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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सौं
से, द्वारा।
प्रत्य.
(प्र. सुंतो)
उ.- (क) जज्ञ-भाग नहिं लियौ हेत सौं- १-२५। (ख) गजराज ग्राह सौं अटक्थौ-१-३२। (ग) प्रेम पतंग दीप सौं- १-५५। (घ) बिमुखनि सौं रति जोरत दिन-प्रति- १-४९। (ङ) भावी काहूँ सौ न टरै-१-२६४। (च) कुँवरि सौं कहति वृषभानु-धरनी-६९८।

सौंकारा
सबेरा, प्रात:काल।
संज्ञा
पुं.
(सं. सकाल)

सौंकरै
सबेरे।
क्रि. वि.
(हिं. सौंकारा)

सौंकरै
नियत समय से पूर्व ही।
क्रि. वि.
(हिं. सौंकारा)

सौंघा
अच्छा।
वि.
(हिं. महँगा का विप.)

सौंघा
वाजिब, ठीक।
वि.
(हिं. महँगा का विप.)

सौंघा
सस्ता।
वि.
(हिं. महँगा का विप.)

सौंघाई
उत्तमता।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंघा)

सौंघाई
औचित्य।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंघा)

सौंघाई
सस्तापन।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंघा)


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