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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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Itnernational court of justice
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय इस न्यायालय की स्थापना 1946 में की गई थी । वास्तव में यह प्रथम विश्वयुद्द के उपरांत स्थापित स्थायी अंतर्राष्टरीय न्यायालय का ही रूपांतरण है । यह न्यायालय संयुक्त राष्ट्र के 6 मुख्य अंगों में से एक है । इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका निर्वाचन सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा द्वारा किया जाता है । न्यायाधीश विभिन्न देशओं से चुने जाते हैं और किसी भी देश का एक से अधिक न्यायाधीश नही हो सकता । प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल 9 वर्ष होता है । इस न्यायालय का मुख्यालय हेग में है । इस न्यायालय का मुख्य कार्य संयुक्त राष्ट्र के सदस्य - राज्यों के पारस्प्रिक विवादों का निर्णय करना है । इसका परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार भी है परंतु इसकी दुर्बलता यह है कि इसका क्षेत्राधिकारस्वीकार करना राज्यों की इच्छा पर निर्भर करता है । न्यायालय के वधान के अनुच्छेद 36 (2) के अंतर्गत राज्य निर्धारित विषयों से संबंधित मामलों के निर्णय हेतु इसका क्षत्राधिकार अनिवार्य रूप से स्वीकार करने के लिए अपने को वचनबद्ध कर सकते हैं ।

International crime
अंतर्राषअट्रीय अपराध अंतर्राष्ट्रय विधि के विरूद्ध किया गया कृत्य जैसे, सममुद्री डाका, नशीली व्स्तुओं का अवैध व्यापार, दास - व्यापार इत्यादि । इसकी विशएषता यह है कि ऐसे अपराध करने वाले व्यक्तियों को कोई भी राज्य पकड़कर दंड दे सकता है । इन पर सर्वदेशीय क्षेत्राधिकार का सिद्धांत लागू होता है ।

international customary law
अंतर्राष्ट्रीय प्रथागत नियम दे. customary international law.

International Development Association
अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ इसका जन्म 1960 मे हुआ था । इसका उद्देश्य विश्व के विकासशील देशों को उनके विकास कार्यक्रमों के लिए वित्त प्रदान करना है । इसके द्वारा दिए जाने वाले ऋण ब्जाज आदि की दृटि से अपेक्षाकृत अधिक सुविदाजनक होते हैं ।

international drainage basin
अंतर्राष्ट्रीय जलनिकास थाला दो या अधिक राज्यों की जलनिकास प्रणालियों के संगम से लेकर उनके किसी समुद्र या किसी अन्यि स्थान में गिरने के स्थान को अंतर्राष्ट्रीय जलनिकास थाला कहा जाता है ।

international economic law
अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विधि दूसरे माहयुद्ध के उपरांत यह विचार प्रबल हुआ कि युद्ध की जड़ में आर्थिक असंतोष और असंतुलन है । अतः आर्थिक क्षेत्र में भी एक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की स्थापना की जानी चाहिए जो विश्व की आर्थिक व्यवस्था को इस प्रकार नियंत्रित और नियमित कर सके जिससे सब देशओं का समुचित विकास हो और परस्पर संघर्ष की संभावनाएँ न्यूनतम हो जाएँ । इस उद्देश्य से अनेक आर्थिक संगठनों एवं संस्थाओं का निर्माण हुआ जिनमें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (विश्व बैंक), पुरशउल्क और व्यापार संबंधी सामान्य समझौता (गाट ) प्रमुख थे । कुछ समय पश्चात अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ की भी स्थापना हुई । परंतु जैसे - जैसे उपनिवेशवाद का पतन होता गया और नवीन स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ, यह व्यापक रूप से अनुभव किया जाने लगा कि है आर्थिक व्वस्था संसार के विकसित देशों के लिए अधिक लाभकारी है और मूलतः इन्हीं का हित संरक्षण करती है तथा इसे विकासशील देशों के पक्ष में करने के लिए इसमें आमूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है । इस उद्देश्य से प्रेरित होकर विकासशील और विकसित देशों में वार्ता का क्रम चला । विकासशील देशों ने महासभा में यह प्रस्तवाव रखा कि विश्व की आर्थिक व्यवस्था का पुनर्निर्माम किया जाना चिहए और एक वीन अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्वस्था की स्थापना की जानी चाहिए । इन उद्देश्यों की प्राप्ति में विकासशील देशों ने भी परस्पर सहयोग और सहायता की आवश्यकता का अनुभव करते हुए आपस में संवाद प्रारंभ किया र क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण एशिया के राज्यों ने एक संगठन की स्थापना की जिसे दक्षेस अथवा सार्क कहा जता है । युद्धोत्त्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण र पुनर्निर्माण के ये प्यास भी अंतर्राषअटरीय विधि के विषय हैं और इन्हें सामूहिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विधि का नाम दिया जाता है । यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान काल में अंतर्राष्ट्रीय विदि का यह पक्ष अर्थात् आर्धिक पक्ष अधिकाधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है क्योंकि इसका संबंध सबी देशों के विकास और उनकी जनता तके जीवन - स्त्र में निरंतर सुधार लाने से है ।

international institution (=international organisation)
अंतर्राष्ट्रीय संस्था, अंतर्राष्ट्रीय संगठन किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि द्वारा स्थापित राज्यों या अंतर्राष्ट्रीय इकाईयों का संघ जिसका अपना पृथक संविधान होता है । इसका सदस्य - राज्यों से भिन्न अपना एक विधिक व्यक्तित्व होता है । दे. International organisation भी ।

internationalisation
अंतर्राष्ट्रीयकरण 1. किसी संधि के अंतर्गत विश्व के किसी क्षएत्र, भूभाग या जलमार्ग का सभी राज्यों द्वारा प्रयोग किए जा सकने की स्थिति जैसे, स्वेज, नहर, पनामा नहर, कील नहर, एन्टार्कटिका, अंतरिक्ष आदि । 2. किसी राष्ट्रीय विवाद अथवा स्थिति अथवा समस्या का अन्य राष्टोरं की अभिरूचि अथवा हस्तक्षेप के कारण अंतर्राष्ट्रीय रूप धारण कर लेना ।

internationalism
अंतर्राष्ट्रीयतावाद वह सिद्धांत जो विश्व की सामान्य आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी राज्यों के सक्रिय सहयोग एवं सहभागीदारी का पक्षधर है । इस सिद्धांत का दार्शानिक आधार वास्तव में स्टोइस दर्शन की विशअवबंधुत्व की भावना में पाया जात है और इससे भी पूर्व बारतीय परंपरा में उपनिषदों के वसुधैव कुटुम्बकम् स्वदेशो भुवनत्रयम में इसका बीजारोपण देखा जा सकता है । समय - समय पर अनेक दार्शनिकों ने जिनमें दांते, पियरे देवाय, कांट और अरविन्द के नाम विशेष उल्लखनीय हैं एक विश्व की कल्पना के प्रस्ताव का उन्होंने निरूपण किया है जिसे अंतर्राष्ट्रीयतावाद का ही रूपांतरण कहा जा सकता है । वर्तमान काल में संयुक्त राष्ट्र संघ अपने विशिष्ट अभिकरमओं सहित अंतर्राष्ट्रीयतावाद का संस्थात्मक रूप है ।

International Labour Organisation
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन 1920 में स्थापित यह संस्ता अब संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों में से एक है । इसका मुख्यालय जेनेवा में है । इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिक कल्याण संबंदी विधि - संहिताओं के प्रारूप तैयार करना और राष्ट्रीय सरकारों द्वारा उनके अनुसमर्थन का प्रयास करना है । इस कारण इसे सामान्यतः विश्व के (मिकों की संसद की संज्ञा दी जाती है । इसके प्रमुख अंगों में एक सामान्य - सबा और एक सचिवालय हैं । सामान्य सभा की बैठक वर्ष मे एक बार होती है जिसमें प्रत्येक सदस्य - रपाज्य अपने चार प्रतिनिधि भेज सकता है जिसमें दो सरकार द्वारा एक श्रमिकों द्वारा तथा एक मालिकों द्वारा मनोनीत किए जाते हैं । श्रमिकों के कार्य की दशाओं और उनके सामान्य् हित संरक्षण के क्षेत्र मे इस संगठन द्वारा एक सौ से भी अधिक अभिसमय निरूपित किए जा चुके हैं ।


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