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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सेवी
सेवा करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवी
उपासना- आराधना करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवी
सेवन करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवी
व्यवहार करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवी
उपभोग करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवी
स्थान-विशेष पर निरंतर वास करनेवाला।
वि.
(सं. सेविन्)

सेवै
टहल या परिचर्या करे।
क्रि.स.
(हिं. सेवना)
उ.- (क) सोइ करहु जिहिं चरन सेवै सूर जूठनि खाइ-१-१२६। (ख) भक्त सात्विकी सेवै संत-२-१३।

सेवै
पूजा-उपासना करे।
क्रि.स.
(हिं. सेवना)
उ.- (क) जो जो जन निस्चै करि सेवै हरि निज बिरद सँभारै-१-२५७। (ख) ज्यौं सेवै त्योंही गति होई-१०उ.-१२७।

सेवो, सोवौ
सेवा-पूजा करो।
क्रि.स.
(हिं. सेवना)
उ.-संत संग सेवौ हरि-चरना - ५-२।

सेव्य
जो सेवा या परिचर्या के योग्य हो या जिसकी सेवा परिचर्या की जाय।
वि.
(सं.)


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