बाह्य संप्रभुता, बाह्य प्रभुसत्ता
संप्रभुता राज्य का एक अनिवार्य तत्व है । संप्रभुता का अर्थ है राज्य की सर्वोच्च शक्ति, जो राज्य के आंतरिक और बाह्य मामलों को नियंत्रित और नियमित करने के लिए अनन्य रूप से सक्षम होती है ।
संप्रभुता के इस बाह्य पक्ष को ही बाह्य संप्रभुता कहते हैं । इसका अर्थ है राज्य का अपने विदेशी - संबंदों का संचालन करने में पूर्ण स्वतंत्र होना । मैक्स हयूबर ने एक मामले में यह विचार व्यक्त किया था कि 'राज्य के पारस्परिक संबंधों में सार्वभौमिकता का अर्थ है स्वतंत्रता' ।
exterritoriality
राज्य क्षेत्र बाह्यता,
राज्य प्रदेश बाह्यता
अंतर्राष्ट्रीय विधि का वह सिद्धांत जिसके अनुसार कुछ विदेशी इकाइयाँ जैसे राज्याध्यक्ष, राजदूत, राजनायिक दूतावास, राजकीय जलपोत, राज्य - प्रदेश में भौतिक रूप से उपस्थिति होते हुए भी राज्य - प्रदेश से बाहर माने जाते हैं । इसका अर्थ यह हुआ कि वे स्थानीय विधि और स्थानीय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से उन्मुक्त हैं ।
कुछ विद्वानों ने इस मत का खंडन काय है कि इन इकाइयों को प्रदेश - ब ह्य समझा जाए । यद्यपि ये विद्वान इन इकाइयों को स्थानीय क्षेत्रधिकार से उन्मुक्त मानते हैं ।
extinctive prescription
समापनीय चिरभोगाधिकार
किसी राज्य के किसी प्रदेश पर दीर्घकालीन निर्बाध निर्विरोध नियंत्रण एवं आधिपत्य से उसके मूल स्वामी का अधिकार समाप्त हो जाना ।
extraditable crimes (=extraditable offences)
प्रत्यर्पणीय अपराध
सामान्यतः बहुत गंभीर अपराध करने वाले अपराधियों के प्रत्यर्पण की ही माँग की जाती है और विभिन्न देशों के प्रत्यर्पण कानूनों में इस प्रकार के अपराधों का उल्लेख भी किया जाता ह । लगभग सभी देशों में वध, नरहत्या, नकील सिक्के बनाना जालसाजी, गबन, अपहरण, बलात्कार, समुद्री डकैती आदि प्रत्यर्पणीय अपराधों की श्रएणी में आते हैं । कुछ देशों के प्र्तयर्पण कानूनों में अपराधों का नामोल्लेख तो नही किया गया है किंतु उन अपराधों को प्रत्यर्पणीय अपराध माना गया है जिनके लिए वहाँ के दंड विधान में कोई न्यूनतम दंड नियत किया गया है ।
सामान्य नियम के रूप में राजनीतिक अपराध, सैन्य अपराध, और धार्मिक अपराध प्रत्यर्पणीय अपराधों की सूची से बाहर रखे गए हैं ।
extraditable ofences
प्रत्यर्पणीय अपराध
दे. Extraditable crimes.
extraditable persons
प्रत्यर्पणीय व्यक्ति
प्रत्यर्पणीय व्यक्ति वे व्यक्ति होते हैं जिनका संबंधित संधियों अथवा राष्ट्रीय कानूनों के अंतर्गत प्रत्यर्पण किया जाना वैध होता है । सामान्यतः राज्य अपने नागरिकों का प्रत्यर्पण नहीं करते और संधियों में भी यह प्रावधान रहता है जैसे भारत -नेपाल प्रत्यर्पण संधि । परंतु कुछ देश जैसे ग्रेट ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका अपने नागरिकों का भी प्रत्यर्पण कर देते हैं यदि ऐसा करना संबंधित प्रत्यर्पण संधि में वर्जित न हो ।
सामान्यतः प्रत्यर्पण प्रत्यर्पण चाहने वाले राज्य के नागरिकों और तीसेर राज्य के नागरिकों का ही किया जाता है ।
एक दीर्घ कालीन परंपरा के अनुसार राजनीतिक अपराधियों का प्रत्यर्पण नहीं किया जाता, यद्यपि यह विवादग्रस्त है कि किसे राजनीतिक अपराधी समझा जे । वरतमान काल में विमान - अपहरण के मामलों की संख्या मे बढ़ोत्तरी हो जाने के कारण एक अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय के अंतर्गत यह व्यवस्था अपनाई गई है कि विमान अपहरण करने वाले व्यक्तियों को प्रत्यर्पणीय व्यक्ति माना जाए ।
extradition
प्रत्यर्पण
किसी अपराधी द्वारा एक राज्य में अपराध करने के पश्चात् किसी दूसरे राज्य की सीमाओं में भाग जाने पर उस राज्य द्वारा (जहाँ अपराधी भाग कर आया है) अपराधी को उसके राष्ट्रीय राज्य के विधिवत अनुरोध करने पर उसे लौटा दिया जाना । कोई राज्य प्रत्यर्पण की माँग निरपेक्ष अधिकार के रूप में नहीं कर सकता, इसलिए बहुधा प्रत्यर्पण के लिए दोनों राज्यों के मध्य प्रत्यप्रण संदि का होना आवश्यक है । प्रत्यर्पण की माँग सामान्यतः राजनयिक माध्य से की जाती है । राजनीतिक अपराधियों का प्रत्यर्पण नहीं किया जाता ।
extradition treaty
प्रत्यर्पण संधि
सामान्यतः अंतराष्ट्रीय विधि में प्रत्यर्पण की माँग स्वीकार करना और उसकी प्रक्रिया राष्रीय विधि के अधिकार क्षेत्र में मानी जाती है । इसीलिए प्रत्यर्पण के लिए द्विपक्षीय संधियाँ की जाती हैं और उन्हीं के अधीन प्रत्यर्पण किए जाते हैं । कोई राज्य प्रत्यर्पण संधि के अभाव में किसी अपराधी का प्रत्यर्पण करने के ले बाध्य नहीं माना जा सकता ।
extra territorial asylum
प्रदेशबाह्य शरण
अपने प्रदेश से बाहर विदेशों में स्थित अपने दूतावासों, युद्धपोतों, व्यापारिक जहाजों आदि में किसी व्यक्ति को शरण देना । इस प्रकार की शरण विशेष अवस्थाओं में ही दी जाती है जैसे किसी व्यक्ति को उत्तेजित भीड़ के आक्रमण से बचाने तथा अन्य असाधारण परिस्थितियों और मानवीय कारणों से ।
वर्तमान काल में यह विवादास्पद है कि दूतावासों अथवा वाणिज्य दूतावासों में शरण दी जा सकती है अथवा नहीं और यदि दी जा सकत है तो किन परिस्थितियों में शरण देने का अधिकार एक मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय नियम बन गया है ।
extra - territoriality
अपरदेशीयता
अंतर्राष्ट्रीय विधि का वह स्द्धांत जिसके अनुसार राज्य के कानून और न्याय प्रशासन उसके अपने नागरिकों पर इनके राज्य के प्रदेश की सीमाओं से बाहर होने की दशा में भी लागू माने जाते हैं । उदाहरणार्थ, विदेशों में रहने वाले नागरिक अपने राज्य के कानून की परिधि से बाहर नहीं हैं । इसी प्रकार महासमुद्रों में परिवहन करने वाले जलपोत अपने ध्वज - राज्य के अधिकार - क्षेत्र में ही माने जाते हं और कुछ विद्वानों ने ऐसे जलपोत को ध्वज - राज्य का तैरता हुआ प्रदेश माना है ।