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Definitional Dictionary of International Law (English-Hindi)
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hostilities
सशस्त्र कार्रवाई दो या दो से अधिक राज्यों के सैनिक बलों के मध्य सशस्त्र संघर्ष की कार्रवाई जो औपचारिक युद्ध की स्थिति में बी परिवर्तित हो सकती है, परंतु, ऐसा होना आवश्यक नही है । इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय विधि में विधिवत् युद् और सशस्त्र संघर्, अथवा सशस्त्र कार्वाई मे भेद किया जाता है ।

hot pursuit
अनवरत पीछा, तीव्र पीछा 1.किसी सक्षम अधिकारी द्वारा किसी अपराधी का अपने राज्य की सीमाओं के पार संलग्न दूसरे राज्य की सीमा में बिना उस राज्य की पूर्वानुमति के उस अपराधी का पीछा करते हुए घुस जाना । 2. अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत कोई राज्य विदेशी जहाजों को अपने राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करके भाग जाने पर उनको पकड़ने के ले खुले समुद्र अथवा संलग्न क्षेत्र में भी उनका पीछा कर सकता है । पीछा अविरल होना चाहिए और यदि भागने वालाजहाज अपने या किसी तीसरे देश के भूभागीय समुद्र मे गुस जाने में सफल हो जाए तो पीछा नहीं किया जा सकता ।

Hugo Grotius
ह्यूगो ग्रोशस हयूगो ग्रोशस (1583 - 1645 ) का नाम अंतर्राष्ट्रीय विधि के जन्मदाता के रूप में विश्वविख्यात है । वे हालैंड के रहने वाले थे और उनकी प्रतिमा बहुमुखी थी । वे विधिवेत्ता, राजनयिक, विचारक, दार्शनिक अनेक रूप मं विख्यात थे । परंतु उनकी स्थायी ख्याति उनकी पुस्तक - डि जुरे मेले अक पोसिस (युदध और शआंति के नियम) पर आधारित है जो सर्वप्रथम सन् 1625 में प्रकाशित हुई थी । इससे पहले सन् 1609 में ग्रोशस की पुस्तक - मेरे लिबरम (मुक्त समुद्र) प्रकाशित हो चुकी थी । इस प्रकार ग्रोशस ने भावी अंतर्राष्ट्रीय विधि का सूत्रपात किया और उसे इसका जनकमाना जा सकता है । परंतु कुछ विद्वान् इससे सहमत नहीं हैं । उसके मतानुसार ग्रोशस ने अपने पूर्वर्ती अनेक विद्वानों, विशेषकर बेली, जेंटिली और आयाला के विचारों का अनुसरण मात्र किया है ।

humanitarian international law
मानवीय अंतर्राष्ट्रीय विधि युद्ध विधि का वह भाग जिसका उद्देशय युद्ध की संक्रियाओं में मानवीयता के मानदंडों को लागू करना है । जैसे - बीमार और घायल सैनिकों की चिकित्सा और उपचार संबंधी नियम, युद्धबंदियों के प्रति व्यवहार संबंधी नियम, असैनिक जनता के प्रति व्यवहार संबंधी नियम,ये सब मानवीय अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय हैं । मानवीय अंतर्राष्ट्रीय विधि का प्रारंभ सन्म 1868 के जेनेवा सम्मेलन से हुआ जिसमें स्थल - युदध में बीमार और घायलों की चिकित्सा और उपचार संबंधी नियम अपनाने के लिए एक अभिसमय पर हस्ताक्षर किए गए थे । इस अभिसमय को रेडक्रास कंवेंशन भी कहते हैं । मानवीय अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियमों में निरंतर सुधार होता रहा है । सन् 1949 में जेनेवा सम्मेलन में इन विषयों से संबंधित चार अभीसमय अपनाए गए थे जो जेनेवा अभिसमय के नाम से विख्यात हैं । इन अभिसमयों की व्यवस्था में भी निरंतर पुनरीक्षण एवं संशोधन होता रहा है और इस हेतु रेडक्रास की अंतर्राष्ट्रीय समिति बराबर प्रयत्नशील है ।

human rights
मानव अधिकार वे अधिकार जो मनुष्य को मनुष्य होने के नाते प्राप्त होने चाहिए अर्थात् जो उसके राज्य अथवा राज्य के संविधान अथवा कानून की देन न होकर उसके जन्मसिद्ध अधिकार समझे जाने चाहिए और जो मनुष्यों के विकास के लिए न्यूनतम दशाएँ माने जाते हैं । इनका सर्वप्रथम विधिवत् निरूपण संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को स्वीकृत एक घोषणा पत्र में किया था । इनमें समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा और रोजगार के अधिकार परमुख हैं । इसके अतिरिक्त इनमें दासता, दास व्यापार और जाति, रंग, लिंग, भाषा अथवा राष्ट्रीयता पर आधारित भेद - भाव पर प्रतिबंध भी सम्मिलित है । इनका उद्देश्य प्रत्येक दशा और स्थितिति में न्यूनतम मानव मूल्यों अर्थात् मानवीयता के न्यूनतम स्तर को सुरक्षित रखना है और विश्व शांति को बल प्रदान करना है ।

Human Rights Commission
मानव अधिकार आयोग मानव अधिकार कमीशन दे. Commission on Human Rights.


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