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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सेष
बाकी, बचा हुआ।
वि.

सेष
समाप्त।
वि.

सेषनाग
वह नाग जिसके हजार फनों पर पृथ्वी ठहरी या टिकी हुई मानी गयी है।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेषनाग)

सेषरंग
(शेषनाग-जैसा) सफेद या श्वेत रंग।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष + रंग)

सेसरेख, सेसरेखा
(शेषनाग के अवतार) लक्ष्मण द्वारा खींची गयी वह रेखा जो उन्होंने मरीच का 'हा लक्ष्मण' पद सुनकर, सीताजी को अकेला छोड़कर जाते समय खींची थी और जिसके बाहर जाने का उनको निषेध कर दिया था। रावण ने उस रेखा को लाँघने का साहस नहीं किया था और सीताजी जब उस रेखा के बाहर आ गयी थीं, तभी उसने उनका हरण किया था।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. शेष + रेखा)
उ.-सूनैं भवन गवन तैं कीन्हौ, सेष-रेख नाहिं टारी-९-१३२।

सेषासन
शेषनाग का आसन जिस पर विष्णु शयन करते कहै जाते हैं।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष + आसन)
उ.-सप्त रसातल सेषासन रहे, तबकी सुरति भुलाऊ-१०-२२१।

सेस
बाकी।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष)

सेस
समाप्ति।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष)

सेस
शेषनाग।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष)
उ.- (क) सेस सारद रिषय नारद संत चिंतत सरन-१-३०८। (ख) धरनि सीस धरि सेस गरब धरथौ इहिं भर अधिक सँभारयौ-५६७।

सेस
लक्ष्मण (शेषावतार)।
संज्ञा
पुं.
(सं. शेष)


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