शरणार्थी
शरणार्थी से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है जो मुख्यतः राजनीतिक कारणों से स्वदेश का त्याग कर अन्य देशों में जाने के ले विवश होते हैं क्योंकि स्वदेश में रहने पर उन्हें बंदी बना लिए जाने अथा अन्य प्रकार से यातना और उत्पीड़न का भय रहता है । ऐसे व्यक्तियों के संबंध में दो वैधिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं जिनका पिछले 40 वर्षों में निवारण करने का प्रयास हुआ है :-
1. क्या इन व्यक्तियों को किसी भी अन्य देश में शरण पाने का अधिकार है ? और
2. क्या संबंधित राज्य द्वारा इनको शरण दिया जाना उसका वैधिक कर्त्तव्य है ?
इस विषय पर सर्वप्रथम 25 जुलाई, 1951 को एक अभिसमय पर जेनेवा में हस्ताक्षर हुए थे जिसमें शरणार्थियों की स्थिति (status) संबंधी सिदधांतों और नियमों की व्याख्या की गई थी । इसी अभिसमय के प्रसारस्वरूप 31 जनवरी, 1967 को एक प्रोटोकोल पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसमें शरणार्थियों की स्थिति को और अधिक स्पष्ट किया गया था ।
इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि अंतर्राष्ट्रिय विधि के अंतर्गत एक व्यक्ति को किसी दूसरे राज्य में शरण पाने का अधिकार है या सरण देना किसी राज्य का वैधिक कर्तव्य है ।
refugee asylum
शरणार्थी शरण
स्वदेश में राजनीतिक सामाजिक या धार्मिक उत्पीड़न के वास्तविक भय के कारण भाग कर आए लोगों को अन्य देश/ देशों द्वारा शरण देना । संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 14 दिसंबर, 1967 को स्वीकार की गई प्रादेशिक शरण विषयक घोषणा मे यह कहा गया कि उत्पीड़न के कारण भाग कर आए लोगों को सीमा पर नहीं रोकना चाहिए औरयदि वे शरण लेने वाले प्रदेश में घुस आए हैं तो उन्हें वहाँ से बाहर नहीं धकेलना चाहिए या अनिवार्य रूप से निष्कासित नहीं करना चाहिए । यदि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें शरण देना संभव नहीं हो तब भी अस्थायी रूप से उन्हें वहाँ रहने देना चाहिए । यदि कोई देश शरणार्थियों के भार को सहन करने में असमर्थ हो तो कई देशों को मिलकर या संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से उस भार को हल्का करने के समुचित उपाय करने चाहिए । उत्पीड़न से राहत देने के उद्देश्य से जिन व्यक्तियों को शरणाधिकार प्रदान किया गाय ह , उसका सभी राज्यों को आदर करना चाहिए और इसे कोई शत्रुतापूर्ण कार्य नहीं समझा जाना चाहिए ।
regional deence organisation
क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन
सदस्य - राज्यों की सामूहिक सुरक्षा के उद्देश्य से क्षेत्रीय स्तर पर गठित अंतर्राष्ट्रीय संगठन । दूसरे महायुद्ध के उपरांत इस प्रकार के संगठनों के अनेक उदाहरण मिलते हैं जिनमें प्रमुख रूप से उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का नाम उल्लेखनीय है । इनके अन्य उदाहरणों में वारसा संधि संगठन, दक्षिण - पूर्व एशियाई संधि संगठन (सीटो), बगदाद पैक्ट अथवा मध्य - पूरव संधि संगठन (सेंटो) के नाम भी उल्लेकनीय हैं । परंतु ये अब केवल ऐतिहासिक दृष्टांत बनकर रह गए हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय विधि की दृष्टि से यह एक विवाद का विषय रहा है कि इन संगठनों का वैधिक आधार इनके सदस्य - राज्यों का आत्मरक्षा का अधइकार है या कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर की क्षेत्रीय संगठन विषय व्यवस्था ।
शीत - युद्ध के समाप्त हो जाने और संसार से साम्यवादी गुठ के विघटित हो जाने से इस प्रकार के संगठनों का अब विशेष महत्व नहीं रहा गया है ।
regional defence pacts
क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते
दे. Regional defence organisations.
regional international law
क्षेत्रीय अंतर्राष्ट्रीय विधि,
क्षेत्रीय अंतर्राष्ट्रीय कानून
विश्व के सी क्षेत्र विशेष में विकसित और उसी क्षेत्र के देशों द्वारा स्वीकृत परस्पर व्यवहार मे लागू होने वाले नियम जैसे लातीनी अमेरिकी देशों द्वारा स्वीकृत राजनयिक शरण देने संबंधी नियम । ये नियम सामान्य अथवा सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि से भिन्न और स्वतंत्र होते हुए भी क्षेत्र विशेष के सदस्य - राज्यों के लिए उनकी सहमति से बाध्यकारी हो सकते हैं । वर्तमान काल में क्षेत्रीय धरातल पर कार्य कर रहे अनेक राजनीतिक अथवा आर्थिक समुदायों एवं संगठनों से भी अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार के क्षेत्रीय नियमों का सृजन हो सकता है ।
दे. particular international law भी ।
registration of treaty
संधि का पंजीकरण
संधि का किसी अंतर्राष्ट्रीय संघ के सचिवालय में पंजीबद्ध कराया जाना । राष्ट्र संघ की प्रसंविदा के अंतर्गत इसकी व्यवस्था की गई थी । राष्ट्र संघ के सदस्यों के लिए यह अनिवार्य था कि वे अपने द्वारा की गई संधियों का सचिवालय में तुरंत पंजीकरण कराएँ, इसके बिना संधि बाध्यकारी नहीं होगी ।
संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 102 के अंतर्गत भी सदस्य - राज्यों द्वारा की गई संधियों के पंजीकरण कराए जाने की व्यवस्थआ की गई है । परंतु संदि का पंजीकरण कराया जाना उसेक बाध्यकारी होने की आवश्यक दशा नहीं है ।
relative contrabnd (=conditional contraband)
सापेक्ष विनिषिद्ध वस्तुएँ
दे.
rendition of aliens
अन्यदेशियों का समर्पण
कीस राज्य द्वारा कीस अपारधी को किसी विशिष्ट तदर्थ व्यवस्था के अंतर्गत किसी दूसेर राज्य को आवश्यक न्यायिक कार्रवाई के लिए सौंप देना चाहे इन राज्यों के मध्य कोई प्रत्यर्पण संधि न भी हो और यदि संधि है भी तो चाहे अपराध प्रत्यर्पणीय न भी हो । ऐसा पारस्परिकता के आधार पर भी किया जा सकता है ।
reparation
युद्ध हानि पूर्ति
युद्ध के उपरांत जेता राज्यों द्वारा युद्ध मे हुई हानि के लिए विजित राज्यो से लिया गय हर्जाना । बहुधा इसकी व्यवस्था शांति संधि के प्रावधानों में की जाती है । उदाहरणार्थ प्रथम महायुद्ध के पश्चात् वार्साई संधि के अंतर्गत जर्मनी से भारी हर्जाना देने के लिए कहा गया था । यह हर्जाना इतना अधिक था कि जर्मनी उसे कभी नहीं दे पाया ।
repatraition
प्रत्यावर्तन
किन्हीं व्यक्तियों अथवा व्यक्ति - समूहों को विदेश से उनके स्वदेश भेजे जाने की प्रक्रिया जैसे, शरणार्थियों अथवा युद्धबंदियों को उनके देश वापिसि भेजा जाना ।
इस शब्द का प्रयोग विदेश में लगी पूंजी को स्वदेश भेजे जाने के लिए भी किया जाता है ।