विधिक दायित्व विधि द्वारा विहित ऐसा दायित्व जिसका पालन संबंधित पक्ष के लिए आवश्यक होता है तथा जिसकी अवहेलना करने पर क़ानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Legal recongition
विधिक मान्यता किसी राज्य विशेष द्वारा किसी नए राज्य अथवा शासन के अस्तित्व को स्वीकृति दिया जाना जो विधिवत् घोषणा करके दी जा सकती है अथवा राज्य के आचरण में भी निहित हो सकती है। तदुपरांत नवीन राज्य अथवा शासन मान्यता देने वाले राज्य की दृष्टि से पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व प्राप्त कर लेता है और दोनों राज्यों के बीच औपचारिक संबंध भी स्थापित किए जा सकते हैं।
Legal remedy
विधिक उपाय, क़ानूनी उपचार अधिकारों के हनन अथवा किसी अन्य प्रकार की हानि की पूर्ति के लिए अथवा किसी वास्तविक या संभावित समस्या के निराकरण के लिए की जानेवाली क़ानूनी कार्रवाई।
Legal right
क़ानूनी अधिकार, विधिक अधिकार किसी राज्य में स्थापित क़ानून के अंतर्गत प्राप्त अधिकार जिनका हनन होने पर व्यक्ति विधिक उपचार का आश्रय ले सकता है।
Legal safeguards
विधिक संरक्षण, विधिक रक्षोपाय किसी मामले या स्थिति में संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए क़ानून द्वारा विहित निरोधात्मक अथवा संरक्षणार्थ प्रावधान।
Legal sovereignty
विधिक संप्रभुता, विधिक प्रभुसत्ता किसी राज्य की वह सत्ता अथवा शक्ति जिसे राज्य में सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो, जो राज्य में सभी क़ानूनों का स्रोत हो, जिसके ऊपर कोई सीमा या मर्यादा न हो और जिसके आदेशों का नागरिक स्वभावतः पालन करते हों। यह सत्ता अनन्य, सर्वाधिकार-संपन्न, अदेय एवं अविभाज्य होती है। यह विवादास्पद हो सकता है किसी राज्य में इसका निवास कहाँ है।
Legate
पोप दूत, लीगेट 1. पोपदूत : ईसाई धर्म के प्रधान अर्थात् पोप का एक विशेष प्रतिनिधि जिसे राजदूत के समकक्ष माना जाता है और जो विशेष अवसरों पर पोप का प्रतिनिधित्व भी करता है। 2. लीगेट : राजदूत, किसी राज्य का प्रतिनिधि।
Legislation
विधान, विधि-निर्माण 1. सक्षम विधि-निकायों द्वारा बनाए गए क़ानून। 2. विधियों के निर्माण का कार्य।
Legislative Assembly
विधान सभा यह सरकार का विधान निर्मात्री अंग है, जिसका निर्वाचन जनता द्वारा होता है। भारत के विभिन्न राज्यों के विधान मंडलों के दो सदनों में से एक को विधान सभा दूसरे को विधान परिषद कहते हैं। परन्तु विधान परिषद की व्यवस्था कुछ ही राज्यों में है। शेष में केवल विधान सभा ही एकल सदन विधान मंडल है। इसके सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। सदस्यों में से एक को अध्यक्ष और किसी दूसरे को उपाध्यक्ष चुना जाता है। विधान सभा का कार्यकाल सामान्यतः प्रथम अधिवेशेन की तिथि से 7 वर्ष का होता है। विधान सभा की सदस्यता के लिए प्रत्येक सदस्य की आयु 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए तथा उसका भारत का नागरिक होना भी आवश्यक है। इसके मुख्य अधिकार है :- (1) क़ानून बनाना, (2) कर लगाना व सरकारी व्यय के लिए अनुमति देना, और (3) सरकार पर नियंत्रण रखना और उसमें विश्वास न रहने पर उसे अपदस्थ कर देना।
Legislative Council
विधान परिषद् भारत के जिन राज्यों में द्विसदनी विधान मंडल हैं जैसे, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में, उनके उच्च सदन को विधान परिषद् कहते हैं। इस सदन के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा न होकर, विधान सभा के सदस्यों, नगरपालिकाओं, शिक्षकों और स्नातकों द्वारा होता हैं और इसमें 1/12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष होता है परंतु पूरा सदन विघटित नहीं होता। इसमें 1/3 सदस्य प्रति दो वर्ष के प्रश्चात् पद-निवृत्त होते हैं जिनकी रिक्तियाँ निर्वाचन द्वारा भर दी जाती हैं। विधान परिषद् विधान सभा की अपेक्षा बहुत निर्बल है। अनेक विचारक इसका उन्मूलन कर दिए जाने के पक्ष में हैं।