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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सोहोई
शोभित होती है।
क्रि.अ.
(हिं. सोहाना)
उ. बाँधत बंदन-माल, साथियै द्वारै धुजा सुहाई-सारा. ३९५।

सोहोई
भला या अच्छा लगता है।
क्रि.अ.
(हिं. सोहाना)
उ.- सूरदास प्रभु बिनु ब्रज ऎसो, एको पल न सोहाई-२५३८।

सोहोई
सुंदर, सुहावनी।
वि.
उ.- सरद सोहाई आई रात।

सोहाए
अच्छा या भला लगता है।
क्रि.अ.
(हिं. सोहाना)
उ.- कहा करहि, कहाँ जाइ सखी री हरि बिनु कछु न सोहाए-२९९६।

सोहाग
सौभाग्य।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सुहाग)
उ.- राज-सोहाग बढ़ो सबै कहा निहोरो मोहिं-१० उ.-८।

सोहागा
एक खनिज।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सुहागा)

सोहागिन, सोहागिनि, सोहागिनी, सौहागिल
सधवा या सौभाग्यवती स्त्री।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सुहागिन)
उ.- ता तीरथ-तप के फल लैके, स्याम सोहागिनि कीन्ही-६५६।

सोहागु
सौभाग्य।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सुहाग)
उ.- अबलन जोग सिखावन आए चेरिहिं चपरि सोहागु-३०९५।

सोहात
अच्छा या भला लगता है, रुचता है।
क्रि.स.
(हिं. सोहाना)
उ.- (क) सबन इहै सुहात-२६८१। (ख) कछु न सुहात दिवस अरु राती-२८८२। (ग)नहिंन सोहात कछु हरि, तुम बिनु-३४२३। (घ) स्रवन कछू न सोहात-३४२६।

सोहाता
सुंदर, सुहावना।
वि.
(हिं. सोहना)


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