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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सौंघाई
अधिकता।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंघा)

सौंघी
अच्छी।
वि.
स्त्री.
(हिं. सींघा)

सौंघी
ठीक, उचित।
वि.
स्त्री.
(हिं. सींघा)

सौंघी
सस्ती।
वि.
स्त्री.
(हिं. सींघा)

सौंचर
एक तरह का नमक।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सोंचर)

सौंज
वस्तु, सामग्री।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौज)
उ.- (क) याहू सौंज संचि नहिं राखी-१-१३०। (ख) यह सौंज लादि कै हरि कै पुर लै जाहि-१-३१०। (ग) षटरस सौंज बनाइ जसोदा-३९७। (घ) दै सब सौज अनत लोकपति निपट रंक की नाई-१० उ.-१३३।

सौंजा
आपस का समझौता।
संज्ञा
पुं.
(हिं. समझना)

सौंजा
गुप्त रूप से किया गया मंतव्य।
संज्ञा
पुं.
(हिं. समझना)

सौंजा
सौंपने की क्रिया या भाव।
संज्ञा
पुं.
(हिं. समझना)

सौंजाई
शोभा, पद और मान बढ़ानेवाली वस्तुएँ।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंज)
उ.- बल बिद्या धन धाम रूप गुन और सकल मिथ्या सौंजाई-१-१४।


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