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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi)
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Detenue
नजरबंद वह व्यक्ति जो इस आशंका से हिरासत में लिया जाए कि वह शासन-विरोधी कार्य विशेषकर, राजनीतिक अपराध कर क़ानून व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी कर सकता है।

Development administration
विकास प्रशासन परंपरागत प्रशासन का प्रमुख कार्य शांति एवं व्यवस्था बनाए रखना था जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवनयापन क़ानूनों के अंतर्गत करने के लिए स्वतंत्र हो। प्रायः आर्थिक और सामाजिक विकास का दायित्व व्यक्ति और समाज पर होता था राज्य पर नहीं। शनै: शनै: कल्याणकारी राज्य और लोकतंत्र के अभ्युदय तथा उपनिवेशवाद के पतन के पश्चात् नवोदित राज्यों ने इस सिद्धांत को अपनाया कि प्रशासन का उत्तरदायित्व केवल शाति और व्यवस्था तक ही सीमित नहीं अपितु पूर्ण आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी सक्रिय रूप से कार्यवाही करना होना चाहिए। इस प्रकार, विकास प्रशासन में राज्य अनेक योजनाओं एवं कार्यक्रमों के द्वारा जनता के सर्वागीण विकास के लिए कार्य करता है। इसका एक आयाम यह भी है कि विकास प्रक्रिया में प्रशासन और जनता की भागीदारी रहती है। इस प्रकार के प्रशासन में यह आवश्यक हो जाता है कि प्रशासकों के दृष्टिकोण और मनोवृत्ति में इस प्रकार का परिवर्तन आए कि वे अपने को केवल प्रशासक मात्र ही न समझें अपितु जनता की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील भी रहे।

Development approach
विकासपरक उपागम तुलनात्मक राजनीति में अध्ययन का एक उपागम जिसके अनुसार राजनीतिक व्यवस्थाएँ एक विकासक्रम में रखी जा सकती हैं। यह क्रम है पुरातन-परंपरागत-संक्रांतिकालीन-आधुनिक। विकासक्रम पुरातन से आधुनिक की ओर होता है। राजनीतिक व्यवस्थाओं, संरचनाओं व कार्यों को इस विकासक्रम में रखकर उनका तुलनात्मक अध्ययन करना `विकासपरक उपागम` कहलाता है। आमंड ने इसी उपागम का प्रयोग किया है।

Dictatorship
तानाशाही जनता की सहमति के बिना अथवा उनके विरुद्ध एक व्यक्ति अथवा व्यक्तिसमूह द्वारा मनमाने ढंग से शासन-संचालन जिसमें क़ानून के शासन, नागरिक अधिकार व स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सर्वथा विलोप हो जाता है। संवैधानिक प्रक्रियाएँ या स्वतंत्रताएँ बनी भी रहती हैं तो प्रायः केवल नाममात्र के लिए और केवल तानाशाही के हितार्थ। कभी-कभी सत्ता एक दल या गुट के द्वारा हस्तगत कर ली जाती है परंतु धीरे-धीरे एक व्यक्ति अथवा तानाशाह पूरी व्यवस्था में सर्वोपरि हो जाता है।

Dictatorship of the proletariat
सर्वहारावर्ग का अधिनायकत्व मार्क्स के अनुसार श्रमिक क्रांति के उपरांत और साम्यवादी समाज की स्थापना के पूर्व एक संक्रांतिकाल होगा जिसमें राज्य की संस्थाओं तथा उत्पादन के साधनों पर सर्वहारावर्ग का प्रभुत्व स्थापित हो जाएगा। इस स्थिति को मार्क्स ने `सर्वहारावर्ग का अधिनायकत्व` कहा है। यह एक अंतरिम व्यवस्था है। धीरे-धीरे राज्य लुप्त हो जाएगा और तब वह विशुद्ध साम्यवादी व्यवस्था होगी।

Diplomacy by conference
सम्मेलन राजनय 1. राज्यों के प्रतिनिधियों के मध्य सम्मेलन द्वारा आपसी हितों के प्रश्नों पर पारस्परिक विचार-विमर्श एवं निर्णय। 2. सामूहिक ढंग से विचार-विमर्श करके राजनयिक निर्णय लेने की पद्धति को `सम्मेलन राजनय` कहा जाता है। सन् 1918 से इसके प्रयोग में काफी तेजी आई है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आज इसका विशेष महत्व है।

Diplomatic corps
राजनयिक दूतवर्ग किसी देश में विद्यमान समस्त विदेशी राजनयिक दूतों, उपदूतों तथा दूतावासों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समूह को राजनयिक दूतवर्ग कहा जाता है।

Direct election
प्रत्यक्ष निर्वाचन, सीधा निर्वाचन जनता द्वारा सीधे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव।

Directive principles
निदेशक सिद्धांत भारतीय संविधान के चौथे अध्याय में दिए गए सिद्धांत जिन्हें राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत कहा गया है। संविधान के अनुसार ये सिद्धांत वाद योग्य नहीं है परन्तु ये राज्य के प्रशासन में मूलभूत होंगे और संसद एवं राज्य विधान मंडलों का कर्तव्य होगा कि इनको ध्यान में रखते हुए विधि-निर्माण का कार्य किया जाए। संविधान में अनुच्छेद 36 से 51 तक इनका प्रावधान किया गया है।

Discretionary power
विवेकाधिकार किसी सार्वजनिक अधिकारी को बिना किसी से परामर्श किए अपने विवेक के अनुसार कार्य करने का अधिकार `विवेकाधिकार` कहलाता है। इस प्रकार की व्यवस्था ब्रिटिश शासनकाल में अनेक अधिनियमों के अंतर्गत की गई थी। भारतीय संविधान में भी अनुच्छेद 163 के अंतर्गत राज्यपालों को कुछ विवेकाधिकार दिए गए हैं परन्तु ये महत्वपूर्ण नहीं हैं।


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