एक वस्तु का दूसरे से पृथक होने का भाव प्रकट करने वाला कारक। जैसे- `पेड़ से पत्ता गिरा; `गंगा हिमालय से निकलती है`। हिंदी में यह कारक `से` विभक्ति द्वारा व्यक्त होता है। अर्थ की दृष्टि से पार्थक्य मानसिक और भौतिक दोनों प्रकार का हो सकता है। जैसे- 1. `पेड़ से पत्ता गिरा (भौतिक) 2. अशोक उन लोगों से घृणा करने लगा` (मानसिक)। जिस संज्ञा से पार्थक्य हो, उसका कारक अपादान होता है।
absolute universal
निरपेक्ष सार्वभौम
ऐसा सार्वभौम, जो सभी भाषाओं में बिना किसी अपवाद के सार्थक हो।
abstract noun
भाववाचक संज्ञा
वह `संज्ञा जो किसी प्राणी, वस्तु या कार्य-व्यापार के गुण-धर्म, अवस्था या भाव का बोध कराए, जैसे- सुंदरता`, `यौवन`, `दया`, `बचपन`, `आधुनिकीकरण`। ऐसी भाववाचक संज्ञा अमृर्त होते हुए भी गणनीय और अगणनीय दोनों प्रकार की हो सकती है : -अच्छाई- अच्छाइयाँ, बुराई- बुराइयाँ, इच्छा- इच्छाएँ, कामना- कामनाएँ (गणनीय), सुंदरता, यौवन, बुढापा (अगणनीय)।
acceptability
स्वीकार्यता
चॉम्सकी द्ववारा स्थापित व्याकरणिकता स भिन्न भाषा के प्रयोगों की ग्राह्यता अथवा अग्राह्यता की संकल्पना। जैसे- `मुझे हिंदी पता है` वाक्य हिंदी-भाषियों के लिए स्वीकार्य या ग्राह्य नहीं है।
चॉम्सकी ने रूपांतरण प्रजनक व्याकरण में स्वीकार्यता और व्याकरणिकता की संकल्पना में भेद किया है। उनके अनुसार कोई वाक्य व्याकरणिक रूप से शुद्ध होते हुए भी अस्वीकार्य हो सकता है। जैसे- `मैंने पानी खाया`।
इसी तरह यह वाक्य अव्याकरणिक होते हुए भी हिंदीभाषी क्षेत्रों में स्वीकार्य है - `आप भी मेरे सात चलो`। अस्वीकार्य वाक्यों को तारांक (*) से चिह्नित किया जाता है
accessibility hierarchy
अभिगम्यता अधिक्रम
संज्ञापदबंधों का भाषा में व्याकरणिक प्रकार्यों के आधार पर पूर्वापर अधिक्रम। यदि कोई रूपांतरण नियम इस अधिक्रम की किसी कोटि पर लागू होता है तो वह उससे पूर्व आने वाली सभी कोटियों पर भी लागू होगा। जैसे- अंग्रेजी में निम्नलिखित संज्ञा - पदबंध अभिगम्यता अधिक्रम :
1. The man, who came into the room, is my friend. (Subject Relativesation - कर्ता संबंधीकरण)
2. The book, which you read, is interesting (Direct Object Relativisation - मख्य कर्म संबंधीकरण)
3. The man, whom you gave the book to, is my neighbour (Indirect Object - गौण कर्म संबंधीकरण)
4. The knife, with which I cut the fruit, is very sharp. (Oblique object - अप्रत्यक्ष कर्म)
5. The monkey, whose tail was cut, is jumping. (Generative Object - प्रजनक कर्म)
इन वाक्यों के अनुरूप अंग्रेजी में संज्ञा पदबंध अभिगम्यता अधिक्रम इस प्रकार होगा -
कर्ता का संबंधीकरण (S.R)> मुख्य कर्म (D.O.)> कर्म (O.)> परोक्ष या अप्रत्यक्ष कर्म (O.O)> प्रजनक कर्म (Gen.O.)
ये सभी संज्ञा - पदबंध एक दूसरे से अधिक अधिगम्य हैं। इसक तीन नियम हैं -
1. भाषा में कर्ताका संबंधीकरण करन की व्यवस्था हेनी ही चाहिए।
2. इस अधिक्रम में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए।
3. यदि `संज्ञा पदबंध अभिगम्यता अधिक्रम` में निरंतर संज्ञा-पदबंध अभिगम्य होंगे तो ऊपर के सभी संज्ञा पदबंध भी अधिगम्य होने चाहिए।
हिंदी, बंगला, कश्मिरी जैसी कुछ भाषाओं में संज्ञा-पदबंध अभिगम्यता अधिक्रम संबंधी सार्वभौमिक नियमों के कुछ अपवाद भी हैं। जैसे-
1. सुबह से गया हुआ नौकर अभी तक नहीं आया। (कर्ता का संबंधीकरण)
2. मेरी खरीदी हुई किताब बड़ी रद्दी निकली।
3. * मेरी किताब दिया हुआ लड़का। (गौण कर्म का कृदंतीकरण नहीं होता)
4. * मेरा फल काटा हुआ चाकू। (परोक्ष कर्म का कृदंतीकरण नहीं होता)
इस प्रकार अभिगम्यताअधिक्रम सार्वभौमिक नियम नहीं है।
accusative case
कर्म कारक
वह कारक जो क्रिया के अर्थ की आकांक्षा को पूरा करे। जैसे- `मंजु ने रोटी खाई`। कर्म की अपेक्षा रखने वाली क्रिया सकर्मक कहलाती है। द्विकर्मक क्रियाओं का एक मुख्य कर्म होता है और दूसरा गौण कर्म। जैसे- `गोपाल ने मंजु को किताब दी` वाक्य में `मंजु` गौण कर्म है और `किताब` मुख्य कर्म। हिंदी में कर्म कारक को व्यक्त करने के लिए सामान्यतः `को` विभक्ति का प्रयोग होता है परंतु द्विकर्मक वाक्यों में मुख्य कर्म के साथ विभक्ति नहीं लगती।
action word
क्रियार्थक शब्द
किसी कार्य के करने या होने अथवा किसी स्थिति या प्रक्रिया के होने का बोध कराने वाला शब्द। जैसे- `चलना`, `फिरना`, `सोचना`, `आना`, `होना`, `पहुँचना`। क्रिया को ही क्रियार्थक शब्द कहत हैं।
active voice
कर्तृवाच्य
क्रिया-व्यापार में कर्ता के कर्तृत्व की प्रधानता प्रकट करने वाला वाच्य का एक प्रकार। जैसे- `गोपाल रोटी खाता है `।
कर्तृवाच्य वाक्य में क्रिया के तीन प्रयोग हो सकते हैं -
1. कर्तरि प्रयोग - इसमें क्रिया का व्याकरणिक रूप कर्ता के अनुरूप होता है। जैसे- 1. राधा रोटी खाती है। 2. राधा और विशाखा रोटी खाती हैं।
2. कर्मणि प्रयोग - इसमें क्रिया का व्याकरणिक रूप कर्म के अनुरूप होता है। जैसे-1. गोपाल ने चिट्ठी लिखी। 2. गोपाल ने चिट्ठियाँ लिखीं।
3. भावे प्रयोग - इसमें क्रिया का व्याकरणिकरूप नहीं बदलता। जैसे- 1. कृष्ण को गोकुल जाना है। 2. राधा को गोकुल जाना है।
(तु. passive voice - कर्मवाच्य)
additive clause
योगज उपवाक्य
वह गौण उपवाक्य जो मुख्य उपवाक्य के साथ जुड़ा तो होता है, किंतु जिससे मुख्य उपवाक्य का अर्थ परिवर्तित या सीमित नहिं होता। जैसे- `गोपाल मद्रास गया और उसने वहीं नौकरी कर ली`।
additive morpheme
योगज रूपिम
रूपविज्ञान के अंतर्गत वह रूपिम जो एक शब्द पद से दूसरे शब्द या पद की रचना करने में जोड़ा जाए। योगज रूपिमों के छह भेद हैं - मूलरूपिम, पूर्व प्रत्यय रूपिम, पर-प्रत्यय रूपिम मध्य-प्रत्यय रूपिम, अधिप्रत्यय रूपिम तथा पुनरूक्त रूपिम।