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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सोंधु
सुगंधित।
वि.
(हिं. सोंधा)

सोंधे
सुगंध।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सोंधा)
उ.- सूरदास प्रभु की बानक देखे गोपी-ग्वाल टारे न टरत निपट आवै सोंधे की लपट-८३९। (ख) पवन गवन आवें सोंधे की झकोरे-२२८७।

सोंवनिया
नाक का एक आभूषण।
संज्ञा
पुं.
(सं. सुवर्ण)
उ.- नासिका अति सुंदर राजत सोंवनिया।

सोंह
कसम, शपथ।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. सौंह)

सोंह
सामने, सम्मुख।
अव्य.

सोंहट
सीधा-सादा, सरल।
वि.
(देश.)

सोंही
सामने, सम्मुख।
अव्य.
(हिं. सौंह)

सो
वह।
सर्व.
(सं. सः)
उ.- सूरदास ऎसे स्वामी कौं देहिं पीठि सो अभागे-१-८।

सो
इसलिए, अतः, निदान।
अव्य.

सो
समान, तुल्य।
वि.
(हिं. सा)


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