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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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state immunity
राज्य उन्मुक्ति परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार विदेशों में राज्याध्यक्ष राजदूत, सार्वजनिक जलपोत, सशस्त्र सेनाएँ स्थानीय क्षेत्राधिकार से उन्मुक्त माने जाते हैं । इस सिद्धांत के अनेक आधार हैं । कोई संप्रभु दूसरे संप्रभु के अधीन नहीं माना जा सकता । पारस्परिकता और अंतर्राष्ट्रीय शिषअटाचार तथा व्यावहारिकता (क्योंकि विदेशी संप्रभु के विरूद्ध निर्णय लागू करना अव्यावहारिक होगा अथवा शत्रुतापूर्ण कार्य समझा जाएगा) भी यही माँग करते हैं कि एक राज्य दूरे राज्य के संप्रभु, उसके प्रतिनिधि अथवा उसके सार्वजनिक जलपोतों और सशस्त्र सेनाओं को अपने क्षेत्राधिकार से परे माने । दे. restrictive theory of state i mmunity भी ।

statelessness
राज्यविहीनता, राष्ट्रहीनता जब कोई व्यक्ति अथवा व्यक्तिसमूह किसी भी राज्य अथवा राष्ट्र का नागरिक न हो तो ऐसी अवस्था को राष्ट्रहीनता और ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रिकताहीन व्यक्ति कहते हैं । यह स्थिति विभिन्न देशों के राष्ट्रीयता अथवा नागरिकता संबंधी क़ानूनों में मतभेद होने किसी प्रदेश मे प्रभुसत्ता बदलने किसी देश में क्रांति द्वारा सत्ता परिवर्तन होने अथवा राज्य द्वारा विराष्ट्रीकरण कर देने से उत्पन्न हो सकती है । 1930 के जेनेवा संहिताकरण सम्मेलन में राज्यविहीनता के प्रश्न पर भी विचार हुआ था परंतु कोई संधि या समझौता इस संबंध में नहीं हो सका । अभी तक भी इस विषय से संबंधित कोई सुनिश्चित अंतर्राष्ट्रीय नियम नहीं है । प्रायः पारस्परिक संधि समझौतों द्वारा ही इसके समाधान का प्रायस किया जाता है ।

stateless person
राज्यविहीन व्यक्ति दे. Statelessness

state of war
युद्ध - स्थिति, युद्ध - अवस्था राज्यों द्वारा एक दूसरे के विरूद्ध सशस्त्र सैनिक बल प्रयोग की स्थिति । यह आवश्यक नहीं है कि युद्धरत राज्य वास्तव में एक दूसेर के विरूद्ध सशस्त्र कार्रवाई में भाग लें । युद्धावस्था का यह अनिवार्य तत्व है कि संबंधित राज्यों के पारस्परिक संबंधों में शांतिकालीन अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम निलंबित हो जाते हैं और उनका स्थान युद्ध विधि के नियम ले लेते हैं । इसके अतिरिक्त युद्धरत राज्यों और अन्य राज्यों के पारस्परिक संबंधों मे तटस्थता के नियम लागू होने लागते हं । संक्षेप में, कहा जा सकता है कि युद्धावस्था वह स्थिति है जिसमें युद्धकारियों के परस्पर संबंधों मे युद्धविधि के नियम और युद्धकारियों तथा ग़ैर - युद्धकारियों के परस्पर संबंधो में तटस्थता के नियम लागू होने लगते हैं ।

state responsibility
राज्य उत्तरदायित्व परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय विधि की यह मान्यता है कि किसी राज्य मे रहने वाले विदेशियों की जान और माल की सुरक्ष का दयित्व स्थानीय राज्य का है । उनको राज्य में रहने की अनुमति देने मे ही यह दायित्व निहित है । दूसरी ओर इन विदेशियों के मूल राज्य का दायित्व है इनके नागरिकों के सात न्याय वंचन होने की दशा मे इनको संरक्षण प्रदान करना । यह दायित्व इन नागरिकों की राज्य के प्रति निष्ठा से उत्पन्न होता है । राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखना स्थानीय राज्य का परम कर्तव्य है । किसी स्थिति में व्यवस्था बनाए रखने में असफल होने के कारण यदि स्थानीय नागरिकों के साथ - साथ विदेशियों के जीवन और संपत्ति को हानि पहुँचती है तो राज्य का कोई उत्तरदायित्व नहीं बनता । राज्य का उत्तरदायित्व उस समय उत्पन्न होता है जब कोई खतरे की निश्चित आशंका विदेशियों के विषय मे हो और राज्य उनके रक्षार्थ आवश्यक और उचित उपाय न करे, अथवा आवश्यक उपाय करने के बावजूद विदेशियों के क्षतिग्रस्त होने पर अपराधियों को पकड़ने अथवा उनको दंड देने में आवश्यक तत्परता न दिखाए अथवा उनके साथ की गई न्यायिक कार्यवाही मात्र औपचारिकता हो और जिसमें न्याय मिलने की संभावना न हो आदि । उपर्युक्त परिस्थितियों में राज्य त्तरदयित्व उत्पन्न होता है . विदेशी नागरिक को संतोषजनक क्षतिपूर्ति अथवा तुष्टि न मिलने पर वह अपने राज्य से अपनी र से हस्तक्षेप करने का अनुरोध कर सकता है । अपने नागरिक की ओर से विदेशी राज्य द्वारा किए गए हस्तक्षेप को अंतर्राष्ट्रीय दावा कहते हैं । इस प्रकार राज्य उत्त्रदायित्व से अंतर्राष्ट्रीय दावे उत्पन्न होते हैं ।

state seccession
राज्य - उत्तराधिकार जब किसी राज्य में प्रभुसत्ता का किसी कारणवश हस्तांतरण होता है तब उस स्थिति को राज्य - उत्ताराधिकार की स्थिति कहा जाता है । इससे तात्पर्य यह है कि पूर्वगामी राज्य का वैधिक व्यक्तित्व समाप्त हो जाता है और उसके अंतर्राष्ट्रीय अधिकार और कर्तव्य नवीन राजनीतिक इकाई, जिसे उत्राधिकारी राज्य कहा जाता है, को प्राप्त हो जाते हैं । मूलतः इन अधिकारों और कर्तव्यों के विष्य निम्मलिखित हैं : अंतर्राष्ट्य संधियाँ और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता, ऋण, सार्वजनिक संपत्ति, वैयक्तिक अधिकार, ठेके, रियायतें, दुष्कर्म आदि ।

state territory
राज्य - प्रदेश राज्य के चार तत्वों में से एक तत्व प्रदेश है । राज्य एक प्रादेशिक इकाई है । राज्य के प्रदेश के तीन संघटक होते हैं: 1. भूमि - प्रदेश, 2. समुद्री - प्रदेश, 3. वायु - प्रदेश । राज्य की संप्रभुता इन तीनों प्रदेशों में एख समान लागू होती है । अंतर केवल इतना है कि राज्य के भूभागीय समुद्र से विदेशी जहाजों को निर्दोष गमन का अधइकारि होता है , परंतु वायु और भू - प्रदेश से विदेशियों को पारगमन का अधिकार नहीं होता ।

statue
संविधि इस शब्द का तीन अर्थों मे प्रयोग होता हैछ :- 1. अंतर्राष्ट्रीय विधि की शब्दावली में संविधि पद का प्रयोग संधि के पर्यायवाची के रूप में का जा सकता है । 2. किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन की संरचना तथा उसके कार्य संचालन के आधारभूत नियमों का संग्रह जैसे अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की संविधि (1945) । 3. किसी भी संधि अथवा अभइसमय के कार्य संपादन ह तु संलग्न नियमों और विनियमों का संग्रह ।

statue of westminster
वेस्टमिंस्टर संविधि नवंबर 1931 में पारित इस विधि के अंतर्गत ब्रिटिश साम्राज्य के उन राज्यों को जो अधिक विकसित थे (कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैड, दक्षिण अफ्रीका), पूर्ण स्वायत्तता देने का प्रावधान किया गया जिसका परिणाम यह हुआ कि ये राज्य, जिन्हें अब डोमीनियन कहा जाने लगा, अलग अंतर्राष्ट्र्य व्यक्ति हो गए और इन्हें अन्य राज्यों से संधियाँ करने और उनके साथ दौत्य संबंध स्थापित करने के स्वतंत्र अधिकार प्राप्त हो गए । इस प्रकार ब्रिटिश साम्राज्य मे ब्रिटिश सम्राट को अपना संवैधानिक प्रमुख मानते हे भी डोमीनियन स्थिति प्राप्त राज्यों की वैधिक स्थिति स्वतंत्र राज्यों के समान हो गई । इस प्रकार ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का उदय हुआ ।

Stimson doctrine of nonrecognition
अमान्यता विषयक स्टिमसन सिद्धांत संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री श्री स्टिमसन के मतानुसार ऐसी किसी स्थिति,संधि या प्रदेश प्राप्ति को मान्यता न दी जाए जो बल प्रयोग का परिणाम हो । यह सिद्धांत उन्होंने तब प्रतिपादित किया जब जापान ने जून 1931 में चीन के प्रांत मंचूरिया पर आक्रमण किया । उन्होंने कहा कि अमेरका पेरिस संधि (1928) का उल्लंघन करने वाले किसी समझौते,संधि अथवा स्थिति को मान्यता प्रदान नहीं करेगा क्योंकि उक्त संधि पर सं. रा. अमेरिका, चीन और जापान के हस्ताक्षर हैं । लीग ऑफ नेशन्स ने एक प्रस्ताव में स्टिमसन सिद्धांत को स्वीकार करते हुए काह कि लीग के सदस्यों का यह कर्तव्य है कि वे किसी ऐसी स्थिति, संधि या समझौते को मान्यता न दें जो लीग के अथवा पेरिससंधि के खिलाफ हो । आज भी महाशक्तियाँ यह स्वीकार करती हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर को भंग करने वाली किसी व्यवस्था को मान्यता प्रदान न की जैँ ।


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