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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सोख्ता
एक प्रकार का खुरदरा कागज जो स्याही सोख लेता है।
संज्ञा
पुं.
(फ़ा. सोख्तः)

सोख्ता
जला हुआ, दग्ध।
वि.

सोग
प्रिय जन की मृत्यु का परम कष्ट।
संज्ञा
पुं.
(सं. शोक)
मुहा.- सोग मनाना- प्रियजन की मृत्यु पर शोकचिह्न धारण करना और किसी उत्सव आदि में सम्मि लित न होना।

सोग
प्रियजन के वियोग का दुख।
संज्ञा
पुं.
(सं. शोक)
उ.- (क) देवकी-बसुदेव-सुत सुनि जननि कैहै सोग-२९३३। (ख) सूर उसाँस छाँड़ि भरि लोचन बढ़थो बिरह-ज्वर सोग-३४९२।

सोग
दुख, कष्ट।
संज्ञा
पुं.
(सं. शोक)
उ.- (क) जोग, भोग रस रोग-सोग-दुख जाने जगत सुनावत-३२७६। (ख) अपने-अपने भाव सु पेखत, मिट़यौ सकल मनसोग-सारा. ५१४।

सोगन
कसम, शपथ।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौगंद)

सोगवारा
वह स्थान जहाँ प्रियजन की मृत्यु का शोक मनाया आ रहा हो।
संज्ञा
पुं.
(सं. शोक + हिं. वारा)

सोगिनी
शोक करनेवाली।
वि.
स्त्री.
(हिं. सोग)

सोगी
प्रियजन की मृत्यु का शोक करनेवाला।
वि.
पुं.
(हिं. सोग)

सोगी
वियोगी।
वि.
पुं.
(हिं. सोग)


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