संधि संरचना
आधुनिक संधियों की बनावट इस प्रकार की होती है :-
(1) प्रस्तावना - इसमें संधिकर्ता राज्यों के अध्यक्षों या सरकारों का नामोल्लेख, संधि के प्रयोजन और पक्षकारों द्वारा संधि संपन्न करने के संकल्प का वर्न होता है ।
(2) संधि की मुख्य धाराएँ या व्यवस्थाएँ ।
(3) औपचारिक या प्रक्रियात्मक धाराएँ - जिनमें संधि के लागू होने की तिथि, उसकी संपुष्टि की प्रक्रिया, उसकी अवधि, उसकी भाषा, रजिस्ट्री विवादों का निपटान, संशोधन तथा समीक्षा आदि औपचारिक विषयों का वर्णन होता है ।
(4) पूर्णाधिकारियों के हस्ताक्षर, हस्ताक्षर की तारीख तथा स्थान का उल्लेख ।
subjective territoriality principle
कर्मगत प्रादेशीयता सिद्धांत
इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई अपराध करने वाला व्यक्ति एक राज्य में हो और सके कर्म का प्रभाव दूसरे राज्य में पड़ता हो तो दूसरे राज्य को पहले राज्य के अपराध करने वाले व्यक्त को देंडित करने का अधिकार है । उदाहरणतः दो राज्यों के सीमांत भूभाग में एक व्यक्ति एक राज्य की सीमा के भीतर से दूसरे राज्य की सीमा के अंदर खड़े व्यक्ति को गोली का निशआना बनाता है तो गोली के अपराध का प्रभाव पड़ने वाले राज्य को (दूसरे राज्य को) पहले राज्य वाले अपराधी को दंड देने का अधिकार है । इस अधिकार (क्षेत्राधिकार) का आधार अपराध से उत्पन्न परिणाम है । जाली सिक्के बनाने तथा मादक द्रव्यों के निर्माण एवं यापार मे लगे अपराधियों को उस स्थिति में जबकि अपराध विदेशी स्थल से हो रहा हो दंडित करने के लिए प्रायः क्षेत्राधिकार के इसी सिद्धांत का सहारा लिया जाता है ।
subjects of International law
अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय
अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय से तात्पर्य है वे निकाय अथवा इकाइयाँ जिन पर अंतर्राष्ट्रीय विधि लागू होती है । किसी भी विधि के विषय वे व्यक्ति अथवा निकाय होते हैं जिन्हें उस विधि - व्यवस्था से अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते है और जो अपने अधिकारों के हनन होने पर न्यायिक कार्रवाई कर सकते हैं । अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय भी वे व्यक्ति निकाय अथवा संगठन हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय विधि से अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते है और जो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में अपने अधिकारों के हनन ह ने पर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं । इनके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय होने के लिए दो अन्य अर्हताएँ हैं । एक जो अन्य विषयों से सांविधिक अथवा राजनयिक संबंध स्थापित करने की क्षमता रखते हैं और दूसरे, जो विधि के निर्माण में भाग लेने की क्षमता रखते हैं । परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार केवल राज्य ही अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय माने जाते रहे हैं । परुतु वर्तमान काल मे राज्यों के अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, कुछ विशिष्ट गैर - राज्य इकाइयों और कुछ सीमा तक व्यक्तियों को भी अंतर्राष्ट्रीय विधि का विषय माना जाता है ।
substantive copy
मूल प्रतिलेख
दे. Action copy.
summit diplomacy
शिखर राजनय
राजनय का वह स्वरूप जिसमें पारस्परिक विवादों अथवा समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित राज्यों के राज्याध्यक्षों अथवा शआसनाध्यक्षों के सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं । यह स्वाभाविक ही है कि निचले स्तर या स्तरों पर गहन तैयारी के बार ही इस प्रकार के सम्मेलनों की उपयोगिता हो सकत है । स.रा. अमेरिका के राष्ट्रपति और भूतपूर्ण सोवियत संघ के प्रधानमंत्री के बीच अनेक शिखर सम्मेलन हुए हैं । गुट निरपेक्ष आंदोलन के शासनाध्यक्षों के नियमित रूप से शिकर सम्मेलन होते रहे हैं और इसी प्रकार दक्षेस (सार्क) के कार्य संचालन में इसके शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं ।
suspension of hostilities
युद्धविराम
दे. Ceasefire.
suzerinty
अधिराज्यत्व
किसी राज्य द्वारा किसी संधि या समझौते के अंतर्गत किसी दूसरे राज्य के वैदेशिक संबंधों के संचालन पर पूर्ण नियंत्रण अथा धिसत्ता प्राप्त कर लेना । इस दूसरे राज्य के संदर्भ में अधिसत्ता प्राप्त करने वाले राज्य को अधिराज्य कहा जाता है । वर्तमान काल मे इस प्रकार के उदाहरण नगण्य हैं ।