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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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ह्वै
ठाढ़े ह्वै-खड़े होकर।
प्र.
उ.-बिछुरन भेंट देहु ठाढ़े ह्वै-पृ. ४६० (३२)।

ह्वै
भिन्न या परिवर्तित रूप धारण करके।
क्रि.अ
(हिं. होना)

ह्वै
ह्वै गए- हो गये, बन गये।
प्र.
उ.-छोरी बंदि बिदा किए राजा, राजा ह्वै गए राँकौ-१-११३।

ह्वै
बनकर।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-अंग सुभग सजि ह्वै मधु मूरति, नैननि माँह समाऊँ-१०-४९।

ह्वै
जन्म लेकर, शरीर धारण करके, अवतार लेकर।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-(क) सोई सगुन ह्वै नंद की दाँवरी बँधावै-१-४। (ख) नरहरि ह्वै हिरनाकुस मारथौ-१-११३। (ग) दंतबक्र सिसुपाल जो भए, बासुदेव ह्वै सो पुनी हए-१०-२।

ह्वैहैं
(कार्य आदि) आरंभ या संपादित होंगे।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-ह्वैहैं जज्ञ अब देव मुरारी- ७-२।

ह्वैहैं
होंगे, बनेंगे।
क्रि.अ
(हिं. होना)
मुहा.- कौन के ह्वैहैं-किसके सगे या आत्मीय होंगे। उ.-काके भए कौन के ह्वैहैं, बँधे कौन की डोरी-पृ. ४९८ (६३)।

ह्वैहै
जन्म लेगा, जन्मेगा।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-(क) ता रानी सेंती सुत ह्वैहैं-६-५। (ख) पाछैं भयौ, न आगैं ह्वैहैं, सब पतितनि सिरताज-१-९६।

ह्वैहै
घटित होगा।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-सूरदास प्रभु रची सु ह्वैहैं-१-२६४।

ह्वैहौं
होऊँगा।
क्रि.अ
(हिं. होना)
उ.-नंद राइ, सुनि बिनती मेरी तबहिं बिदा भल ह्वैहौं-१०-३५।


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