1. राजा, 2. राजपद 1. एक सर्वोच्च शासक के रूप में कोई राजा जिसमें प्रभुसत्ता निहित होती है। 2. ब्रिटिश संदर्भ में, ब्रिटेन का राजा और उसका पद। इसका वास्तविक अर्थ ब्रिटेन की सरकार से है।
Crown colony
क्राउन कालोनी ब्रिटिश उपनिवेश जिस पर ब्रिटेन के राजा (वास्तव में ब्रिटिश सरकार) का नियंत्रण होता है।
Curia Regis
क्यूरिया रीजिस, राज परिषद् नार्मनकालीन इंग्लैंड में, सम्राट की परामर्शदात्री समिति जिसे राज परिषद् कहते थे। इसी में से कालांतर में मंत्रिमंडल विकसित हुआ। यह आज लार्ड सभा के रूप में विद्यमान है।
Custom
प्रथा, परंपरा व्यवहार अथवा आचरण संबंधी नियम जो दीर्घकाल तक सतत पालन किए जाने के कारण क़ानून का रूप धारणकर लेते हैं और इसी रूप में न्यायालयों द्वारा स्वीकार्य व लागू किए जाते हैं। ये अलिखित होते हैं और इनका विकास शनैःशनैः होता है।
Customary law
प्रथागत विधि विधिक व्यवस्था का वह अलिखित भाग जिसका निर्माण किसी विधान मंडल द्वारा न किया जाकर प्रथाओं एवं परंपराओं के विकास के रूप में होता है परंतु जिनमें क़ानून के सदृश बाध्यकारिता होती है।
Customs union
सीमाशुल्क संघ, कस्टम्स यूनियन दो या दो से अधिक राज्यों का संघ जिन्होंने परस्पर अंतर्राज्यीय व्यापार पर से सीमाशुल्क तथा अन्य प्रतिबंध हटा दिए हों तथा जो अन्य राज्यों के प्रति सामान्य वाणिज्यिक नीति अपनाते हों। इस प्रकार के संघ का एक ऐतिहासिक उदाहरण है आस्ट्रिया-जर्मनी सीमाशुल्क संघ (1937)।
Czarism
ज़ारशाही स्वेच्छाचारी या एकतंत्रीय शासन विशेषकर ज़ार के समय रूसी सरकार। रूस में 1917 की बोल्शेविक क्रांति के पूर्व सम्राट को जार कहा जाता था।
Dail
डेल आयरलैंड की संसद का निम्न सदन।
Defection
दलबदल विधान मंडल अथवा संसद में किसी राजनीतिक दल के एक या अधिक सदस्यों द्वारा अपना दल त्याग कर किसी दूसरे दल के साथ जा मिलना। भारत में, 1985 में पारित एक क़ानून के अंतर्गत दलबदल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और ऐसे सदस्यों को सदन की सदस्यता से वंचित कर दिया जाता है। परंतु यदि किसी दल के कम से कम एक तिहाई सदस्य एक साथ ऐसा करें तो उन पर यह क़ानून लागू नहीं होता।
Delegated legislation
प्रत्यायोजित विधान इसे प्रशासकीय अंगों तथा निकायों एवं अभिकरणों द्वारा विधि निर्माण भी कहते हैं। ये विधियाँ-नियमों, उपनियमों, अधिनियमों, आदेशों आदि के रूप में होती हैं। संसदीय विधियों की विभिन्न धाराओं में प्रदत्त शक्ति के अनुसार कार्यकारिणी अंग आवश्यकतानुसार समय - समय पर ये नियम, उपनियम जारी कर सकते हैं। ये संसदीय विधि से सीमित होते हैं। अतः इस प्रकार के विधि-निर्माण को अधीनस्थ विधि-निर्माण भी कहते हैं। इस प्रकार निर्मित नियम इत्यादि विधायिका के पटल पर रख दिए जाते हैं।