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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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international law
अंतर्राष्ट्रीयव विधि ऐसे सिद्धांतों एवं नियमों का समूह जो मूलतः राज्यों के पारस्परिक संबंधों में उनके आचरण को नियमति एवं नियंत्रित करते हैं । वर्तमान काल में अंतर्राष्ट्रीय संगठन एवं संस्थाओं के प्रशासन तथा कार्य संचालन संबंधी नियम भी अंतर्राष्ट्रीय विधि की परिधि में सम्मिलित माने जाते हैं । यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय विधि के मूल विषय राज्य ही हैं परंतु कुछ सीमा तक व्यक्तियों क अधिकार और कर्तव्य भी अंतर्राष्ट्रीय विधि द्वारा नियमित और निर्धारित होते हं । वास्तव मे आज अंतर्राष्ट्रीय विधि को संपूर्ण मानव जाति की विधि अथवा विशअव विधि के रूप मे देखा ज रहा है जसका उद्देश्य न केवल विश्व शआंति व सुरक्षा है, अपितु पूर्ण मानव कल्याम अथवा उत्थान है । विशिषअट अंतर्राष्ट्रीय विधि से भिन्नता स्थापित करने के लिए (जिसका उल्लेख हम यथास्थान करेंग ) इसे सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि अथवा सामान् अंतर्राष्ट्रीय विधि अथवा सर्वदेशीय अंतर्राषअटरीय विधि भी कहा जाता है । दे. particular international law भी ।

International Law Association
अंतर्राष्ट्रीय विधि संघ अंतर्राष्ट्रीय विधि में रूचि रखने वाले विद्वानों और बुद्धिजीवियों का एक गैर सरकारी संघ, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और विकास के लिए विविध षयों पर प्रस्तावित विधि के पाररूप तैयार करना ह । इसका मुख्यालय लंदन में है । इसकी राष्रीय शाखाएँ विश्व के अनेक देशों मे स्थापित हैं । इसके सदस्यों मे प्रायः अंतर्राष्ट्रीय विधि के विद्वान विधिशास्त्री, न्यायाधीश आदि होते ह । इंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और उसके उत्रोत्त्र विकास में इस संग के योगदान की सर्वथा सराहना की गई है ।

International Law Commission
अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग अंतर्राष्ट्रीय कानून के विकास और उसके संहिताकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1947 में स्थापित एक आयोग । इसके 21 सदस्य हैं जो अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विधिवेत्ता होते हैं । इनका चुनाव सदस्य देशों द्वारा नामित प्रतिनिधियों में से स.रा. महासभा द्वारा तीन वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है । इसमें एक राज्य का एक से अधिक प्रतिनिधि नहीं होता । यह आयोग अंतर्राष्ट्रीय विधि के संहिताकरण और विकास हेतु उपयुक्त विषयों पर प्रारूप तैयार करता है जो राज्यों की स्वीकृति पाकर अंतर्राष्ट्रीय विधि के भाग बन जाते हैं । इस हेतु राज्यों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी किया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग ने संहिताकरण और विकास के क्षेत्र मे सराहनीय कार्य किया है । इसकी प्रारंभिक उपलब्ध्यों में राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों संबंधी घोषणा पत्र, न्यूरेम्बर्ग चार्टर तथा निर्णय मे मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय विधि में सिद्धांतों का निरूपण और मानवता की शांति और सुरक्षा के लिए घातक अपराधों की संहिता तैयार करन उल्लेखनीय हैं । इसके अतिरिक्त अनेक विषयों पर आयोग ने संहिता के प्रारूप तैयार किए थे, जिन्हें स्वीकार करने के लिए कई अंतर्राष्टरीय सम्मेलन आयोजित हुए हैं । ये विषय थे - समुद्री कानून, राजनयिक प्रतिनिधियों के विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ, वाणिज्य दूतों को विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ, संधियाँ आदि । आजकल यह आयोग अनेक विषयों पर नियमावलियों के प्रारूप तैयार करने मे लगा है, जैसे राज्य उत्तराधिकार, राज्य उत्तरदायित्व, ऐतिहासिक जल क्षेत्र विदेशी राज्यों की क्षेत्राधिकार उन्मुक्ति, प्रत्यर्पण, शरणाधिकार और पर्यावरण आदि ।

international legislation
अंतर्राष्ट्रीय विधि - निर्माण अंतर्राष्ट्रीय विधि, जो मूलतः प्रथागत विधि थी, वर्तमान काल में संधिगत कानून को अधिक स्थान देती जा रही है । विधि निर्मात्री संधियों का प्रारंभ 19 वीं शताब्दी के मध्य से हुआ परंतु वर्तमान शताब्दी के प्रारंभ से अंतर्राष्ट्रीय विधि - निर्मात्री संधियों की संख्या बहुत तेज गति से बढ़ने लगी है । इन सिंयों का निर्माण प्रायः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हुआ है जिससे इनके निर्माण की प्रक्रिया भी लगभग सुनिश्चित हो गई है । इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय विधि - निर्मात्री संधियों का ग्रहण किया जाना अंतर्राष्ट्रीय विधि - निर्माण कहलाता है । मेनले ओ हडसन ने 1929 में प्रकाशित अपनी प्सुत्क को यही नाम दिया था और तब से इस पद का अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोतों के अध्ययन में एक विशिष्ट स्था नहो गाय है । इस प्रकार के विधि निर्माण में संयुक्त राष्ट्र का विशेष योगदान रहा है । संयुक्त राष्ट्र संघ अंतर्राष्ट्रीय विधि आयोग के माध्यम से बहुपक्षीय संधियों एवं अभिसमयों के प्रारूप तैयार कराकर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से उन पर राज्यों का अनुमोदन प्राप्त करने का कार्य करता है ।

International Maritime Organisation
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन दे. Inter - Governmental Maritime Consultative Organisation.

International Mililtary Tribunal
अंतर्राष्ट्रीय सैनिक न्यायाधिकरण दे. Tokyo International Military Tribunal.

International Monetary Fund
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष संयुक्त राष्ट्र के इस विशेष अभिकरण की स्थापना 1944 में ब्रेटनवुड मोद्रीक तथा वित्तीय सम्मेलन द्वारा की गई थी । इसके प्रमुख उद्देश्य सदस्य - राज्यों की मुद्रा प्रणालियों में स्थिरता लाना, एक विश्वव्यापी बहुपक्षीय भुगतान व्यवस्था की स्थापना करना और सदस्य - राज्यों के अल्पकालिक भुगतान असंतुलन की स्थिति में सहायता करना था । अब इसके सदजस्यों की संख्या सौ से अधिक है । इसके सदस्यों का मत देने का अधिकार उनके अंशदान पर निर्भर करता है । अपनी स्थापना सेलेकर आज तक यह असंगठन विनिमय दरों को नियंत्रित करके मुद्रा मूल्यों को नियमित करन और संकट के समय विदेशी मुद्रा प्रदान करने का कार्य सफलतापूर्वक कर रहा है ।

international organisation
अंतर्राष्ट्रीय संगठन ऐसा संगठन जिसकी सदस्यता एक राज्य तक सीमित न होकर अनेक राज्यों में व्याप्त हो और जिसका उद्देश्य मानव सुरक्षा एवं कल्याण तता विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के मंतव्य से एक संस्थात्मक व्यवस्था स्थापित करना हो । ऐसे संगठन दो प्रकार के हो सकते हैं । एक वे जिनके सदस्यागण केवल स्वतंत्र राज्य हों । ऐसे संगठनों को सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन कहा जाता है । सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी दो प्रकार के हो सकते हैं - () सर्वदेशीय संगठन जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ, विशअव बैंक आदि और () क्षेत्रीय संगठन जैसे , अमेरिका राज्य संगठन, अफ्रीरी एकता संगष अरब लीग, सार्क (दक्षेश) आदि । दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठन वे हैं जिनके सदस्यागण राज्य गैर सरकारी संस्थाएँ, संघ अथवा व्यक्ति होते हैं जेसे, रेडक्रॉस, रोटरी इंजरनेश्नल, ईसाई युवक संघ आदि ।

international person
अंतर्राष्ट्रीय व्यक्ति वह इकाई जो अंतर्राष्ट्रीय विधि का विशय हो अर्थात् जिस प र अंतर्राष्ट्रीय वधि लागू होती हो और जिसे अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत अधइकार और कर्त्तव्य प्राप्त होते हों । इन अधिकारों में विशेष रूप सेये उल्लेखनीय हैं :- 1. अपने अंतर्राष्ट्रीय अधिकारों के रक्षआर्थ न्यायिक कार्रवाई कर सकने का अधिकार । 2. अंतर्राष्ट्रीय विधि की निर्माण - प्रक्रिया मे भाग लेने का अधिकार । 3. अन्य अंतर्राष्ट्रीय इकाइयों से संधि करने का अधिकार । प्रायः राज्य एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय होते हैं किंतु कुछसीमा तक और सीमित मात्रा में व्यक्ति तथा अनेक अन्य गैर राज्य इकाइयाँ बी अंतर्राष्ट्रीय व्यक्ति माने जाते हैं जैसे, संरक्षित, प्रदेश, फिलस्तीनी मुक्ति संगठन आदि ।

International Red Cross
अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 1864 में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा जेनेवा में की गई थी । इसकी स्थापना का श्रेय जीन हेनरी ड्यूनान नामक सज्जन को है । उसका उद्देश्य मूल्तः युद्ध के बीमार और घायलों की चिकित्सा और उपचार करना तथा उनके उपचार मे लगे डाक्टरों नर्सों, आस्पतालों, वाहनों आदि जो संरक्षण प्रदान करना था । कालांतर में इसके विषय क्षेत्र में विस्तार हो गाय और अब यह प्रत्येक मानवीय आपदा जैसे, महामारी, बाढ़, भूकंप आदि मे मानवीय सहायता पहुँचाने का कार्य भी करती है । इसकी राष्ट्रीय शाखाएँ लगभग सभी देशों में स्थापित हैं । इसका ध्वज सफेद धरती पर लाल क्रॉस का निशआन है । कुछ देशों में जैसे, तुर्की ईरान इत्यादि में इस संस्था को रेडक्रॉस की जगह रेड क्रेसेंट भी कहते ह । इन देशों में लाल क्रॉस की जगह स्था के ध्वज पर लाल अद्र्धचंद्र का निशआन होता है । वास्तव में यह अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण तथा तटस्थताका प्रतीक है ।


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