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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पखराना
घुलवाना।
क्रि. स.
[हिं. पखारना]

पखरायौ
धुलनाया।
उ.-उत्तम बिधि सौं मुख पखरायौ-६०९।
क्रि. स.
[हिं. पखराना]

पखरी
फूलों की पंखुड़ी।
संज्ञा
[हिं. पखुड़ी]

पखवाड़ा, पखवारा
चाँद-मास के दो विभागों में एक।
संज्ञा
[सं. पक्ष + वार, हिं. पखवारा]

पखवाड़ा, पखवारा
पंद्रह दिन का समय।
संज्ञा
[सं. पक्ष + वार, हिं. पखवारा]

पखा
पक्ष, पंख पर।
संज्ञा
[हिं. पंख]

पखाउज
पखावज नामक बाजा।
उ.-बीना झाँझ-पखाउज-आउज और राजसी भोग-९-७५।
संज्ञा
[हिं. पखावज]

पखान
पत्थर।
संज्ञा
[सं. पाषाण]

पखना, पखानो
कहावत, कहनाबत।
उ.-बालापन ते निकट रहत ही सुन्यौ न एक पखानो-३३९३।
संज्ञा
[सं. उपाख्यान]

पखारत
धोते हैं, (जल से) स्वच्छ करते हैं।
उ.-अपनौ मुख मसि-मलिन मंद मति, देखत दर्पन माहीं। ता कालिमा मेटिबे कारन, पचत पखारत छाहीं-२-२५।
क्रि. स.
[हिं. पखारना]


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