उ.- (क) मृग मूसी नैननि की सोभा जाति न गुप्त करी-९-६३। (ख) स्याम उलटे परे देखे, बढ़ी सोभा-लहरि-१०-६७। (ग) सोभा मेरे स्यामहिं पर सोहै-१०-१५८। (घ) तदपि सूर तरि सकीं न सोभा, रहीं प्रेम पचि हारि-६२८।
सोभा
सजावट।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. शोभा)
उ.- बरनौं कहा सदन की सोभा बैकुंठहूँ तैं राजै री-१०-१३९।
सोभा
किसी की सुंदरता बढ़ानेवाली कोई वस्तु, बात या विशेषता।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. शोभा)
उ.- कुबिजा भई स्याम-रँग राती तातैं सोभा पाई-१-६३।
सोभा
मान-सम्मान, आदर।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. शोभा)
उ.- (क) गनिकासुत सोभा नहिं पावत जाके कुल कोऊ न पिता री-१-३४। (ख) पति कौं ब्रत जो धरै तिय, सो सोभा पावै-२-९।