द्वैध डी.एन.ए. का वह रज्जुक जिसका न्यूक्लिओटाइड अनुक्रम दूत आर.एन.ए. के समान हो सिवाए उसके U के स्थान पर T होने के।
Co-dominance
सहप्रभाविता
विषमयुग्मज में किसी विशिष्ट जीन युग्म के दोनों विकल्पियों के पूर्णतः अभिव्यक्त होने की स्थिति। यह विकल्पी या इनके द्वारा निर्धारित विशेषक सहप्रभावी होते हैं। उदाहरणतः ए.बी.ओ. रुधिर वर्ग तंत्र में।
Codon
प्रकूट
तीन न्यूक्लिओटाइड-क्षारकों को ऐसा अनुक्रम जो किसी विशिष्ट ऐमीनो अम्ल को अभिव्यक्त करता है अथवा किसी पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला संश्लेषण के समापन का संकेत देता है।
Coelenterata
सीलेन्टेरेटा
अकशेरुकियों का एक संघ जिसमें हाइड्रा, जेलीफिश, समुद्री ऐनीमोन, प्रवाल आदि जलीय प्राणी आते हैं। अरीय सममिति, आंतरगुहा, दो परतों वाली देहभित्ति और स्पर्शकों से घिरे मुँह का होना किंतु गुदा का न होना, इन प्राणियों की विशेषताएँ हैं।
Coelenteron
सीलेन्टेरोन, आंतरगुहा
सीलेन्टेरेटों में केंद्रीय जठर-वाहक गुहा, जो बाहर को एक ही रंध्र से खुलती है। यह रंध्र आहार के अंतर्ग्रहण और अपचे पदार्थों के विसर्जन का काम करता है।
Coelom (coelome)
प्रगुहा, सीलोम
त्रिकोरकी (ट्रिप्लोब्लास्टिक) प्राणियों की देहगुहा, जो चारों तरफ से मध्यजनस्तर (मीजोडर्म) या पर्युदर्या (पेरिटोनियम) कला से ढकी रहती है। अन्य शरीर गुहाओं से भेद करने के लिए इस तरह की देहगुहा को प्रगुहा या सीलोम कहते हैं। भ्रूणों में प्रगुहा दो प्रकार से बनती है : (1) आंत्रगुहा से निकले हुए कोष्ठों से बनने वाली आंत्रप्रगुहा यानी ऐन्टेरोसील और (2) मध्यजनस्तर के द्विभाजित होने से बनने वाली दीर्णप्रगुहा यानी साइजोसील।
Coenocyte
संकोशिका
भित्ति विभाजन के बिना केंद्रक-विभाजन की पुनरावृत्ति के फलस्वरुप बनने वाली कोशिका की बहुकेंद्रकी अवस्था।
Co-enzyme
सह-एन्ज़ाइम
किसी एन्ज़ाइम या एन्ज़ाइम तंत्र के द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रिया में अनिवार्य रुप से भाग लेने वाला कार्बनिक यौगिक, जो इस प्रक्रिया में स्वयं व्यय नहीं होता।
Cold blooded
असमतापी, अनियततापी
(दे. Poikilothermal)
Coleoptera
कोलियोप्टेरा (वर्मपंखी गण)
सूक्ष्म से लेकर बड़े आकार तक के कीट जिनके अग्रपंख श्रृंगीय या चर्मिल प्रवर्म (elytra) में रुपांतरित होते हैं और जो कीट के बैठने की स्थिति में मिल जाते हैं तथा जिसके फलस्वरुप एक सीधी मध्य पृष्टीय सीवन ( suture) बन जाती है। पश्चपंख झिल्लीमय और प्रवर्मो के नीचे वलित रहते हैं तथा लघूकृत या अनुपस्थित होते हैं तथा अग्रवक्ष बड़ा और गतिशील, मध्यवक्ष बहुत लघूकृत। इनकी विशेषताएँ हैं -पूर्ण कायांतरण; डिंभक कैम्पोडियारुपी अथवा क्रॉस रुपी, बिरले ही अपादी होते हैं, कोशित अक्रियचिबुक (adecticous) और अबद्ध, मुखांग आंदश(bitting) प्रकार के होते हैं। उदा. भृंग।