मुक्त वस्तुएँ
वे वस्तुएँ जो किसी भी दशा में युद्धकाल में विनिषिद्ध वस्तुएँ घोषित नहीं की जा सकती जैसे काँच और जीनी मिट्टी के बर्न, साबुन, रंग इत्यादि । वर्तमान परिस्थितियों में वस्तुतः किसी भी वस्तु को इस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता अतः यह संकल्पना ही ऐतिहासित महत्व की बनकर रह गई है ।
freedom of fishing
मछली पकड़ने की स्वतंत्रता
मत्स्यहरण स्वतंत्रता समुद्री स्वतंत्रताओं में से एक है, जिसे परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि में मान्यता दी जाती रही है और जिसे 1958 के तत्संबंधी जेनेवा अभिसमय और 1982 के तृतीय समुद्री विधि अभिसमय ने भी मान्यता दी । इनके अनुसार सभी राज्यों को खुले समुद्र में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने और मछली कपड़ने का पूरा अधिकार है तथा ऐसा कार्य करने वाले जहाजों को स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने से कोई राज्य रोक नहीं सकता । मछली पकड़ने के इस विशेष अधिकार के साथ - साथ राज्यों को कुछ कर्तव्य और दयित्व निभाने के लिए भी कहा गया है, जैसे कि वे संधियों से उत्पन्न दायित्वों का निर्वाहि करें, तटवर्ती राज्यों के हित और अधिकारों की अवहेलना न करें, जीवित प्राणियों के संरक्षण के लिए किए जाने वाले उपायों में एक दूसरे का सहयोग करें और यदि खुले समुद्र के किसी भाग में दो या अधिक राज्यों के नागरिक मछली पकड़ते हैं तो एक दूसरे के ऐतिहासिक अधिकार का सम्मान करें ।
freedom of navigation
नौ- परिवहन की स्वतंत्रता
प्राचीन काल से मनुष्य समुद्रों में परिवहन करता रहा है और सोलहवीं शताब्दी में ग्रोशस ने सर्वप्रथम यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि महासमुद्र मे सभी राज्यों के नागरिकों को समान एवं निर्बाध रूप से नौ- वहन का अधिकार होना चाहिए । इस प्रकार महासमुद्र में नौ - वहन का अधिकार एक सुस्थापित अधिकार के रूप में प्रतिष्ठित हो गया जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि ने मान्यता दी । सन् 1958 के महासमुद्र विषयक जेनेवा अभिसमय में जिन समुद्री स्वतंत्रताओं का उल्लेख किया गया है उनमें नौ - परिवहन की स्वतंत्रता को प्रथम स्थान दिया गया है । इसका र्थ यह है कि महासमुद्रों में नौ - परिवहन का अधिकार सभी राज्यों और उनके नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है ।
इस परंपरागत अधिकार को वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय विधि का योगदान यह है कि इसने उन राज्यों को भी महासमुद्र में नौ - परिवहन का अधिकार प्रदान किया है जिनका अपना कोई समुद्र - तट नहीं है और जो चारों ओर से अन्य देशों से घिरे हुए हैं और जिन्हें भूबद्ध - राज्य कहा जाता हैं ।
ऐसे भूबद्ध राज्य पड़ौसी समुद्रतटीय राज्यों से समझौता करके समुद्र का प्रयोग नौ - परिवहन के लिए कर सकते हैं । ऐसे राज्यों के जलपोतों को साथ विदेशी पत्तनों में अन्य राज्यों के जलपोतों के समान व्यवहार किए जाने की भी व्यवस्था की गई है ।
freedoms of the high sea (= freedoms of the open sea)
महासमुद्र की स्वतंत्रताएँ
1958 में जेनेवा में हुए समुद्री सम्मेलन में खुले समुद्रों पर एक अभिसमय पारित किया गया जिसके अनुसार समुद्र के वे भाग जो राज्य के प्रादेशिक समुद्र तथा उसके आंतरिक जल की सीमा के अंतर्गत नहीं आते, सबदेशों के लिए समान रूप से खुले हुए हैं और इनके किसी भाग पर कोई राज्य वैध रूप से अपनी प्रभुसत्ता स्थापित नहीं कर सकता ।
खुले समुद्र की स्वतंत्रताओं में निम्नलिखित बातें शामिल हैं नौचालन की स्वतंत्रता मछली पकड़ने की स्वतंत्रता, समुद्रतल में तार तथा पाइप लाइन बिछाने की स्वतंत्रता खुले समुद्र के ऊपर उड़ने की स्वतंत्रता, कृत्रिम टापू एवं अन्य प्रतिष्ठान निर्मित करने की स्वतंत्रता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान की स्वतंत्रता । अंतिम दो स्वतंत्रताएँ 1982 के अभिसमय का योगदान हैं । इसके अतिरिक्त 1982 के आभिसमय में अनन्य आर्थिक क्षेत्र के प्रावधान से महासमुद्र में राज्यों के मत्स्याहरण का अधिकार तटवर्ती राज्य के अनन्य आर्थिक क्षेत्र के समुद्रवर्ती छोर से प्रारंभ होता है क्योंकि अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मत्स्याहरण का एकमात्र अधिकार तटवर्ती राज्य का होता है ।
freedoms of the open sea
महासमुद्र की स्वतंत्रताएँ
दे. Freedoms of the high sea.
Full Powers
पूर्ण अधिकार - पत्र
वह अधिकारि - पत्र जो राज्य की ओर से संधि के संपादन करने के उद्देश्य से प्रत्यायित प्रतिनिधि को दिया जाता है । यह अधिकार - पत्र राज्याध्यक्ष अथवा विदेश - मंत्री द्वारा दिया जाता है । यह इस बात पर निर्भर करता है कि संधि राज्याध्यक्षों के नाम से की जा रही है या राज्य अथवा सरकार के नाम से ।
संधि करने के लिए यदि राज्याध्यक्ष अथवा शासनाध्यक्ष अथवा विदेश मंत्री स्वयं व्यक्तिगत रूप से जाते हैं तो उन्हें इस प्रकार के अधिकार - पत्र की आवश्यकता नहीं होती
राजदूत जिस देश में प्रत्यायित है, यदि उस देश से संधि संपादन मे भाग लेता है तो उसे भी अधिकार - पत्र की आवश्यक्ता नहीं होती ।
इन सभी पदाधिकारियों का संधि करने का अधिकार पदेन अथवा इनके पद में निहित होता है ।
gas warfare
गैस युद्ध
वह युद्ध जिसमें विषैली, श्वासावरोधक तथा अन्य प्रकार की जनसंहारकारी गैसों का प्रयोग हो । अंतर्राष्ट्रीय विधि के अन्सार गैस का इस प्रकार का प्रयोग वर्जित है । 1925 के जेनेवा प्रोटोकोल में स्पष्ट रूप से श्वासावरोधक गैस के प्रयोग पर प्रतिबंध बनाया गया ह । 1972 के इस अभिसमय के अंतर्गत जैविक एवं विषाक्त अस्त्रों के विकास, उत्पादन एवं भंडारण को वर्जित किया गया है और उनके नष्ट करने का भी प्रावधान है ।
general act
संनियम
अंतराष्ट्रीय विधि के क्षेत्र मे यह औपचारिक अथवा अनौपचारिक संधि का ही पर्यायवाची है । इस शब्द का प्रयोग राष्ट्र संघ ने 1928 में स्वीकृत अंतराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान विषयक विधान के लिए किया था ।
General Agreement on Trade and Tariff (GATT)
व्यापार एवं प्रशुल्क संबंधी सामान्य समझौता
एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन जिसका उद्देश्य सदस्य राज्यों के मध्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सरल एवं सुगम बनाना है । इसकी प्रथम बैठक जेनेवा में 1947 में हुई थी । यह सदस्य राज्यों के मध्य प्रशुल्क एवं अन्य व्यापार संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए पारस्परिक समझौते कराने में सहायता करता है । प्रारंभ में इसमें केवल 23 राज्य थे परंतु अब यह संख्या बढ़कर 100 से अधिक को गई है, जो विश्व - व्यापार के 80 प्रतिशत से अधिक का संचालन करते हैं ।
इसके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं पारस्परिक व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करना एक दसेर के प्रति विभेदकारी नीति विशेष कर सीमा - शुल्क के क्षेत्र में न अपनाना करों और सीमा - शुल्क के मामले में सर्वाधिक अनुगृहित राष्ट्रmost favoured nation) धारा का पारस्परिक व्यापारिक संबंधों में अनुपालन करना सीमा - शुल्क संबंधी औपचारिकताओं को सरल बनाना इत्यादि ।
general armistice
1. व्यापक युद्ध स्थागत
2. व्यापक युद्ध स्थगन समझौता
दे. Armistice.