निर्वासित सरकार
वह सरकार जो अपने राज्य पर किसी अन्य राज्य या सत्ता द्वारा आधिपत्य हो जाने के कारण अस्थायी रूप से किसी विदेशी राज्य से जो उसे आश्रय देने के लिए रहमत हो, कार्य संचालन करती है । दोनों महायुद्धों में जर्मनी से पराजित होकर यूरोप के अनेक देशों की सरकारें इंग्लैड तथा अन्य मित्र देशों में शरण लेने के लिए विवश हुई । इस सरकारों को निर्वासित सरकार कहा गया ।
Grotian School
ग्रोशसवादी संप्रदाय
इस संप्रदाय के समर्थकों की मान्यता है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि न तो केवल प्राकृतिक विधि का रूपांतरण मात्र है और न ही केवल राज्यों की सामान्य सहमति की ही देना है, वरन् अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम प्राकृतिक विधि और राज्यों की सामान्य सहमति दोनों से ही प्राप्त होते हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय विधि के जन्मदाता हयूगो ग्रेशस का भी यही विचारि था और उन्हीं के नाम पर इस विचारधारा को ग्रोशसवादी विचारधार कहा जाता है ।
ग्रोशसवादी वास्तव में ग्रोशस के विचारों से इस बात में भिन्न हैं कि ग्रोशस अंतर्राष्ट्रीय विधि में प्राकृतिक विधि के नियमों को प्रधान स्थान देते थे और सहमतिपरक नियमों को गौण स्थान देते हैं ।
प्रमुख ग्रोशसवादियों में वुल्फ और एमरिख वातेल के नाम विशएष रूप से उल्लेखनीय हैं । औपेनहायम का मत है कि वर्तमान काल में ग्रोशसवादी मत ही अंतर्राष्ट्रीय विधि के आधार के रूप में श्रेष्ठतम दृष्टिकोण है ।
guarantee treaty
प्रत्याभूति संधि
वह संधि या समझौता जिसके द्वारा तत्कालीन प्रभावशाली राज्य किसी देश की सुरक्षा, प्रभुसत्ता, शासन व्यवस्था, प्रादेशिक अखंडता तथा तटस्थता को बनाए रखने अथवा किसी संधि या समझौते के सद्भावनापूर्ण निष्पादन के लिए वचनबद्ध होते हैं ।
guerilla warfare
छापामार युद्ध, वृक युद्ध
सशस्त्र और स्वयं संगठित गुटों द्वारा अनियमित रूप से की जाने वाली सशस्त्र कार्रवाई जो किसी आक्रमणकारी सेना के प्रतिरोध में की जाए अथवा स्थापित सरकार के विरूद्ध हो । बहुधा ये छापामार किसी धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक विचारधारा अथवा उद्देश्य से प्रेरित होकर शत्रु पर लुक छिपकर आक्रमण करते हैं और शत्रु की रसद पूर्ति, यातायात तता संचार साधनों को नष्ट करके शत्रु को निर्बल करते हैं ।
अनेक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों ने इसी तरीके का प्रयोग किया है और अब कुछ सीमा तक अंतर्राष्ट्रीय विदि भी गुरिल्लाओं को मान्यता देने लगी है ।
gulf
खाड़ी
दे. Bay.
Hague Codification Conference
हेग संहिताकरण सम्मेलन
इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्र संघ के तत्वावधान में 1930 में किया गया था । दीर्घ तैयारी के उपरांत इसके विचारार्थ तीन विषय रखे गए थे ताकि इनसे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम लिपिबद्ध किए जा सकें । ये विषय थे 1. राष्ट्रीयता 2. भूभागीय समुद्र और 3. राज्योत्त्र उत्तरदायित्व ।
यह सम्मेलन राष्ट्रीयता के प्रश्न पर दो उपसंधियाँ स्वीकृत करने मे सफल रहा परंतु अन्य दो विषयों में उसे कोई सफलता नहीं मिल सकी । कुल मिलाकर सम्मेलन अपने उद्देश्य मे असफल रहा ।
Hague Conference, 1899
हेग सम्मेलन, 1899
अंतर्रष्ट्रीय विधि के क्षेत्र में सम्मेलनों के द्वारा विधि - निर्माण का प्रथम प्रयास सन् 1899 के हेग सम्मेलन द्वारा काय गया था । इस विश्व का प्रथम शांति सम्मेलन भी कहा जा सकताहै । यह सम्मेन रूस के ज़ार के उपक्रम से आयोजित किया गया था । इसमें 26 राज्यों ने भाग लिया था । इसका मुख्य उद्देश्य विश्व में स्थायी शांति स्थापित करने हेतु सुझाव देना था ताकि शस्त्रों के निर्माण और विकास पर होने वाले व्यय को सीमित किया जा सके ।
इस सम्मेलन में तीन अभिसमयों पर हस्ताक्षर हुए । प्रथम अभिसमय में, अंत्रारष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण उपायों का वर्णन किया गया । दूसरे अभइसमय में, सन् 1864 की जेनेवा अभिसमय के नियमों को समुद्री युद्ध की स्थिति में रूपांतरित किया गया । तीसरे अभिसमय में स्थल युद्ध संबंधी नियमों का विस्तृत वर्णन किया गया ।
Hague Conference, 1907
हेग सम्मेलन, 1907
इस सम्मेलन को बुलाने क श्रेय अमेरिका के राष्ट्परित थियोडोर रूज़वेल्ट को है । इसमें 44 राज्यों के 356 प्रतिनिधियों ने भागि लिया था । इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रथम हेग सम्मेलन, 1899 के कार्य का पुनरीक्षण करना और युद्ध एवं तटस्थता संबंधी नियमों का निरूपण एवं संहिताकरण करना था । कुल मिलाकर इस सम्मेलन में 13 अभिसमयों पर हस्ताक्षर किए गए । इनमेंसे तीन अभिसमयों का उद्देश्य प्रथम हेग सम्मेलन के अभिसमयों का पुनरीक्षण और सुधार करना था । एक अभिसमय द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय नौजित माल न्यायालय स्थापित करने का सुझाव दिया गया था । दो अन्य अभिसमयों द्वारा स्थल और समुद्री युद्ध में तटस्त राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों की व्यवस्था की गई थी । अन्यि अभिसमय युद्ध संबंधी विदि के अनेक विषयों से संबंधित थे ।
सम्मेलन के अंत में यह निश्चय व्यक्त किया गया था कि 10 वर्ष में एक तीसरा सम्मेलन बुलाय जाएगा परंतु 1914 में पहला विश्व - युद्द छिड़ जाने से ऐसा नहीं हो सका ।
Hague Convention, 1970
हेग अभिसमय, 1970
1960 के दशक में विमान अपहरण की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही थीं और यह लगने लगा था कि इन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है । इस दृष्टि से 1970 में हेग अभइसमय संपन्न किया गया, जिस पर 48 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए । इस अभिसमय में उस व्यक्ति को अपराधी माना गया है जो गैर कानूनी तरीक से या शक्ति के प्रयोग की धमकी से विमान पर अपना अधिकार या नियंत्रण प्राप्त कर लेता है (अनुच्छेद 1) इस अभिसमय की अन्य व्ववस्थाएँ इस प्रकार हैं :-
1. प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता राज्य विमान अपहरण को अपराध मानकर उसके लिए भारी दंड की व्यवस्था करेगा
2. वह विमान अपहरण अथवा विमान पर यात्रियों व कर्मियों के विरूर्ध हिंसात्मक कार्य करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई कर सकने में समक्ष होगा यिदि अपराध उसी राज्य में पंजीकृत विमा पर हुआ है अथवा जिस विमान पर अपराध हुआ है वह अपराधी उसी राज्य के प्रदेश में उतरता हैं ।
3. प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता राज्य अपराधी को उसके प्रदेश में विद्यामान होने की दशा में स्वयं दंड देगा अथवा उसके प्रत्यर्पण की व्यवस्था करेगा और
4. विमान अपहरण को प्रत्यप्रणीय अपराध माना जाएगा और प्रत्यर्ण संबंधी संधियों में प्रत्यर्पणीय अपराधों की सूची में सको भी सम्मिलित किया जाएगा ।
Hay - Varilia Treaty
हे - वरिल्ला संधि
यह संधि सन् 1903 में संयुक्त राज्य अमेरिका और पनामा गणराज्य के बीच संपन्न हुई थी । इसके अंतर्गत पनामा नहर के प्रबंध और पनामा नहर क्षेत्र में प्रशासन का अधिकार अनिश्चित काल के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंपा गया था । उसी समय से संयुक्त राज्य अमेरिका हस क्षेत्र में वस्तुतः सार्वभौमिक अधिकार का उपभोग करता रहा ।
पिछले 10 वर्षों में इस स्थिति से पनामा गणराज्य में बड़ा असंतोष और रोष व्यक्त किया गया । इसको देखते हुए इस संधि का पुनरीक्षण किया गया और दोनों देशों के बीच एक नया समजौता हुआ है । इसके अंतरग्त पनामा नहर क्षेत्र से संयुक्त राज्य अमेरिका का नियंत्रण और प्रशासन इस शाताब्दी के अंत तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा ।