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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पंजा
पंजा फैलाना (बढ़ाना)- लेने का डौल लगाना। पंजा मारना- झपट्टा मारना। पंजे झाड़कर चिपटना या पीछे पड़ना- जी जाना से जुट जाना।
मु.

पंजा
हथेली का संहुट, चंगुल।
संज्ञा
[फ़ा.]

पंजा
जूते का अगला भाग।
संज्ञा
[फ़ा.]

पंजा
जूए का एक दांव।
संज्ञा
[फ़ा.]

पंजा
छक्का-पंजा- दाँव-पेच, चालाकी।
मु.

पंजीरी
भुने आँटे की मिठाई जो प्रसाद-रूप में बाँटी जाती है।
संज्ञा
[हिं. पाँच + जीरा]

पंडर, पंडल
पीला, पाँडु वर्ण का।
वि.
[सं. पांडुर]

पंडर, पंडल
पिंड, शरीर।
संज्ञा
[सं. पिंड]

पंडा
तीर्थ या मंदिर का पुजारी।
संज्ञा
[सं. पंडित]

पंडा
घाटिया।
संज्ञा
[सं. पंडित]


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