स्थानीय स्वशासन वह शासन पद्धति जिसके अंतर्गत स्थानीय मामले स्थानीय जनता द्वारा निर्वाचित शासकीय इकाइयों द्वारा निष्पादित किए जाते हैं। इनका संगठन, अधिकार, कार्य और आय के स्रोत राज्य सरकार द्वारा निर्मित क़ानून से निर्धारित होते हैं। प्रायः इन इकाइयों को दो भागों में बाँटा जाता है : 1. ग्रामीण स्वशासन की इकाइयाँ, तथा 2. नगर स्वशासन की इकाइयाँ। भारत में, ग्रामीण स्वशासन की इकाइयों को पंचायती राज व्यवस्था, जो सामान्यतः त्रि-स्तरीय व्यवस्था है, कहा जाता है। पंचायती राज व्यवस्था में निम्नतम अंग पंचायत होती है और शिखर पर जिला परिषद्। इन दोनों के मध्य एक और इकाई होती है जिसे पंचायत समिति अथवा क्षेत्र समिति आदि नामों से जाना जाता है। नगरीय स्वशासन की इकाइयों में नगर महापालिका या नगर निगम और नगरपालिका प्रमुख हैं। स्वशासन की ये इकाइयाँ प्रायः स्थानीय सेवाओं और सुविधाओं जैसे, सड़कों की सफाई, रोशनी, जल का ग्रबंध, बीभारियों की रोक-थाम आदि का प्रबंध करती हैं।
Locus standi
अधि स्थिति यह एक विधिक पद है। इसका अर्थ है किसी मामले में न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने और अपना संतव्य प्रस्तुत करने का अधिकार।
Lok Adalat
लोक अदालत विधि द्वारा स्थापित न्यायालयों से हटकर एक नवीन न्याय-व्यवस्था जिसमें सामान्य प्रक्रियाओं को बहुत संक्षिप्त कर न्यायाधीश किसी एक निश्चित तिथि पर अपनी बैठक करते हैं जहाँ वादी, प्रतिवादी अपना वाद सीधे तत्काल निर्णय के लिए स्वयं अथवा वकील के माध्यम से प्रेषित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में धन व समय की बचत होती है और यह जनसुविधा के लिए लाभकारी भी है। इसका प्रचलन पिछले कुछ वर्षों से ही भारत के अनेक भागों में हुआ है।
Lok Sabha
लोक सभा भारतीय संसद का निचला सदन जिसमें 545 निर्वाचित सदस्य होते हैं जिनका निर्वाचन पाँच वर्ष के लिए 18 वर्षीय नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इसके अधिकार और शक्तियाँ संसद के दूसरे सदन अर्थात् राज्य सभा से बहुत अधिक हैं। विधि-निर्माण और वित्तीय व्यवस्था में इसी का निर्णय अंतिम होता है। कार्यपालिका अर्थात् मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति ही उत्तरदायी होता है।
Machiavellism
मैक्यावलीवाद 16 वीं शताब्दी के इतालवी राजनीतिज्ञ मैक्यावली के प्रसिद्ध ग्रंथ `द प्रिंस` में व्यक्त विचारों को हेय दृष्टि से मैक्यावलीवाद कहा जाता है। इनका सारांश यह है कि राजा को राज्य के संरक्षण और स्थायित्व के लिए कोई भी उपाय अपनाना, जिनमें छल, कपट, विश्वासघात भी शामिल हैं, अनुचित नहीं होगा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह धर्म और नैतिकता के सामान्य सिद्धांतों की भी उपेक्षा कर सकता है।
Macht politik ( = power politics)
सत्तार्थ नीति, शक्ति नीति ऐसी राजनीति जिसका केन्द्रबिन्दु शक्ति की प्राप्ति, शक्ति का प्रसार और शक्ति को दृढ़ करना होता है और जिसमें सार्वजनिक हित तथा जनमत गौण होकर रह जाते हैं। इस प्रकार की राजनीति में उन साधनों का उपयोग भी अनुचित नहीं माना जाता जिन्हें मैक्यावलीय साधन कहते हैं। परिणामस्वरूप राष्ट्रों, समूहों, दलों, गुटों और व्यक्तियों में शक्ति के लिए निरंतर संघर्ष बना रहता है।
Magna Carta
मेग्रा कार्टा सन् 1215 में अंग्रेज सम्राट जॉन द्वारा अपने सामंतों के दबाव के फलस्वरूप स्वीकृत एक घोषणापत्र जिसे संवैधानिक शासन की दिशा में प्रथम चरण कहा जा सकता है और जिसका लक्ष्य सम्राट की स्वेच्छाचारिता पर प्रतिबंध लगाना तथा प्रजा के अधिकारों को सुरक्षित करना था। इस घोषणा पत्र में 37 धाराएँ थीं जिनमें किसी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना कारावास में न रखना, नागरिकों के घरों में बलात् सैनिकों को न ठहराया जाना आदि प्रमुख थीं।
Magnum Concilium
मेग्नम काउन्सिलियम इंग्लैंड में नार्मन राजाओं के समय अर्थात् ग्यारहवीं शताब्दी में सामंतों, धर्माधिकारियों एवं अन्य राजकीय विश्वासपात्र राजघराने के विशिष्ट सदस्यों की सभा जिसकी सहायता व परामर्श से राजा शासन करता था। मुख्यतः यह राजा को विधि-निर्माण और कराधान में परामर्श देती थी और न्याय-प्रशासन की भी सर्वोच्च निकाय थी। वस्तुतः इस परिषद को वर्तमानकालीन संसद मंत्रिमंडल प्रिवीकाउंसिल और उंच्च न्यायालय की जननी कहा जा सकता है।
Majority government
बहुमत सरकार जब किसी राजनैतिक दल को संसद के निचले सदन में आधे से अधिक स्थान प्राप्त हो जाते हैं तो उस दल की सरकार को `बहुमत सरकार` कहते हैं।
Majority rule
बहुमत शासन वह व्यवस्था जिसके अनुसार बहुमत का निर्णय ही मान्य होता है।