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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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school of monism
एकत्ववादी संप्रदाय, अद्वैतवादी सिद्धांत दे. Monistic theory.

sea bed treaty
समुद्र तल संधि इस संधि का संपादन सन् 1971 में हुआ था । इसके अंतर्गत यह व्यवस्था की गई कि समदुर तल में नाभिकीय अस्त्रों का रखना वर्जित होगा । इसका पूरा नाम महासमुद्र और समुद्रतल पर नाभिकीय एवं अन्य जन - संहारक अस्त्रों को रखने पर निषएधकारी संधि है । इस संधि पर 10 फरवरी, 1971 से राज्यों ने हस्ताक्षर करना प्रारंभ किया । इस संधि के अंतर्गत कोई भी राज्य महासमुद्र तल में नाभिकीय अस्तर नहीं रख सकेगा । परंतु 12 मील के भूभागीय समुद्र तल के क्षेत्र में यह प्रतिबंध तटवर्ती राज्य पर लागू नहीं होगा ।

Secretary - General
महासचिव संयुक्त राष्ट्र संघ के छह मुख्य अंगों मे से एक अंग सचिवालय है । सचिवालय का प्रधान महासचिव कहलाता है । महासचिव की नियुक्त सुरक्षा परिषद की संस्तुति पर महासभा द्वारा पाँच वर्ष के लिए की जाती है । चार्टर के अनुसार महासचिव संयुक्त राष्र संध का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होता है । वह महासभा, सुरक्षा परिषद्, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद और न्यास परिषद - सभी के मुख्य सचिव के रूप मे कार्य करता है और संगठन के कार्यसंबदी वार्षिक विवरण महासभा को प्रेषित करता है । महासचिव की स्थिति को महत्वपूर्ण बनाने में चार्टर का अनुच्छेद 99 निर्णायक सिद्ध हुआ है । इसमें कहा गया है कि महासचिव सुरक्षा परिषद् का ध्यान किसी भी ऐसे मामले की र आकर्षित कर सकता है जो उसके मतानुसार अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए संकटकारी हो । वास्तव में महासचिव की स्थिति बहुत कुछ उसेक अपने व्यक्तित्व और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है । नार्वे के ट्रिग्वेली संयुक्त राषअट्र संघ के प्रथम महासचिव चुने गए थे । इनके पश्चात क्रमशः डाग हैमरशोल्ड ऊ थान्त, कुर्त वाल्दहीम, पेरेज दि कुइयार और वर्तमान में मिस्र के बुतरस घाली इस पद पर विद्यामान हैं ।

secret clause
गुप्त खंड दो अथवा अधइक राज्यों के मध्य संपन्न किसी अंतर्राष्ट्रीय समझौते अथवा संधि का वह खंड जो पारस्परिक सुरक्षा अथवा किसी अन्य विशेष कारण, से गोपनीय या प्रकाशित रखा जाता है । संधिकर्त्ता राज्य इस प्रकार के खंड का उस समझौते अथवा संधि के अन्य खंडों के समान ही अनुपालन करने के लिए बाध्य होते हैं । अवसर आने पर संबंध राज्यों द्वारा गुप्त खंड का प्रकाशन किया जा सकता है ।

secret diplomacy
गुप्त राजनय विभिन्न राज्यों द्वारा पारस्परिक स्वाथों की पूर्ति के लिए गोपनीय अथवा प्रच्छन्न रूप से अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं अथवा धि - वार्ताओं का संचालन करने की कला अथवा पद्धति । इस गुप्त कला अथवा पद्धति के अंतर्गत संबंध राज्यों द्वारा विभिन्न प्रकार की छलपूर्ण अथवा कपटपूर्ण प्रक्रियाओं, युक्तियों एवं कार्यपद्धतियों का प्रयोग भी किया जाता है । राष्ट्रपति बुश के शासनकाल में यह आरोप लगाया गया कि सं.रा. अमेरिका ने लेबनान से अमरीकी बंधकों को मुक्त कराने के लिए ईरान को गुप्त रूप से शस्त्रास्तर बेचे थे और यह धन निकारागुआ में स्थापित सरकार के विरूद्द कोन्ट्रा विद्रोहकारियों को सहायतार्थ भेजा गया था । इसे `यू. एस. ईरान कोन्ट्र डील` कहा जाता है ।

sector principle
क्षेत्रक सिद्धांत अभिग्रहण के सातत्य और समीपता सिद्धांतों के अलावा एक तीसरा सिद्धांत जिसके द्वारा उत्तरी तथा दक्षिणा ध्रुवों के जनशून्य हिमाच्छादित प्रदेशों में विभिन्न राज्य अपनी स्थलीय सीमा और तटीस आधार रेखाओं से भूमंडल पर उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रवों तक खींची गई रेखाओं के भीतर ने वाले क्षेत्रकों पर, चाहे वह समुद्र हो अथवा भूमि अपनी प्रभुसत्ता का दावा करते हैं । इस दावे का आधार क्षेत्रक सिद्धआंत कहा जाता है । परंतु यह अंतर्राष्ट्रीय विदि में कोई मान्यता प्राप्त सिद्धांत कहा जाता है । परंतु यह अंतर्राष्ट्रीय विधि में कोई मान्यता प्राप्त सिद्धांत नहीं है । सोवियत संघ, वार्वे कनाडा और सं.रा. अमेरिका ने उत्ततरी ध्रुव के और चिली, अर्जेटांइना, ग्रेट ब्रिटेन ने दक्षिणी ध्रुव के वुभिन्न क्षेत्रकों (sectors) पर अपनी प्रभुस्त्ता का दावा किया है ।

Security Council
सुरक्षा परिषद सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र संघ के छह प्रधान अंगों में से एक है । वास्तव में इसे इन प्रधान अंगों में भी सर्वप्रधान कहा जा सकता है क्योंकि चार्टर के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का मूल दायित्व इसी अंग पर है । वस्तुतः सुरक्षा परिषद को एक प्रकार से संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यकारिणी परिषद कहा जा सकता है । सुरक्षा परिषद् मे इस समय कुल पंद्रह सदस्य हैं जिनमें रूप, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका इसके स्थायी सदस्य हैं । शेष दस सदस्य - राज्य दो वर्ष की अवधि के लिए महासभा द्वारा चुने जाते हैं । सन् 1965 से पहले इसकी सदस्य संख्या ग्यारह थी जिनमें पाँच स्थायी सदस्य और छह अस्थायी सदस्य होते थे । सुरक्षा परिषद की कार्यविधि की मुख्य विशेषता यह है कि इसके द्वारा कोईभी निर्मय पाँचों स्थायी सदस्य - देशओं की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता अर्थात्यदि पाँचों स्थायी सदस्यों में से कोई भी एक सदस्य किसी निर्णय के विरूद्ध मत देता है तब वह उसके द्वारा निर्णय का निषेध माना जाएगा और इसे उसका निषएधाधिकार (veto) कहा जाता है । यह उल्लेखनीय है कि निषेधाधिकार प्रक्रियात्मक प्रश्नों पर लागू नहीं होता । परंतु कोई प्रश्न प्रक्रायत्मक है अथवा नहीं, इसका निर्णय करने के लिए निषेधाधिकार का प्रयोग किया जा सकता है । किसी स्थायी सदस्य - राज्य द्वारा मतदान में भाग न लेना उसका निषएधाधिकार का प्रयोग नहीं माना जाता ।

security pact
सुरक्षा अनुबंद दो या अधिक राज्यों के बीच ऐसी अंतर्राष्ट्रीय संधि (या समझौता) जो उन राज्यों पर किसी शुत्रु राज्य द्वारा सशस्त्र आक्रमण किए जाने की स्थिति में, उन राज्यों को एक - दूसरे की सैनिक अन्यि प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए वचनब्दध करती है । बहुधा ऐसे अनेक समझौते क्षेत्रीय स्त्र पर हुए हैं जैसे नाटो, सीटो, वारसा संधि आदि । अंतर्राष्ट्रीय विधि की दृष्टि से ये सामूहिक (आत्म) रक्षा के संगठनात्मक स्वरूप हैं ।

servitude
सुविधाभार यह व्यवस्था मूलतः एक साम्राज्यवादी व्यवस्था थी जिसके अनुसार यूरोपीय साम्राज्यावादी राज्य एशियाई - अफ्रीका राज्यों में स्थानीय शसकों से संधियों अथवा समझौतों के द्वारा अपने नागरिकों तथा व्यापारियों के लिए विशेष सुविधाएँ या रियायतें प्राप्त कर लेते थे । इस प्रकार की सुविधाओं या रियायतों को सुविधाभार कहा जाता था । ये सुविधाएँ या रियायतें प्रायः स्थानीय स्वतंत्रता और क्षेत्राधिकार का खंडन करती थीं जैसे विदेशी नागरिकों का स्थआनीय नायायलय के क्षेत्राधिकार से उन्मुक्त होना अथवा स्थानीय जल क्षेत्रों और भूभागीय समुद्र में विदेशियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाना अथवा विदेशी सेनाओं को पारगमन का अधिकार दिया जाना अथवा स्थानीय प्रदेश के किसी भाग के किलेबंदी करने पर प्रतिबंध लगाना आदि । यह उलेलेखनीय है कि अपनिवेशवाद के पतन के साथ इस प्रकार के संधि - मसझौते समाप्त हो गए हैं ।

sources of international law
अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोत अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्त्रोत से तात्पर्य है वे पद्धतियाँ और प्रक्रियाएँ जिनके द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार के नियम निरूपित होते हैं और क़ानूनी बल प्राप्त करते हैं । ओपेनहायम के मतानुसार अंतर्राष्ट्रीय विधि का एकमात्र स्रोत है राज्यों की पारस्परिक सहमति । साम्यवादी लेखक भी राज्यों की पारस्परिक सहमति को अंतर्राष्ट्रीय विधि का अनन्य स्रोत मानते आए हैं । ओपेनहायम के मतानुसार, चूँकि राज्यों की सहमति दो प्रकार से व्यक्त की जा सकती है, अतः अंतर्राष्ट्रीय विधि के दो स्रोत हैं । 1. संधइयाँ जो राज्यों की स्पष्ट सहमति को प्रत्यक्ष और स्पष्ट लिखित रूप से व्यक्त करती हैं और 2. प्रथाएँ जो राज्यों की सहमति के अलिखित, परोक्ष एवं अव्यक्त स्वरूप हैं । सन्म 1945 के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की संविधि के अनुच्छेद 38 के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोतों को दो भागों में विभक्त किया गया है । (1) प्रधान स्रोत और (2) सहायक स्रोत । प्रधान स्रोतों में संधियां, प्रथाएं और सभ्य राजयों द्वारा मान्यता प्राप्त विधि के सामान्य नियम सम्मिलित किए गए हैं । सहायक स्रोतों में न्यायिक निर्णय और विधिवेत्ताओं की रचनाएँ रखी गई हैं ।


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