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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सैद्धांतिक
सिद्धांत का, सिद्धांत संबंधी।
वि.

सैद्धांतिक
जो सिद्धांत के आधार पर हो।
वि.

सैन
(आँख या उँगली का) इशारा, संकेत या इंगित।
संज्ञा
स्त्री.पुं.
(सं. संज्ञपन, प्रा. सण्णवन)
उ.-(क) नैन की सैन अंगद बुलायौ-९-१२९। (ख) कमल नैन माखन माँगत हैं करि करि सैन बतावत-१०-१०२। (ग) सन देइ सब सखा बुलाए-१०-२८२। (घ) मोहि लई नैनंनि की सैन-७४२। (ङ) बात करत तुलसी मुख मेलै नैन सैन दै मुँह मटकी-1३-०१। (च) ताहू मैं अति चारु बिलोकनि गूढ़ भाव सूचतसखि सैन-१३१३। (छ) रीझत नारि कहत मथुरा की आपुस मैं दै सैन-सारा. ५०४।

सैन
निशान, चिह्न, लक्षण।
संज्ञा
स्त्री.पुं.
(सं. संज्ञपन, प्रा. सण्णवन)

सैन
सोना, निद्रा लेना।
संज्ञा
पुं.
(सं. शयन)

सैन
लेटना।
संज्ञा
पुं.
(सं. शयन)

सैन
शैया।
संज्ञा
पुं.
(सं. शयन)

सैन
बिछौना।
संज्ञा
पुं.
(सं. शयन)

सैन
फौज, कटँक, सेना।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. सेना)
उ.- (क) नातरु कुटँब सैन संहरि सब कौन काज कौं जीजै-१-२७५। (ख) हरि प्रभाउ राजा नहिं जान्यौ, कहथौ सैन मोहिं देहु हरि-१-२६८। (ग) दामिनि कर करवार, बूँद सर, इहिं बिधि साजे सैन-२८१९। (घ) सखी री पावस सैन पलान्यौ-२८२०।

सैन
बाज पक्षी।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्येन)


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