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भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान
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Definitional Dictionary of Cell Biology (English-Hindi)
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Α-amanitin
ऐल्फा - एमेनिटिन
ऐमेनिटा फैलॉयडीज़ (Amanita phalloides) नामक छत्रक से प्राप्त चक्रिक ऑक्टोपेष्टाइड आविष जो आर.एन.ए. पॉलिमरेज II के संदमन में तो सक्षम होता है किंतु सूत्रकणिकीय आर.एन.ए. संश्लेषण का संदमन नहीं कर पाता । इसका उपयोग उक्त प्रकिण्वों के अभिलक्षणन में किया जाता है ।

A-form of DNA
डी.एन.ए. का ए-रूप
निर्जलीकरण प्रक्रिया से उत्पन्न, द्विरज्जुक डी.एन.ए. का वैकल्पिक रूप जिसकी दक्षिणावर्ती कुंडलिनियों में प्रति आवर्त ग्यारह न्यूक्लिओटाइड होते हैं। सामान्यि डी.एन.ए. की प्रति आवर्त 10 न्यूक्लोओटाइडों वाली कुंडलिनियों की तुलना में डी.एन.ए. के ए. - रूप की कुंडलिनियाँ चौड़ी और छोटी होती हैं।

A-Site of ribosome
राइबोसोम का ए. - स्थल
ऐमीनोएसिल-टी-आर.एन.ए. को जोड़ने के लिए राइबोसोम की बड़ी वाली उपइकाई पर एक स्थल ।

A.D.P. (adenosine diphosphate)
ए.डी.पी. (ऐडेनोसिन डाइफॉस्फेट)
ऐडेनोसिन से बना एक राइबोन्यूक्लिओसाइड 5 डाइफॉस्फेट, जो कोशिका ऊर्जा-चक्र के अंतर्गत उच्च ऊर्जा आबंध द्वारा अपने साथ एक और फॉस्फेट समूह जुड़ने से ए.टी.पी. में परिवर्तित होता है ।

A.T.P. (adenosine triphosphate)
ए.टी.पी. (ऐडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट)
आर.एन.ए. और डी.एन.ए. में उपस्थित चार न्यूक्लिओटाइडों में से एक न्यूक्लिओटाइड जिसमें क्षारक के स्थान पर ऐडेनीन होता है । (जैसे डी-ए.टी.पी.) । यह कोशिकाओं में ऊर्जा संचय करने वाला प्रमुख प्रदान करता है । इसके अंत्य फॉस्फेट के जल - अपघटन से निकली ऊर्जा का उपयोग उपापचयी प्रक्रमों में होता है ।

A.U.G. Codon
ए.यू.जी. प्रकूट
पॉलीपेप्टाइड संश्लेषण प्रारंभ करने वाला कोडॉन जो प्रोटीन श्रृंखला में कहीं भी आने वाले मेथियोनीन ऐमीनो - अम्ल का कोडन करता है ।

Acatalasia
एकेटालेसिया
मनुष्य में कैटालेज एन्जाइम क वंशानुगत अभाव जो अलिंग सूत्र के अप्रभावी जीन के कारण होता है ।

Acentric
अकेंद्री
(गुणसूत्र) जिसमें सेन्ट्रोमियर (सूत्रकेंद्र) नहीं होता ।

Acentric fragment
अकेंद्री खंड
गुणसूत्र का ऐसा खंड जिसमें सूत्रकेंद्र न हो ।

Acetyl choline
ऐसीटिल कोलीन
तंत्रिका कोशिका द्वारा स्रवित एक ऐसा तंत्रि-रासायन जो अंतर्ग्रथन तथा तंत्रिपेशीय संधि पर विमोचित होता है । इसके अणु कोलीनेस्टरेज की क्रिया द्वारा तुरंत निम्नीकृत हो जाते हैं और इस प्रकार तंत्रिका फिर से ए आवेग को ग्रहण करने के लिए सक्षम हो जाती है ।


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