बरतन में हो जानेवाला महीन छेद जिसमें से पानी आदि द्रव टपक-टपक कर बह जाते हैं।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. स्रवण)
सोलंक
क्षत्रियों का एक प्राचीन राजवंश जिसने बहुत समय तक गुजरात में राज्य किया था।
संज्ञा
पुं.
(देश.)
सोलह
दस से छह अधिक की संख्या।
संज्ञा
पुं.
(सं. षोडश, प्रा. सोलस, सोरह)
सोलह सिंगार
स्त्रियों के श्रृंगार के सौलह अंग जिनसे श्रृंगार पूरा समझा जाता है- उबटन लगाना, स्नान करना, स्वच्छ बस्त्र धारण करना, केश-सज्जा, नेत्र आँजना, माँग भरना, महावर लगाना, भाल पर तिलक या बिंदी लगाना,चिबुक पर तिल बनाना, मेंहदी लगाना, सुगंध लगाना, आभूषण पहनना, फूलमाला पहनना, मिस्सी लगाना, पान खाना और होंठ रँगना।