-विज्ञान, वाक्य-विन्यास, शब्दकोश, शब्दावलियाँ आदि यहाँ उपलब्ध कराए जाते हैं।

शब्दकोश और शब्द-संग्रह / शब्दकोश :

शब्दकोश अनुभाग उपयोगकर्ताओं को विविध भारतीय भाषाओं में उपलब्ध खोज योग्य पाठ एवं पीडीएफ प्रारूप आधारित ऐसे बहुभाषी शब्दकोशों और शब्दावलियों को सुलभ कराता है, जो न केवल दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले पारिभाषिक शब्दों की व्याख्या करते हैं, अपितु कृषि, संगीत, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, सूचना विज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान, जलवायु विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, अर्थशास्त्र, भाषाविज्ञान, गणित, भूगोल आदि जैसे विभिन्न ज्ञानानुशासनों से भी संबंधित होते हैं।

पाठ्यपुस्तक / पाठ्य पुस्तक कोश :

इस पृष्ठ के माध्यम से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पाठ्यपुस्तक प्राधिकरणों द्वारा प्रदान की गयी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करायी जाती हैं। भारतवाणी, भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान सामग्री का विशाल भण्डार है। यह, भाषानुरागियों और छात्रों को, भारत के सभी पाठ्यपुस्तक प्राधिकरणों द्वारा प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों को सुलभ कराती है।

मल्टीमीडिया / बहुमाध्यम कोश :

बहुमाध्यम कोश, भाषा अधिगम और भाषायी ज्ञानवर्धन को आकर्षक बनाने के लिए वीडियो एवं ऑडियो की एक श्रृंखला उपलब्ध कराता है जो उपयोगकर्ताओं को विभिन्न भाषा समुदायों के भाषायी, सांस्कृतिक, सामाजिक, जातीय और राजनीतिक इतिहास से परिचित कराता है।

आईटी उपकरण / सूचना प्रौद्योगिकी कोश :

यह पृष्ठ भारतीय भाषाओं से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों की एक विस्तृत सूची उपलब्ध कराता है। ये उपकरण निःशुल्क और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं। इन्हें संबंधित लिंक्स से डाउनलोड करके उपयोग किया जा सकता है।

क्या भारतवाणी पर उपलब्ध ज्ञान संसाधनों का निःशुल्क उपयोग किया जा सकता है? भारतवाणी में सामग्री का कॉपीराइट कैसे सुरक्षित किया जाता है?
  • भारतवाणी, आम नागरिक, विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के साथ ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से निर्मित आधुनिक युग का एक पोर्टल है। इसलिए भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध समस्त सामग्री को शैक्षणिक और अनुसंधान प्रयोजनों के लिए निःशुल्क उपयोग किया जा सकता है।
  • भारतवाणी पोर्टल, भारतीय कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 के अनुसार केवल ऐसी गतिविधियों की अनुमति देता है जो धारा 52 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन के अंतर्गत नहीं आते हैं।
क्या निजी संस्थानों एवं व्यक्तियों द्वारा भारतवाणी में योगदान किया जा सकता है?
  • भारतवाणी, आम नागरिक, विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के साथ ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से निर्मित आधुनिक युग का एक पोर्टल है। इसलिए भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध समस्त सामग्री को शैक्षणिक और अनुसंधान प्रयोजनों के लिए निःशुल्क उपयोग किया जा सकता है।
  • भारतवाणी पोर्टल, भारतीय कॉपीराइट (संशोधन) अधिनियम, 2012 के अनुसार केवल ऐसी गतिविधियों की अनुमति देता है जो धारा 52 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन के अंतर्गत नहीं आते हैं।
दिव्यांगजनों के लिए भारतवाणी कैसे सुलभ होगी?
  • भारतवाणी, पोर्टल विकसित करने के दौरान समय-समय पर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मापदंडों का भी अनुपालन करेगी।
  • भारतवाणी, निःशुल्क रूप से पाठ से वाक् की सुविधा को उपलब्ध भाषाओं में प्रदान कराएगी ताकि नेत्रहीन लोगों द्वारा भी वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया जा सके।
यदि कोई भारतवाणी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी / सूचना का दुरुपयोग कर रहा है, तो क्या होगा?

भारतवाणी साधारणतः नागरिकों पर विश्वास करती है। इस पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री की यदि कोई नकल करता है या सामग्री का दुरुपयोग करता है तो उसे तुरंत हमारे संज्ञान में लाया जा सकता है। भारतवाणी, भाषाओं को सीखने और प्रसारित करने के लिए, जो भारतीय समाज की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सहयोगी होगा, प्रोत्साहित करती है।

भारतवाणी का प्रशासनिक ढाँचा क्या है?

भारतवाणी का परिचालन:

  1. प्रख्यात भाषावैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति के द्वारा होता है।
  2. पोर्टल और भाषा उपकरणों के तकनीकी पहलुओं की प्रगति पर मार्गदर्शन, प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति के द्वारा किया जाता है।
  3. संकलित सामग्रियों की गुणवत्ता परिक्षण एवं अनुमोदन के लिए भारतवाणी ने भाषावार संपादकीय समितियों का गठन किया है।
भारतवाणी का परिचालन कहाँ से होता है?

पत्र-व्यवहार का पता

भारतवाणी परियोजना

भारतीय भाषा संस्थान
मानसगंगोत्री, हुणसूर मार्ग, मैसूरू –५७०००६
दूरवाणी:+९१-८२१-२५१५८१० (निदेशक)
स्वागत-कक्ष/PABX : +९१-८२१-२३४५०००
फ़ैक्स:+९१-८२१-२५१५०३२ (कार्यालय)
परियोजना का ई-मेल:bharatavaniproject@gmail.com

Frequently Asked Questions

What is Bharatavani? What is the philosophy behind this project?

Bharatavani is a project with an objective of delivering knowledge in and about all the languages in India using multimedia (i.e., text, audio, video, images) formats through a portal (website). This portal is a completely all inclusive, interactive, dynamic and moderated platform which has been designed with an idea to make India an Open Knowledge Society in the era of Digital India.

Who are the beneficiaries of Bharatavani knowledge portal?

Bharatavani is accessible to all sections of society irrespective of age, gender, income, background, education (formal and informal) etc.

How is the content aggregated for Bharatavani?
  • Bharatavani collects knowledge contents in all the enlisted languages from all the Government and Non-Governmental Institutions, Educational Institutions, Board of Education, Directorate of textbooks, Universities, Academies, Publication Houses etc.
  • Bharatavani also requests private Institutions and individuals to share their content for perpetual online usage.
  • The approval process of prioritization and selection of content is put in place. The recommendations by the editorial committee are placed before the Advisory Committee for final decision.
  • The focus of Bharatavani is to publish knowledge content. However, it will also host representative fiction content based on specific criteria decided by the Advisory Committee.
How does Bharatavani ensure the quality of the content?

Bharatavani hosts knowledge resources from organizations of repute after due screening. Such contents are made available through the portal and mobile application only after the due recommendation and approval by the constituted Editorial Committees. Additionally, all the mechanisms to publish error free resources have been established.

Will Bharatavani provide language IT tools?

Bharatavani acts as a platform to showcase all the already available IT tools for Indian Languages. In future, it will coordinate with the Ministry of Electronics & Information Technology which is developing Indic language tools through its agencies like TDIL. Presently, Bharatavani provides hyperlinked access to open-source tools that are made available by several organizations for facilitating usage of Indian languages in e-mediums and web space.

What are the benefits of Bharatavani to the society at large?
  • Bharatavani aims to make Indian languages/mother tongues visible on the Internet on a large scale and thus encourages the young generation to use their languages/mother tongues in all their online activities like blogging, social media, learning etc.
  • Bharatavani provides endangered, minor, minority and tribal languages/mother tongue a prominent place in cyberspace.
  • By covering almost all Indian languages/mother tongue, Bharatavani connects with all the communities of India, thereby reaching remote areas and promoting cultural awareness and understanding.
Does Bharatavani provide access to information and content produced by Government agencies?

Bharatavani provides hyperlinked access to not only public but also private initiatives which facilitate learning in and about Indian languages. This includes knowledge resources in the form of encyclopedic contents, language learning contents, technological tools, information related to modern advancements in the field of science and technology and much more.

Which are the languages included in Bharatavani?

Bharatavani aims to provide digital presence to 121 Indian languages. This includes 22 Scheduled languages (Assamese, Bengali, Bodo, Dogri, Gujarati, Hindi, Kannada, Kashmiri, Konkani, Malayalam, Manipuri, Maithili, Marathi, Nepali, Odia, Punjabi, Santali, Sanskrit, Sindhi, Tamil, Telugu and Urdu) and 99 non-scheduled languages. In addition to the 121 languages, Bharatavani also shares published knowledge resources in various dialects and mother tongues of India.

What are the types of content that are being hosted in Bharatavani?

Bharatavani essentially hosts knowledge contents from various disciplines, language learning resources, dictionaries and glossaries, multimedia resources (audio & video) and textbooks in Indian languages. The bharatavani portal (www.bharatavani.in) is strategically designed so as to categorize each content into specific sections according to the genre. The major sections of Bharatavani are:

Encyclopedia / Janakosha:

The all-in-one section caters to the needs of accessing knowledge based resources covering multiple subjects in Indian Languages. This page of Bharatavani which is available across all language domains presents a wide range of content from the fields of Environmental Science, Encyclopedia, Science & Technology, Art & Literature, Economics and much more.

Language Learning / Bhashakosha:

The Bhashakosha segment facilitates learning of Indian Languages through major language learning aids in English and the concerned languages. Grammar, phonology, syntax, dictionaries, glossaries etc – all that a learner needs to familiarize with a language are made available here.

Dictionaries & Glossaries / Shabdakosha:

The searchable and pdf based shabdakosha page presents to the users multilingual dictionaries and glossaries covering explanation of terminologies not just of regular usage but also from disciplines which include Agriculture, Music, Botany, Biology, Information Science, Philosophy, Psychology, Social Science, Climatology, Electronics, Economics, Linguistics, Mathematics, Geography and more in various Indian Languages.

Textbooks / Paathyapustakakosha:

Textbooks provided by national and major state textbooks authorities are made available through this page. Bharatavani, the hub of contents in Indian Languages, makes it easily available for language enthusiasts and students to access all the textbooks from pan India textbook production agencies.

Multimedia / Bahumaadhyamakosha:

To facilitate gathering knowledge about languages and learning the same interesting and engrossing, Bahumaadhyamakosha provides audio and video resources that enlighten the users with linguistic, cultural, social, ethnic and political aspects of various language communities.

IT Tools / Suchonapradyogikikosha:

The page hosts an exhaustive list of IT tools for Indian languages. Such tools are free and open source. It can be downloaded and used from the respective links.

Will the knowledge resources on the Bharatavani be made available for free access? How will the copyright of the hosted contents be protected?
  • Bharatavani is a new age portal with an objective of sharing knowledge with the public, particularly Indian citizens. So all the content that is available on Bharatavani portal is for free and fair usage for educational and research purposes.
  • The portal abides by the Copyright (Amendment) Act, 2012, which allows certain activities as non-infringement of copyrights under Section 52.
Can private institutions and individuals contribute to Bharatavani?
  • Yes. They can offer their originally created non-fiction/knowledge content for free public usage. Author attributions will be given for their contribution. Acceptance of such materials is subjected to the approval of the editorial committees.
  • Bharatavani will deploy online tools to enable content submissions in one's own language/mother tongue.
How will Bharatavani be made accessible for the Physically Challenged?
  • Bharatavani will follow the guidelines of Government of India from time to time in developing the portal, apart from following internationally accepted accessibility criteria.
  • Bharatavani will incorporate free Text to Speech utility for available languages so that the website content is read out for the visually challenged.
What happens if somebody steals the information from Bharatavani?

Bharatavani trusts the public in general. Any plagiarism, wrongful usage based out of Bharatavani content could be brought to our notice immediately. Bharatavani encourages usage of its content to learn and spread the languages, which help in preserving the rich linguistic and cultural heritage of India.

What is the administrative structure of Bharatavani?

Bharatavani is run by:

  1. A National Advisory Committee composed of eminent Linguists and knowledge experts.
  2. A Technology Advisory Committee to guide on the advancement of technological aspects of the web portal, mobile application and the language tools.
  3. Language Editorial Committees for content evaluation and recommendation.
Where is Bharatavani located?

Bharatavani is located inside the campus of CIIL, in Mysuru, Karnataka.

Postal address:
Central Institute of Indian Languages (CIIL)
Manasagangotri, Hunsur Road, Mysuru 570006
Tel: +91-821-2515820 (Director) | Reception/PABX: +91-821-2345000
Fax: +91-821-2515032 (Off)
Email: bharatavaniproject@gmail.com
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