logo
भारतवाणी
bharatavani  
logo
Knowledge through Indian Languages
Bharatavani

Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z

mililtary servitudes
सैनिक सुविधाधिकार सैनिक उद्देश्य के लिए एक राज्य द्वारा दूसरे राज्य सेली गई प्रदेशगत सुविधाएँ जो प्रथम राज्य की संप्रभुता का हास मानी जाती हैं जैसे, विसैन्यीकृत क्षेत्र की स्थापना, सेनाओं को रखने की अनुमति, सैनिक अड्डे बनाने की अनुमति इत्यादि ।

minimum standard of civililzation
सभ्यता का न्यूनतम स्तर इस पद का प्रयोग लातीनी अमेरिकी देशों में यूरोपीय देशओं के नागरिकों के साथ बर्ताव के संदर्भ में किया गया है ।इन यूरोपीय नागरिकों के राज्यों द्वारा इन नागरिकों के क्षतिग्रस्त होने पर इस बात पर बल दिया जाता रहा कि स्थानीय राज्य इनके सात व्यवहार करने में एक न्यूनतम स्तर का पालन करे, जिससे इनका आशय यह था कि यह व्यावहार यूरोपीय राज्यों में प्रचलित सिद्धांतों एवं मूल्यों के निम्नतम स्तर के अनुरूप हो । इस माँग में यह भाव निहित था कि स्थानीय राज्य की न्यायिक प्रणाली और प्रक्रिया यूरोपीय न्यायिक प्रक्रिया के न्यूनतम स्तर से भी हीन थी । सभ्यता के न्यूनतम स्तर के स्थान पर इन लातीनी अमेरिकी राज्यों का तर्क था कि अधिक से अधिक उनसे यह आशा की जा सकती है कि यूरोपीय नागरिकों के साथ स्थानीय नागरिकों के समान व्यवहार किया जाए. इससे अधिक और कुछ नहीं । इस प्रकार सभ्यता का न्यूनतम स्थर बनाम समान व्यवहार लातीनी अमेरिका में एक विवाद का विषय रहा है, जिसका अब केवल ऐतिहासिक महत्व रह गया है ।

mini states
लघु राज्य दे. dminitive state.

modus vivendi
कार्यनिर्वाहक व्यवस्था, अस्थायी समझौता यह दो अथवा अधिक राज्यों के बीच किए गए उस समझौते की ओर संकेत करता है जो उनके विवादग्रस्त विषयों का एक स्थायी तथा अंतिम रूप से निपटारा किए बिना उनके बीच एक कामचलू व्यवस्था का आयोजन करता है । इसका निष्पादन साधारणतया अत्यंत अनौपचारिक ढंग से किया जाता है । कालांतर में संबधित राज्यों द्वारा इसे एक स्थायी तथा विस्तृत समझौते के रूप में बदला जा सकता है । यह भी हो सकता है कि इस प्रकार का समझौता केवल वार्ताकारी प्रतिनिधियों के नाम में ही हो अथवा इस पर केवल लघु हस्ताक्षर ही हुए हों, पूर्ण हस्ताक्षर नहीं ।

monistic theory
अद्वैतवादी सिद्धांत एकत्ववादी संप्रदाय इस सिद्धांत के अनुसार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विदि दोनों एह ही व्यवस्था के अंग हैं और दोनों में जो अंतर प्रतीत होते हैं वे वास्तविक नहीं हैं । इनके अनुसार संपूर्ण विधिव्यवस्था एक इकाई है जिसमें विभिन्न विधियाँ अधिक्रमिक स्थान रखती हैं । इस अधिक्रम के शिखर पर अंतर्राष्ट्रीय विधि है और राष्ट्रीय विधि इससे निम्न कोटि की है । अद्वैतवादी यह मानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियमों को अपने क्षेत्राधिकार में लागू करने का दायित्व राज्य का है । इस दृष्टि से राज्य अंतर्राट्रीय समुदाय का अभिकर्ता माना जा सकता है । वास्तव में अपने अधिकार क्षेत्र में लागू करके राज्य अंतर्राष्ट्रीय विधि के निर्माण की प्रक्रिया को पूरा करता है । अतः अद्वैतवादियों की यह धारणा है कि अंतर्राष्ट्रिय विधि राष्ट्रीय वविधि का अंग है । इस सिद्दांत के मुख्य समर्थक केलसन, डयूगिट दुरसीम, क्राबे कुंज आदि हैं ।

Monroe Doctrine
मनरो सिद्धांत सन् 1823 में अमेरिकी राष्ट्रपति मनरो द्वारा की गई एक ऐतिहासिक घोषणा जिसमें यह सूचित किया गया कि अमेरिका पश्चिमी गोलाद्र्ध (उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप) में किसी भी यूरोपीय राज्य के हस्तक्षेप को अपनी शांति और सुरक्षा के लिए घातक मानते हुए उसे सहन नहीं करेगा । अतः अमेरिकी महाद्वीपो मे वह यूरोपीय उपनेशों की स्वतंत्रता की घोषणाओं को निरस्त करने के यूरोपीय राज्यों के प्रयासों को अपने लिए द्वेषपूर्ण कार्रवाई मानेगा । यह घोषणा मनरो सिद्धांत के नाम से विख्यात है । इस घोषणा से संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने क्षएत्र के छोटे - छोटे राज्यों के संरक्षण का भार एर प्रकार से अपने ऊपर ले लिया जिसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम हुए । इस घोषमा ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में क्षेत्रीय व्यवस्था अथवा क्षेत्रवाद को भी जन्म दिया ।

Montevideo Convention
मांटेवीडियो अभिसमय सन्म 1933 में मांटेवीडियो में अमेरिकी राज्यों के सम्मेलन में राज्यों के अधिकारों एवं कर्तव्यों से संबंधित अभिसमय पर हस्ताक्षर हुए । इस अभिसमय के प्रथम अनुचेछेद में राज्य के चार निम्नलिखित आवश्यक तत्वों का उल्लेख किया गया था :- 1. जनसंख्या 2. निश्चित प्रदेश 3. सरकार और 4. अन्य राज्यों के साथ संबंद स्थापित करने की क्षमता । इसी अभिसमय में सर्वप्रथम राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लेख किया गया था ।

Montreal Convention
मांट्रियल अभिसमय, 1971 इस अभिसमय पर 23 सितंबर, 1971 को 37 राज्यों ने हस्ताक्षर किए । इसके अंतर्गत यह व्यवस्था की गई थी कि हेग अभिसमय की क्षेत्राधिकार, दंड और प्रत्यर्पण संबंधी व्यवस्थाएँ विमान पर सवार व्यक्तियों और विमान तथा उड़ान की सुरक्षा के विरूद्ध किए गए हिंसात्मक कार्यों पर लागू होंगी ।

Moscow Declaration, 1943
मॉस्को घोषणा, 1943 संयुक्त राष्ट्र की निर्माण प्रक्रिया में इस गोषणा का विशेष महत्व है । यह घोषणा अक्तूबर 1943 मे संयुक्त रूप से चार राज्यों - संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, सोवियत संघ और चीन द्वारा की गई थी । इस घोषमा में युद्धोपरांत एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया था जो सभी शांतिप्रि राज्यों की समानता का सम्मान करे और जिसकी सदस्यता छोटे - बड़े सभी राज्यों के ले खुली हो और जिसका लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखना हो ।

Moscow Treaty
मॉस्को संधि 5 अगस्त, 1963 को संपन्न एक संधि जिसके अनुसार हस्ताक्षरकर्ता देशों ने बाह्य वातावरण, अंतरिक्ष तथा जल के अंदर किसी प्रकार के परमाणु अस्त्रों के परीक्षणों पर रोक लगाने का निर्णय लिया । इन देशों न अपने क्षेत्रांतर्गत आने वाली भूमि, जल, वायुक्षएत्र सीमा में परमाणु अस्त्रों के परीक्षण और विस्फोटों पर पूरी तरह रोक लगाने का दायित्व ग्रहण काय । प्रांरभ मे यह संधि अमेरिका, सोवितय संघ तता ब्रिटेन के बीच हुई किंतु बाद मे लगबाग 100 देश इसके पक्षकार बन गए । इसे आंशिक परमाणु परीक्षण निरोध संधि भी कहते हैं ।


logo