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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पखारना
धोना।
क्रि. स.
[सं. प्रक्षालन, प्रा. पक्खाड़न]

पखारि
जल से धोकर।
उ.-चरन पखारि लियो चरनोदक धनि-धान कहि दैत्यारी-२५८७।
क्रि. स.
[हिं. पखारना]

पखारी
जल से धोयी।
उ.-(क) अरु अँचयो जल बदन पखारी-१०-२४१। (ख) नई दोहनी पोंछि-पखारी-११७९।
क्रि. स.
[हिं. पखारना]

पखारे
जल से धोये।
उ.-स्यामहिं ल्याई महरि जसोदा तुरतहिं पाइँ पखारे-१०-२३७।
क्रि. स.
[हिं. पखारना]

पखावज
एक बाजा।
संज्ञा
[सं. पक्ष + वाद्य]

पखावजी
पखावज बजानेवाला।
संज्ञा
[हिं. पखावज]

पखिया
झगड़ालू, बखेड़िया।
वि.
[हिं. पख]

पखी, पखीरी
पक्षी।
उ.-की सृक सीपज की बग पंगति की मयूर की पीड पखीरी-१६२७।
संज्ञा
[सं. पक्षी]

पखुड़ी, पखुरी
फूल की पंखुड़ी।
संज्ञा
[हिं. पखड़ी]

पखेरुआ, पकेरुवा, पखेरू
पक्षी, चिड़िया।
उ.-ससा सियार अरु बन के पखेरू धृग धृग सबन करी-२७४१।
संज्ञा
[सं. पक्षालु, प्रा. पक्खाडु, हिं. पखेरू]


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