अंतर्राष्ट्रीय शिष्टाचार राज्यों के परस्परिक संबंधों में आवरण के ऐसे नियम जिनका पालन क़ानूनी रूप से बाध्यकारी न होने पर भी सुविधा अथवा नैतिकता के कारण प्रायः किया जाता है। उदाहरणार्थ, प्रत्यर्पण संधि न होने पर भी एक राज्य का किसी दूसरे राज्य के अपराधी को प्रत्यार्पित करने के लिए सहमत हो जाना।
International community
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय राज्यों का समूह जो सामान्य हितों एवं उद्देश्यों से इस प्रकार एक-दूसरे के साथ संबद्ध हो गए हैं कि उनका यह समूह एक अलग इकाई अर्थात् समुदाय का स्वरूप धारण कर गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आज 160 से अधिक स्वतंत्र एवं संप्रभु राज्य सम्मिलित हैं।
International Court of Justice
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय इस न्यायालय की स्थापना 1946 में की गई थी। वास्तव में यह प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत स्थायी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का रूपांतरण है। वह न्यायालय संयुक्त राष्ट्र के 6 मुख्य अंगों में से एक है। इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका निर्वाचन सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा किया जाता है। न्यायाधीश विभिन्न देशों से चुने जाते हैं और किसी भी देश का एक से अधिक न्यायाधीश नहीं हो सकता। प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल 9 वर्ष होता है। इस न्यायालय का मुख्यालय हेग में है। इस न्यायालय का मुख्य कार्य संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों के पारस्परिक विवादों का निर्णय करना है। इसका परमर्शदात्री क्षेत्राधिकार स्वीकार करना राज्यों की इच्छा पर निर्भर करता है। साम्यवादी देशों में से किसी ने भी इसका क्षेत्राधिकार स्वीकार नहीं किया है। एक धारा के अंतर्गत राज्य इसका क्षेत्राधिकार निर्धारित विषयों से संबंधित मामलों में निर्णय के लिए अनिवार्य रूप से स्वीकार करने के लिए अपने को वचनबद्ध कर सकते हैं।
International crime
अंतर्राष्ट्रीय अपराध अंतर्राष्ट्रीय विधि के विरूद्ध किया गया कृत्य जैसे, समुद्री डाका, नशीली वस्तुओं का अवैध व्यापार, दास-व्यापार इत्यादि।
International custom
अंतर्राष्ट्रीय प्रथा, अंतर्राष्ट्रीय परंपरा इसे अंतर्राष्ट्रीय विधि का मूल स्रोत माना जाता है। इसका अर्थ है राज्यों के संबंधो को सतत् रूप से नियमित करने वाले आचरण के ऐसे नियम जो लिपिबद्ध न होते हुए भी बाध्यकारी माने जाते हैं। इनका आधार दीर्घ और सतत् व्यवहार और इनके प्रति राज्यों की मौन सहमति है।
Internationalisation
अंतर्राष्ट्रीयकरण 1. किसी संधि के अंतर्गत विश्व के किसी क्षेत्र, भूभाग या जलमार्ग का सभी राज्यों द्वारा प्रयोग किए जा सकने की स्थिति जैसे स्वेज नहर, पनामा नहर, अंटार्कटिका, अंतरिक्ष आदि। 2. किसी राष्ट्रीय विवाद अथवा स्थिति अथवा समस्या का अन्य राष्ट्रों की अभिरुचि अथवा हस्तक्षेप के कारण अंतर्राष्ट्रीय रूप धारण कर लेना।
Internationalism
अंतर्राष्ट्रवाद वह सिद्धांत जो स्थितियों और समस्याओं को संकीर्ण राष्ट्रीय हित अथवा उद्देश्य अथवा नीति की दृष्टि से न देखकर उनके प्रति व्यापक विश्वव्यापी अथवा संपूर्ण मानवीय हितों का दृष्टिकोण अपनाता हो।
International Labour Organisation
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन 1920 में स्थापित यह संस्था अब संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों में से एक है। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिक कल्याण संबंधी विधि-संहिताओं के-प्रारूप तैयार करना और राष्ट्रीय सरकारों द्वारा उनके अनुसमर्थन का प्रयास करना है। इस कारण इसे विश्व के श्रमिकों की संसद की संज्ञा दी गई है। इसके प्रमुख अंगों में एक सामान्य सभा और एक सचिवालय हैं। सामान्य सभा की बैठक वर्ष में एक बार होती है जिसमें प्रत्येक सदस्य राष्ट्र अपने चार प्रतिनिधि भेज सकता है जिसमें दो सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, एक श्रमिकों द्वारा तथा एक मालिकों द्वारा।
International law
अंतर्राष्ट्रीय क़ानून, अंतर्राष्ट्रीय विधि सभ्य राष्ट्रों के पारस्परिक संबंधों और उनके अधिकारों आदि से संबंधित नियमावली। ओपेनहाइम ने अंतर्राष्ट्रीय विधि की परिभाषा करते हुए लिखा है कि `अंतर्राष्ट्रीय विधि प्रथागत एवं संधिगत नियमों के उस समूह को कहते है जिन्हें सभ्य राष्ट्र अपने पारस्परिक संबंधों में बाध्यकारी मानते हैं।` परंतु वर्तमानकाल में ओपेनहाइम की यह परिभाषा कालातीत हो गई है। अब अंतर्राष्ट्रीय विधि केवल यूरोपीय ईसाई राज्यों तक सीमित न रहकर विश्वव्यापी विधि बन गई है। इसके विषय केवल राज्य नहीं हैं बल्कि कुछ सीमा तक व्यक्ति और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी माने जाते हैं। अतः वर्तमान काल में अंतर्राष्ट्रीय विधि को संपूर्ण मानव जाति की विधि अथवा विश्व विधि के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य मानव कल्याण अथवा मानव-उत्यान है। विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय विधि से भिन्नता स्थापित करने के लिए (जिसका उल्लेख हम यथास्थान करेंगे) इसे `सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि` अथवा `सामान्य अंतर्राष्ट्रीय विधि` अथवा `सर्वदेशीय अंतर्राष्ट्रीय विधि` भी कहा जाता है। दे. particular international law भी।
International Law Association
अंतर्राष्ट्रीय विधि संघ अंतर्राष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों का एक गैर सरकारी संघ जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और विकास के लिए विविध विषयों पर प्रस्तावित विधि के प्रारूप तैयार करना है। इसका मुख्यालय लंदन में है। इसकी राष्ट्रीय शाखाएँ विश्व के अनेक देशों में स्थापित हैं। इसके सदस्यों में अंतर्राष्ट्रीय विधि के विद्वान, विधिशास्त्री, न्यायाधीश आदि होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और उत्तरोत्तर विकास में इस संघ के योगदान की सर्वथा सराहना की गई है।