वे घनत्व-स्वतंत्र अजैविक कारक, जो पीड़क समष्टि में मर्त्यता पैदा करते हैं जिसका समष्टि के आकार या उसके घनत्व से संबंध नहीं होता। मौसम-परिवर्तन, अन्य प्राकृतिक आपदाएं या मानवीय कार्यकलाप, बड़े पैमाने पर होने वाले पर्यावरणीय रुपांतरण आदि अजीवीय कारक इस प्रकार की मर्त्यता का कारण बनते हैं।
Dental formula
दंत सूत्र
स्तनियों में ऊपरी तथा निले जबड़ो के दांतों का संख्या बताने का विधि, जिससे विभिन्न प्रकार के दांतों की कुल संख्या का पता चल जाता है। कृंतक, रदनक, अग्रचर्वणक और चर्वणक दांतों को इसी क्रम में रखते हुए मानव में दोनों जबड़ो के एक तकफ के दांतों का विन्यास इस प्रकार लिखा जाता हैः 2123/2123
Dentary
दंतिकास्थि
अधिकांश कशेरुकियों के निचले जबड़े में सामने स्थित एक युग्मित कलास्थि, जिसमें प्रायः दांत होते हैं। अस्थि-मीनों, सरीसृपों तथा पक्षियों के निचले जबड़े मे इसके अलावा और भी अस्थियां रहती हैं लेकिन स्तनियों के निचले जबड़े में यही एकमात्र अस्थि होती है।
Dentine
डेन्टीन
दांतों का भीतरी भाग बनाने वाला काफी कठोर पदार्थ, जो बाहर से इनेमल नामक कठोरतर पदार्थ से ढका रहता है। यह त्वचा के चर्म (डर्मिस) स्तर से उत्पन्न होता है जबकि इनेमल अधिचर्म (एपिडर्मिस) से निकलता है।
Deoxyribonucleic acid
डिऑक्सीराइबोन्यूक्लीक अम्ल
(दें- DNA)
Deposit
निक्षेप
पीड़कनाशी की ऐसी मात्रा, जो अनुप्रयोग के फौरन बाद जम जाती है।
Depressor
अवनमनी
1.अवनमन पेशीः शरीर की किसी रचना (जैसे निचले जबड़े) को नीचे की ओर गति देने वाली पेशी।
2. अवनमनी तंत्रिकाः शरीर के किसी अंग की सक्रियता को धीमा या कम कर देने वाली तंत्रिका; जैसे वेगस तंत्रिका की शाखा, हृद अवनमनी तंत्रिका जो हृदय की क्रिया को धीमा कर देती है।
Dermal toxicity
चर्मीय आविषालुता
किसी भी बाह्य पदार्थ का अविच्छिन्न त्वचा के मार्ग से शरीर में घुस जाने के फलस्वरुप होने वाली विषाक्तता। अधिकतर पीड़कनाशी अविच्छिन्न त्वचा के जरिए पूरी तरह या कुछ सीमा तक शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। बहुत से पीड़कनाशी जब तक कुछ विशेष विलायकों में घुले हुए न हों, तब तक जल्दी से अवशोषित नहीं होते लेकिन अनेक पीड़कनाशी ऐसे हैं जो सभी प्रकार के संरुपों में अविच्छिन्न त्वचा से घुस जाते हैं। उदा.- ऑर्गनोफॉस्फेट पीड़कनाशी।
Dermaptera
डर्माप्टेरा (चर्मपंखी गण)
प्ररुपी आदंशी मुखांग वाले लंबे काट जिनकी जीभिका (ligula) द्विपालिक (bilobed) होती है। अग्र पंख बहुत छोटे चर्मिल प्रवार (leathery tegmina) में रुपांतरित होते हैं जिनमें शिराएं नहीं होती। पश्चपंख अर्धधन्वाकार झिल्लीमय होते हैं जिनकी शिराएं अत्यधिक रुपांतरित और अरीयतः (radially) स्थित होती हैं।सामान्यतया अपंखी रुप पाए जाते हैं। गुल्फ त्रिखंडीय, लूम (cerci) असंधित और बहुत दृढ़ीकृत (sclerotize) चिमटियों में रुपांतरित होते हैं। अंडनिक्षेपक (ovipositor) लघुकृत या नहीं भी होता।कायांतरण थोड़ा या बिल्कुल नहीं होता। उदा.-कर्ण कीट (ईयरविग)।
Dermis
चर्म, डर्मिस
कशेरुकियों की द्विस्तरीय त्वचा का भीतरी स्तर, जो मध्यजनस्तर (मेसोडर्म) से उत्पन्न होता है। इस भाग में रुधिर वाहिकाएं, योजी ऊतक और तंत्रिकाओं के सिरे, आदि होते हैं।